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हादसों का मास्टरमाइंड बीएस तिवारी ही ओबरा दुर्घटना के पीछे

#एमडी को खुश करने के लिए खराब यूनिट को दबाव डालकर चलवाया बीएस तिवारी ने.

#एमडी के प्रस्तावित दौरे के चलते गुड बुक में आने के लिए खराब “वाल मिल” को चलाने का बनाया दबाव.

#अनपरा, हरदुआगंज और अब ओबरा, बिजली घरों में हादसे जारी, जिम्मेदार बीएस तिवारी.         

#ओबरा विद्युत परियोजना के बिटीपीएस माइनस के केबिल गैलरी में लगी थी आग.  

#परियोजना की तीन इकाईयां ट्रिप, बड़े पैमाने पर नुकसान के लगाए जा रहे कयास.

#कई बड़े अधिकारी मौके पर, अभी तक किसी तरह की जनहानि की जानकारी नहीं.

#ओबरा में आग की इस बड़ी घटना की व्यापक जांच की हो रही मांग, ताकि इसकी पुनरावृत्ति न हो.     

अफसरनामा ब्यूरो

लखनऊ : ओबरा में जो भी हुआ वह दुखद हुआ लेकिन बिजली घर में हर अमंगल के पीछे जाने क्यों बीएस तिवारी की परछाईं नजर आ रही है. ओबरा बिजली घर के हादसे के पीछे भी बीएस तिवारी की ही काली छाया है. उत्पादन निगम के प्रबंध निदेशक सेंथिल पांडियन के दौरे से ऐन पहले निदेशक तकनीकी बीएस तिवारी ओबरा पहुंचते हैं और वहां के जीएम व सीजीएम को तकनीकी रूप से खराब दो यूनिटों को जबरिया चलाने का हुक्म सुना देते हैं.

आग लगने के कारणों की ताजा जानकारी यह है कि प्रबंध निदेशक के बंद पड़ी यूनिट को लेकर सवालों से बचने के लिए निदेशक तकनीकी होने के नाते बीएस तिवारी पहले ही पहुंचकर ओबरा यूनिट की 2 बंद पड़ीं “वाल मिल” को जबरन चलाने का हुक्म परियोजना प्रबंधक और मुख्य परियोजना प्रबंधक को दे दिया. तिवारी का इन पर दबाव इतना था कि ये दोनों अफसर खुद जाकर आपरेशन रूम में बैठ गए और इंजीनियर्स पर दबाव बनाने लगे. यह सब पूरी प्रक्रिया नार्मल रूटीन से हटकर रही. अमूमन होता यह था कि “वाल मिल” चलावाने के लिए कभी परियोजना प्रबंधक अथवा मुख्य परियोजना प्रबंधक उस आपरेशन रूम में नहीं जाता था. “वाल मिल” चलाने के काम में एक्सपर्ट इंजीनियर्स की जांच पड़ताल के बाद उस “वाल मिल” को चालू किया जाता था.

बीएस तिवारी द्वारा परियोजना प्रबंधक और मुख्य प्रबंधक पर दबाव इतना था कि वह आपरेशन रूम में पहुँच गए और इंजीनियर्स पर “वाल मिल” को चलाने के लिए दबाव बनाया.“वाल मिल” में खराबी और चेकिंग की बात इंजीनियर्स द्वारा कहे जाने के बावजूद “वाल मिल” को चलवा दिया. पहले एक “वाल मिल” के न चलने पर दूसरी “वाल मिल” को चलाने का आदेश दिया गया. इस तरह दोनों “वाल मिल” के चलाये जाने से “वाल मिल” और ट्रांसफार्मर के बीच का पावर केबल गर्म होकर जलना शुरू हो गया. दबाव और जबरदस्ती झेल रहे इंजीनियर्स ने भी ट्रांसफार्मर तक बिना जांच किये सुबह करीब 3 बजे घर चले गए और यही केबल जलते हुए इतना बड़ा रूप ले लिया.

