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टेंडर के खेल में माहिर बीएस तिवारी, आखिर कौन बचा रहा बीएस तिवारी को ?   

#जब निगम और सरकार की मंशा टेंडर के माध्यम से काम कराने की है तो ओपन आफर से क्यूँ कराया गया काम.

#टेंडर के माध्यम से वही काम आधे दाम पर हो रहा है, जबकि ओपन आफर के जरिये दोगुने पर.  

#इस अंधेरगर्दी के जिम्मेदार निदेशक तकनीकी बीएस तिवारी को आखिर कौन बचा रहा है?

#टेंडर घोटाले और सीबीआई से दागी फर्म कोटा पलक्कड़ से उनके संबंधों की जांच में निगम के दूसरे US Gupta साबित होंगे बीएस तिवारी.

#US Gupta की जवाहरपुर में तैनाती में भी बीएस तिवारी का रहा है हाथ.      

अफसरनामा ब्यूरो

लखनऊ :अफसरनामा” द्वारा उत्तर प्रदेश विद्युत् उत्पादन निगम के भ्रष्टाचारी निदेशक तकनीकी बीएस तिवारी के कारनामों की “बीएस तिवारी का हाथ,सीबीआई से दागी फर्म के साथ” नामक खबर चलाए जाने व घोटाले के तथ्यों को सबूतों के साथ सार्वजनिक किए जाने के बाद दबाव में आये उत्पादन निगम के हित में फैसला लेते हुए कार्यों को निविदा के माध्यम से कराए जाने का आदेश “पत्रांक संख्या1341/आरएंडएम/परि एवं अनु./प्रशा.अनु.-11/09-18” जारी कर दिया और खिलाड़ी बीएस तिवारी के आफर लेटर के माध्यम से काम कराने के मंसूबों पर आगे के लिए पानी फेर दिया. आफर लेटर के माध्यम से काम कराने में बीएस तिवारी की विशेष कृपा रही दागी कंपनी मेसर्स आई एल पलक्कड़ के साथ और मेसर्स आई.एल. कोटा /पलक्कड़ के दागी अफसर अनुज गोयल और बीएस तिवारी की मिलीभगत से पैसों का गोरखधंधा किया जा रहा था.

इसी प्रकरण को afsarnama ने उठाते हुए कहा था कि ओपन ऑफर के जरिए एक दागी कंपनी आईएल कोटा पलक्कड़ को यह कार्य दुगुने दाम पर देने मे नियमों का उल्लंघन भी होता है और राजकीय धन की बन्दर बांट भी होती है. जबकि ऊर्जा क्षेत्र की एक बड़ी कंपनी NTPC द्वारा टेंडर के माधाम से इसी काम को कराया जा रहा है. इसके अलावा पावर हाउसों के चलते हुए करीब 25 से 30 साल हो चुके हैं और मार्केट में काम पाने को लेकर प्रतिस्पर्धा की भी कमी नहीं है, फिर भी निदेशक तकनीकी बीएस तिवारी द्वारा ओपन आफर के जरिये काम करवाना यह समझने के लिए काफी है कि इस पूरे खेल के पीछे पैसों की बंदरबांट ही है.

इस प्रकाशन के बाद उत्पादन निगम ने ओपन ऑफर की प्रक्रिया ख़त्म कर के टेंडर से काम कराने की बात कही है. परंतु यहाँ प्रश्न यह उठता है कि क्या निगम मे अपनी वित्तीय सोच या वित्तीय शुचिता नहीं है. या फिर एक निदेशक तकनीकी को इतने असीमित अधिकार दे दिए गए हैं जो स्वयं एक रिपीटर भ्रष्टाचारी है. बीएस तिवारी के कारनामों का afsarnama ने अपने कई खुलासों में सबूतो के साथ सार्वजनिक किया है.

