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गणतंत्र दिवस परेड में यूपी की “राममंदिर झांकी” को मिला प्रथम पुरष्कार, अपर मुख्य सचिव और निदेशक सूचना व उनकी टीम हुई पुरस्कृत

अफसरनामा ब्यूरो

लखनऊ : इस बार गणतंत्र दिवस परेड में उत्तर प्रदेश की झांकी में अयोध्या में बनने वाले राम मंदिर को दर्शाया गया और अपनी झांकी का थीम भी अयोध्या, उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत रखा. राज्यों द्वारा प्रस्तुत की गयी झांकियों में उत्तर प्रदेश की इस भव्य झांकी को प्रथम स्थान मिला. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी इसकी तस्वीर पोस्ट करते हुए लिखा कि जहां अयोध्या सियाराम की, देती समता का संदेश, कला और संस्कृति की धरती, धन्य-धन्य उत्तर प्रदेश.

गुरूवार को राजधानी दिल्ली में केन्द्रीय युवा एवं खेल मंत्री किरण रिजजू ने उत्तर प्रदेश की झांकी को पहला पुरष्कार प्रदान किया. श्री रिजजू के हाथों यह पुरष्कार अपर मुख्य सचिव सूचना नवनीत सहगल और निदेशक सूचना शिशिर व उनकी टीम ने लिया. देश के गणतंत्र समारोह के इतिहास में शायद यह पहली बार हुआ है कि उत्तर प्रदेश की झांकी को पहला स्थान प्राप्त हुआ है. निदेशक शिशिर ने सभी लोगों का धन्यवाद करते हुए कहा कि यूपी को लगातार दो वर्षों से पुरष्कार मिल रहा है और इस बार प्रदेश पिछली बार की तुलना में दूसरे नम्बर से एक कदम आगे बढते हुए प्रथम स्थान पाने में कामयाब रहा. शिशिर के अनुसार प्रशंसा से ही काम करने की प्रेरणा मिलती है. निदेशक शिशिर ने गीतकार विरेंद्र सिंह का विशेष आभार भी जताया. बताते चलें कि इस झांकी का थीम सांग राजधानी लखनऊ के गीतकार व साहित्यकार वीरेन्द्र वत्स द्वारा ही लिखा गया है. वीरेन्द्र वत्स ने अपने इस गीत में इस गीत में अयोध्या और सीता-राम के प्रति जनमानस की आस्था का उल्लेख किया है.

बताते चलें कि पहली बार यूपी की तरफ से गणतंत्र दिवस के मौके पर राजपथ पर राम मंदिर की प्रतिकृति प्रस्तुत की गई. झांकी के प्रथम भाग में रामायण के रचयिता कहे जाने वाले महर्षि वाल्मीकि की बड़ी प्रतिमा रही और उनके पीछे रामजन्म भूमि अयोध्या में बनने वाले राम मंदिर का मॉडल रहा. इस झांकी में एक ओर अयोध्या के दीपोत्सव के प्रतीक मिट्टी के बने दीये जलाए गये थे तो वहीं अन्य चित्रों में भगवान राम द्वारा निषादराज को गले लगाते हुए और शबरी के जूठे बेर खाते हुए, अहल्या के उद्धार की, हनुमान जी के संजीवनी बूटी लाये जाने का दृश्य, जटायु-राम संवाद, रावण की अशोक वाटिका सहित अन्य दृश्यों को दर्शाया गया था. राजपथ पर राम मंदिर की इस झांकी को दिखाए जाने और उसके प्रथम आने पर प्रदेश के लोगों में काफी ख़ुशी हैं. उनका मानना है कि राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय पटल पर इस झांकी के देखने से लोग अयोध्या व भारतीय संस्कृति को जानेंगे.

गौरतलब है कि इसके पहले 71वें गणतंत्र दिवस पर उत्तर प्रदेश की झांकी में सूफियाना मिजाज के साथ गंगा जमुनी तहजीब को दर्शाया गया था जिसमें प्रदेश की झांकी को द्वितीय पुरष्कार मिला था. उस समय झांकी में एक ओर जहां गंगा की निर्मल धारा में प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत और अविरल प्रवाह की झलक दिखी थी तो यूपी के बाराबंकी के प्रसिद्ध देवा शरीफ के सूफियाना मिजाज का भी एहसास हुआ था. साथ ही उस समय की प्रस्तुत झांकी में भारत की सनातन संस्कृति की प्रतिबिंब प्रधानमंत्री का संसदीय क्षेत्र काशी भी था और मशहूर शहनाई वादक उस्ताद बिस्मिल्लाह खान का वाद्य यंत्र भी दिखाया गया था.

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