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दागी एनजीओ, फरजीवाड़े के सहारे कानपुर होगा स्मार्ट सिटी

#प्रमुख सचिव नगर विकास का नारा …हम जिएं तुम जियों, एनजीओ.

#कानपुर नगर आयुक्त अविनाश सिंह कर रहे तेल में खेल. 

अफसरनामा ब्यूरो   

लखनऊ : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छ भारत मिशन को पलीता लगाने में जुटा उत्तर प्रदेश का नगर विकास विभाग और इसके कारिंदे अब दागी एनजीओ की शर्मनाक कारगुजारियों से कानपुर शहर को स्मार्ट सिटी बनाने निकले हैं. प्रमुख सचिव नगर विकास मनोज कुमार ने खुले में शौच से मुक्त प्रदेश बनाने के प्रधानमंत्री के सपने को पूरा करने के लिए प्रापर्टी के धंधेबाजों को पखाना बनाने की जिम्मेदारी सौंप रखी है वहीं उनके चहते कानपुर के नगर आयुक्त अविनाश सिंह ने दागी एनजीओ को स्मार्ट सिटी बनाने का जिम्मा दे डाला है. समूचा नगर विकास विभाग इस समय धंधेबाज एनजीओ व कथित एनजीओ एक्सपर्ट की चारागाह बन चुका है.

दागी एनजीओ श्रमिक भारती के फरजीवाड़े का आलम यह है कि कानपुर में स्वच्छता की रेटिंग के लिए सर्वे करा रही सलाहकार संस्था कार्वी के सर्वेक्षण के दौरान ही इसके कारकुन गंदे स्थलों की सफाई करने पहुंच जाते हैं और आंखों में धूल झोंकने का काम कर रहे हैं. कानपुर में स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के नाम पर चलने वाली धांधली इस कदर भयावह है कि जगह-जगह फैले कूड़े के ढेर कार्वी की नजर में न आएं इसलिए चुने स्थानों का दौरा करवाया जाता है और दौरे से चंद मिनट पहले दागी एनजीओ के लोग बाकायदा मोबाइल वैन में झाड़ू पंजा लेकर पहुंच कर वहां रस्मी सफाई कर देते हैं. स्मार्ट सिटी बनने का सपना पाले कानपुर का आलम यह है कि खुद नगर निगम के कूड़ाघर में सुअर लोट रहे हैं और पूरा शहर गंदगी से बेहाल है.

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का ड्रीम प्रोजेक्ट स्वच्छ भारत मिशन उत्तर प्रदेश में भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ रहा है. मिशन में प्रमख सचिव की मेहरबानी से लखनऊ से लेकर कानपुर तक एनजीओ का खेल जारी है. शहरों की स्वच्छता के सर्वे के लिए केंद्र सरकार ने कार्वी को नोडल एजेंसी के रूप में नियुक्त किया है. कार्वी ने कानपुर में स्वच्छता रेटिंग के लिए डाकुमेंटेशन का काम पूर्ण कर अब यह एजेंसी शहर में स्वच्छता का भौतिक सत्यापन करने में जुटी है. सूत्रों के मुताबिक़ शहर में इस मिशन के जिम्मेदार अधिकारियों ने एजेंसी को स्वच्छता रेटिंग के लिए किये गये डाकुमेंटेशन में गुमराह करने के बाद भौतिक सत्यापन में भी गुमराह करने का काम कर रहे हैं. गुमराह करने के इस काम में कानपुर के नगर आयुक्त और नगर विकास विभाग के प्रमुख सचिव मनोज कुमार की पूरी एनजीओ टीम लगी हुई है.