अब प्रश्न यह है कि इस तरह के मामले में “Anpara B TPS” और ओबरा मे जो कार्य चल रहे हैं वे भी निविदा प्रक्रिया का पालन ना करके सीधे दोगुने दामों पर आईएल कोटा /पलक्कड़ को दिया गया है जिनसे अनुरक्षण में भारी धन के गोल माल होने की जानकारी आम है. जब “Anpara D TPS”. मे Tender के माध्यम से काम हो सकता है तो “Anpara B TPS” और “Obra” में क्यू नहीं? दागी कंपनी के लोगों के साथ मिलकर तय किए गए काम दुगुने दामों पर क्यू चल रहे हैं? क्या उत्पादन निगम के प्रबंध निदेशक की जानकारी में यह बात है? क्या MD द्वारा इसकी समीक्षा की गयी है कि दोगुने दाम पर अनुरक्षण का यह काम क्यूँ कराया जा रहा है और इस डबल खर्चा का एक हिस्सा किसे जा रहा है? प्रश्न यह भी है कि जब afsarnama ने खबर चलाई और निगम ने अनुरक्षण के कामों को निविदा से कराए जाने का आदेश जारी किया, जिससे साफ़ होता है कि ओपन आफर से कराया गया काम गलत है तो उन कामों की जांच क्यूँ नहीं कराई जा रही है जिनको बीएस तिवारी ने आफर लेटर के माध्यम से दिया है. अफसरनामा का मानना है कि यदि इन कारनामों की ईमानदारी से जांच कराई जाय तो बीएस तिवारी के काले कारनामें सामने होंगे और यह निगम के दूसरे यूएस गुप्ता साबित होंगे.       

बताते चलें उत्पादन निगम द्वारा चलाए जा रहे विद्युत और हाउसों में लगे कंट्रोल उपकरणों की देखरेख अनुरक्षण का कार्य निविदा द्वारा कराया जाता है. इस कार्य हेतु विशेषज्ञ कंपनी का चयन सभी परियोजनाओं पर खुली निविदा द्वारा किया जाता है जो कि सरकार की नीति और आदेश भी है. इसके बावजूद बीएस तिवारी ने उस आईएल पलक्कड़ कंपनी को काम दे दिया है, जिसके खिलाफ सीबीआई जांच हो चुकी है. इन कामों में बीएस तिवारी द्वारा सीएजी ऑडिट के सुझावों को भी दरकिनार किया गया है और सरकारी कोष को चुना लगाया गया है. पूर्व प्रबंध निदेशक के संज्ञान में यह पूरा प्रकरण रहा लेकिन कोई कार्यवाही अभी तक नहीं हो सकी है. सीएजी की आपत्ति के बाद पद्मापत इंजिनियर्स को खुली निविदा से काम मिला जिससे कि कीमत आधी रह गई जो कि यह साबित करने के लिए पर्याप्त है कि यदि खुली निविदा के द्वारा काम कराया गया होता तो सरकारी धन का बंदरबांट नहीं हो पाता और उत्पादन निगम को किसी तरह की क्षति नहीं होती.

अभी कुछ महीने पहले एटा जिले की जवाहरपुर सरिया चोरी के जिस प्रकरण को afsarnama ने प्रमुखता से उठाया और चोरी के मामले में संलिप्त बल्कि सरिया चोरी के सरगना तत्कालीन परियोजना प्रबंधक US Gupta को उसी के समकक्ष के साथ मुख्यालय से दूर अटैच किया गया जबकि गुप्ता को बचाने में लोगों ने कोई कसर नहीं छोड़ी. इसी गुप्ता को जवाहर पुर में परियोजना प्रबंधक के पद पर तैनात कराने में बीएस तिवारी की प्रमुख भूमिका तमाम कायदे कानूनों को ताख पर रखते हुए की गयी थी.

खुली निविदा और आफर लेटर के माध्यम से कराए गए काम के अंतर को सबूतों के साथ समझने के लिए नीचे दिए लिंक पर क्लिक करें.

बीएस तिवारी का हाथ, सीबीआई से दागी फर्म के साथ

बीएस तिवारी का हाथ, सीबीआई से दागी फर्म के साथ

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