इसके पहले भी 2013 में अनपरा तापीय परियोजना पर महा प्रबंधक के पद पर रहते हुए बीएस तिवारी ने 500 मेगावाट की इकाईयों का जीटी (जनरेटर ट्रांसफार्मर) अपने भ्रष्टाचारी रवैये के कारण समय से नहीं खरीदा जिसकी वजह से अनपरा की 500 मेगावाट की इकाई की जीटी के खराब होने के उपरांत नये जीटी के अभाव में इकाई को बहुत समय तक नहीं चलाया जा सका था जिसमें चार्जसीट भी हुई थी और यह बच निकला था. फिर 2015 में हरदुआगंज में भी इसके परियोजना प्रबंधक रहने के दौरान एक बड़ा हादसा हुआ और मजदूरों की मौत हुई. मजिस्ट्रेटी जांच में दोषी पाए जाने के बाद भी यह बच निकला. और अब ओबरा में भी इसने अपने कारनामों को दोहरा दिया.

बताते चलें कि ओबरा थाना इलाके के ओबरा विद्युत “बी” परियोजना के बिटीपीएस माइनस के केबिल गैलरी में शार्ट सर्किट से आज सुबह  आग लग गई. परियोजना में लगी आग से ओबरा “बी” परियोजना की 200 मेगावाट की तीन इकाई 9,10 और 11 ट्रिप हो गयी. आग पर काबू पाने के लिए सीआईएसएफ की 6 फायर बिग्रेड गाड़ियां लगाई गई और साथ ही 5 ट्रक बालू और 5 एम्बुलेंश भी लगाई गई.

परियोजना की सुरक्षा के लिए लगी सीआईएसएफ और जिला प्रशासन ने आग पर काबू पाने के लिए व्यापक इंतजाम किये और आग पर काबू पा लिया. अब आग लगने के कारणों और नुकसान का पता लगाने के लिए जांच की जायेगी. जानकारों का कहना है कि यह अत्यंत दुखद है, आग लगने की वजह जो भी रही हो लेकिन कहीं न कहीं लापरवाही जरूर हुई होगी जिसके कारण आग लगी और परियोजना को लाखों का नुकसान हुआ. उनका कहना है कि आग की भयंकरता को देखते हुए कहा जा सकता है कि बिजली के उत्पादन पर इसके दूरगामी दुष्परिणाम भविष्य में देखने को मिल सकते हैं.

वैसे तो यह निगम के लिए अत्यंत दुखद क्षण है लेकिन “अफसरनामा” जांच करने वाली कमेटी से कुछ और बिन्दुओं की तरफ उसका ध्यान आकर्षित करना चाहेगा ताकि आने वाले समय में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो सके और यदि कोई दोषी हो तो उसको सजा मिल सके. जांच कमेटी को इन बिन्दुओं को भी देखना चाहिए कि “क्या cable gallery मे fire safety उपकरण लगे थे, क्या इनकी कोई टेस्टिंग कभी हुई, इस बड़ी चूक के लिए जिम्मेदार कौन? और Utpadan Nigam मुख्यालय का परियोजना की सुरक्षा को लेकर क्या जिम्मेदारी थी?

ओबरा परियोजना में आग लगने की  जानकारी होने पर जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक और सदर एसडीएम, सीओ  आदि मौके पर पहुंचे. इस दौरान परियोजना के अंदर मीडिया के प्रवेश पर रोक लगा दिया गया. दो लोगों के  धुएं के घुटन से घायल होने की भी जानकारी आ रही है जिन्हें ओबरा परियोजना के हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है.  अपर जिलाधिकारी , सोनभद्र उमाकान्त तिवारी ने बताया कि ओबरा विद्युत परियोजना के “ओबरा बी” के  केबिल यार्ड में सुबह संदिग्ध परिस्थितियों में आग लगने से तीन इकाईयां ट्रिप हो गयी जिससे 1000 मेगावाट बिजली का उत्पन्द बन्द हो गया.

बीएस तिवारी ने हरदुआगंज में मजदूरों को बांटी थी मौंत

 

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