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ओबरा, पारीछा, हरदुआगंज जल गया लेकिन नहीं जला किसी जिम्मेदार का हाथ

#हरदुआगंज, परीछा की तरह ओबरा हादसे के आरोपियों को बचाने में जुटा बिजली विभाग.

#कारवाई सिफर उल्टे आरोपी को अग्नि सुरक्षा का जिम्मा भी सौंपा.

#जवाहरपुर में सरकारी माल लूटने वाले के साथ आला अफसरों और सरकार का हाथ.

#तबादलों में अंधेरगर्दी जारी तो जांच के नाम पर दोषियों को अभयदान.

#नैश पम्प, प्रेस टूल और आई0 एल0 पलक्कड़ में भ्रष्टाचार की भूमिका, फिर भी बीएस तिवारी मस्त.

# सौभाग्य योजना के तहत ज्यादा कनेक्शन देने और सप्लाई के घंटे बढ़ने से बढ़ी बिजली की डिमांड.

#बिजली की डिमांड बढ़ने और रेवन्यू कलेक्शन में कमी से कारपोरेशन का 80000 करोड़ का कैश गैप बढ़ा.

#कारपोरेशन के सामने वित्तीय संकट,एनटीपीसी,पीजीसीआईएल ने पेमेंट भुगतान का दिया नोटिस.

#भुगतान में लेट अथवा विफल होने पर बढ़ सकता है बिजली का संकट, चुनावी दौर में विभिन्न मोर्चों पर संघर्ष कर रही पार्टी और सरकार के लिए होगा एक और झटका साबित.    

अफसरनामा ब्यूरो 

लखनऊ : भाजपा की योगी सरकार में गांव और शहरों में बिजली की सप्लाई के घंटों में बढ़ोतरी कर वाहवाही बटोरने वाले बिजली विभाग का प्रबंधन फेल साबित हो रहा है. आर्थिक संकट से जूझ रहे बिजली विभाग के जिम्मेदारों का अपने अधीनस्थों पर कोई कंट्रोल नहीं है और न ही इसकी कोशिश की जा रही है. विभाग के गुनाहगारों को बचाने और उनको संरक्षण दिए जाने का पिछली सरकारों से चला आ रहा रिवाज आज भी योगिराज में कम से कम बिजली विभाग में तो अनवरत जारी है. जहां जवाबदेही तय करने के बजाय मामले को रफादफा करने की पुरानी रवायत को योगी सरकार में भी अपनाया जा रहा है और विभाग के मुखिया सहित सभी की आँखें बंद हैं.

प्रबंधन की कुर्सी पर बैठे अफसरों की बेअन्दाजी का आलम यह है कि घटना कोई भी क्यूँ न हो जाय विभाग में उनके बच निकलने की 100 प्रतिशत गारंटी है. जिसका अंदाजा जवाहरपुर की सरिया चोरी, हरदुआगंज, पारीछा और अब ओबरा जल जाने के बाद भी किसी अधिकारी अथवा कर्मचारी का हाथ नहीं जलने से लगाया जा सकता है. आलम यह है कि चोर को खुला छोड़ दिया जाता है और सुरक्षा के लिए एक बड़ा ताला लगाने की बात की जाती है.

महत्वपूर्ण बात यह कि स्वच्छता, भ्रष्टाचार और सुशासन का नारा देने वाली सरकार के बडबोले मंत्री जोकि सरकारी प्रवक्ता भी हैं उक्त प्रकरणों पर कुछ भी बोलने से बचते रहे हैं और एक हफ्ते बाद रटा-रटाया जुमला बोलकर चुप हो जाते हैं. संविदा कर्मियों पर हंटर चलाने वाले ईमानदार चेयरमैन अपने नीचे की कमियों से अनजान बन सब कुछ एमडी के उपर डालकर खुद को बचाने में लगे हुए हैं. ऐसे में खस्ताहाल पावर कारपोरेशन में सुधार की उम्मीद बेमानी है. भ्रष्टाचार पर बड़ी-बड़ी छोड़ने वाले और छोटी सी बात पर मिर्जापुर के SE AK SINGH जैसे उच्च अधिकारी को सस्पेंड करने वाले विभाग के मंत्री की चुप्पी और प्रकरणों की अनदेखी सवाल खडा करती है. विभाग में पिछली सरकारों के भ्रष्टाचार और भ्रष्टाचारियों पर कार्यवाही करने के बजाय खुद के समय में हुए कारनामों पर पर्दा डालने की कवायद जारी है. जवाहरपुर की सरिया चोरी के जिम्मेदार को परियोजना से बुलाकर निदेशालय पर तैनात कर दिया जाता है तो ओबरा अग्निकांड के जिम्मेदारों को वहीँ रखकर जांच के नाम पर लीपापोती का खेल किया जाता है.

जवाहरपुर परियोजना की सरिया चोरी प्रकरण में परियोजना प्रबंधक रहे यूएस गुप्ता और जेई सुरेन्द्र की संलिप्तता की जानकारी होने के बावजूद वहां से तब तक नहीं हटाया गया जब तक सीएम सचिवालय का हस्तक्षेप नहीं हुआ. जिसमें जिला प्रशासन ने अपनी प्रथम रिपोर्ट में विभाग के 4 लोगों की संलिप्तता की बात कही है. यहाँ भी जांच के नाम पर निदेशक निर्माण सुबीर चक्रवर्ती को भेज कर चोर को छोड़ केवल ताला लटकाने का काम यानी जांच के नाम पर केवल लीपापोती का काम किया गया और पूरे प्रकरण पर मंत्री जी चुप रहे.

Afsarnama को पता चला है कि जवाहरपुर की सरिया चोरी भी एक उच्च स्तर के अफसर की देख-रेख व समर्थन में हो रही थी. सरिया चोरी का कुछ हिस्सा विभाग के एक आला अधिकारी को भी गया है जिसका खुलासा समय आने पर किया जाएगा…………..

सौभाग्य योजना के तहत ज्यादा कनेक्शन देने और सप्लाई के घंटे बढ़ने से बिजली की डिमांड बढ़ी है और रेवन्यू कलेक्शन में कमी आने से कारपोरेशन का 80000 करोड़ का कैश गैप बढ़ा हुआ है. जिसके चलते कारपोरेशन के सामने वित्तीय संकट है और एनटीपीसी,पीजीसीआईएल ने कारपोरेशन को नोटिस जारी किया है और कारपोरेशन को इन 8 हजार करोड़ के प्रबंधन में पसीने छूट रहे हैं. भुगतान में लेट अथवा विफल होने पर प्रदेशवासियों को बिजली संकट का सामना करना पड़ सकता है. जोकि इस चुनावी दौर में विभिन्न मोर्चों पर संघर्ष कर रही पार्टी और सरकार के लिए एक और झटका साबित होगा.

ऐसे में ओबरा जैसी घटना जिसमें विभाग का करीब 500 करोड़ रुपया स्वाहा हुआ है, को लेकर जिम्मेदार मस्त हैं. घटना के कारणों को जानने और जिम्मेदारों पर शिकंजा कसने के बजाय केवल Fire Sefty के लिए आदेश जारी कर मामले को निपटाने में लगे हैं. यह तथ्य अविवादित है कि ओबरा की आग कोई प्राकृतिक आपदा नहीं, अधिकारियों कर्मचारियों को डर का पैनिक दिखा कर तकनीकी आवश्यकताओं को अनदेखा कर मिल चालू कराने और जलने की आवाजें आने के बाद भी चेक करने का मौका ना देने के कारण आग लगी. यह भी अविवादित है कि सुरक्षा के व्यापक इन्तज़ाम नहीं करने मे भी निदेशक तकनीकी बीएस तिवारी ही जवाबदेह हैं फिर भी कोई एक्शन नहीं.

विभाग के भ्रष्टाचार के खिलाफ पिछली सरकार के कारनामों पर अपनी आवाज बुलंद करने वाले मंत्री श्रीकांत शर्मा प्लांट में लगी आग के दोषी अधिकारियों पर सख्त कार्यवाही की बात कह कर जिम्मेदारी से मुक्त हो लिए. लेकिन सवाल यह है कि क्या मंत्री जी ने यह जानने की कोशिश की कि आखिर आग लगने के वास्तविक दोषी कौन हैं? अभी जिन सुरक्षा मानकों को लगाने की बात की जा रही है, पहले उसकी अनदेखी के लिए जवाबदेह कौन है? जब दोषी पकड़ में आएगा और जवाबदेही तय की जायेगी सजा तो तभी देंगे. फिलहाल जिस तरह से पूरे प्रकरण की जांच चल रही है उससे तो किसी तरह की उम्मीद नहीं है, बस मसले को ठन्डे बस्ते में डाल जान छुडाने की कवायद जारी है.

आर्थिक मोर्चे पर हाथ-पांव मार रही व कानून व्यवस्था के संकटों का सामना कर रही योगी सरकार के मंत्री व अधिकारियों की सच्चाई यह घटनाएँ बयान करती है कि वे कितने जिम्मेदार हैं. जब बड़े-बड़े उद्योगों को आमंत्रित करने वाली योगी सरकार के बिजली विभाग का यह हाल है तो इन्वेस्टर सम्मिट की सफलता के बड़े बड़े दावे क्या ऐसी बिजली विभाग के जिम्मेदारों से पूरी की जाएगी. क्या उद्योग जगत के लिए सबसे जरूरी बिजली, रोड और कानून व्यवस्था के इसी सिस्टम से उत्तर प्रदेश को चमकाने की तैयारी है.

हर विषय पर सरकारी प्रवक्ता के रूप में सरकार का पक्ष रखने और हर विषय पर अपनी प्रतिक्रिया देने वाले बिजली विभाग के जिम्मेदार मंत्री कितने गैर जिम्मेदार हैं इसका अंदाजा लगाया जा सकता है. मंत्री जी अगर केंद्र की अपनी सरकार के मंत्री से ही कुछ सीख लेते तो यह सवाल नहीं उठता और जिम्मेदारों पर कार्यवाही होती. वित्तीय संकट से जूझ रहे बिजली विभाग के ओबरा के इतने बड़े अग्नि कांड और जवाहरपुर सरिया चोरी प्रकरण पर उनकी कोई प्रतिक्रिया तक नहीं आयी और न ही मौके पर गए. जिस ओबरा में करीब 250 करोड़ पहले नवीनीकरण में खर्च हुआ और अब आग लगने के बाद प्लांट को इससे ज्यादा का खर्च उसको पुनः स्थापित कर चालू करने में लगेगा वहीँ सरिया चोरी प्रकरण को साधारण चोरी बताने वाले विभाग को झूठा साबित करते हुए जिला प्रशासन ने इसमें विभागीय संलिप्तता के साथ ही साथ अंतर्राज्यीय गैंग के शामिल होने की बात कही है.

——अगले अंक में—— सरकार द्वारा प्रोबेशन पर नियुक्त किये गए निदेशकों के कारनामे.

हादसों का मास्टरमाइंड बीएस तिवारी ही ओबरा दुर्घटना के पीछे

जिला प्रशासन चुस्त तो उर्जा विभाग सुस्त, जवाहरपुर परियोजना की सरिया चोरी का मामला

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