कानपुर शहर की नालियां जहां पूरी तरह से ब्लाक हैं और बजबजा रहीं हैं तमाम इलाकों में गन्दगी का अम्बार लगा हुआ है. बजरिया थाने के पास नगर निगम के कूड़ाघर में सुअर लोट रहे हैं, तो पीरोड पुराना कानपुर का बुरा हाल है. ऐसे में अपनी नाकामी को छिपाते हुए नगर आयुक्त द्वारा पूर्व में बदनाम श्रमिक भारती नामक एनजीओ की एक पूरी टीम हायर कर ली है जोकि सर्वे वाले प्वाईंट पर जाकर पहले से ही इकट्ठा हो जाती है और सर्वेयर टीम को गुमराह करने का काम करती है. वैसे तो सर्वे की टीम को पहले वही स्पॉट दिखाए जाते हैं जहां से कोई शिकायत की संभावना नहीं होती है लेकिन अगर टीम किसी दूसरी जगह को देखने की बात करती है तो इसके लिए पहले से ही लोगों को स्पॉट पर पहंचने का निर्देश जारी कर दिया जाता है. सूत्रों की मानें तो इसके लिए बकायदा नगर आयुक्त ने रात को 11 बजे मीटिंग कर मौखिक निर्देश जारी किये हैं कि कार्वी की टीम द्वारा किसी अन्य स्पॉट पर सर्वे की स्थिति में आप लोगों को डेढ़ घंटे के अन्दर वहां पहुंचकर सारी सफाई व्यवस्था को दुरुस्त करना होगा और इसके लिए बकायदा एक गाड़ी साबुन, तौलिया आदि जरूरी सामानों से लैस की गयी है.

कानपुर नगर आयुक्त के इस काम को अंजाम देने के लिए प्रमुख सचिव के खासमखास अखिलेश गौतम लखनऊ से भेजे गए हैं. अखिलेश गौतम जोकि खुद को एक एनजीओ वाटर एवं सेनिटेशन फॉर अर्बन पूअर (WSAP) का नेशनल कोआर्डिनेटर बताते हैं और लोगों से यह कहते हुए सुने जा सकते हैं कि मुझे इन सबको मैनेज करने की जिम्मेदारी दी गयी है. जानकार बताते हैं कि अखिलेश गौतम के नेतृत्व में साउथ की एक एनजीओ की टीम पूरा स्वच्छता मिशन का मैनेजमेंट देख रही है.

कानपुर नगर आयुक्त कर रहे तेल में खेल 

फिलहाल नगर विकास में योगी सरकार के कैबिनेट मंत्री सुरेश खन्ना की नाक के नीचे ये दो भ्रष्ट अफसर पूरे खेल को अंजाम देने और पीएम के साथ ही साथ खुद सीएम के मंसूबों को पलीता लगा रहे हैं. कानपुर नगर आयुक्त का विवादों से पहले भी नाता रहा है. हथियारों के लायसेंस जारी करने जैसे गंभीर मसले में भी इनका नाम उछला था जिसकी जांच कहीं दबा दी गयी है. नगर निगम की गाड़ियों के जिस तेल के खर्चे को घटाकर पूर्व नगर आयुक्त द्वारा 1.5 करोड़ से 1 करोड़ कर दिया गया था वही अब वर्तमान नगर आयुक्त ने इस खर्च को करीब 3 करोड़ कर दिया है. शहर में कूड़ा उठाने के नाम पर गाड़ियों के तेल खर्च में बढ़ोत्तरी तो हुई लेकिन शहर में गन्दगी का हाल जगजाहिर है. मिली जानकारी के अनुसार फिलहाल नगर निगम कानपुर में तेल में कमीशन का खेल जारी है और यह मुख्यमंत्री योगी के फिजूर्खर्ची रोकने के संकल्प का खुला मजाक है.

शायद इन्वेस्टर्स समिट में राज्यपाल राम नाईक सहित अन्य ने यूपी की इसी तरह की अफसरशाही पर बातों ही बातों में इशारा किया था. समिट के दूसरे दिन अपने समापन भाषण में राज्यपाल ने कहा था कि मुख्यमंत्री चौदह और सोलह घंटे काम भले ही करें लेकिन काम को जमीन पर उतारने की असली जिम्मेदारी ब्यूरोक्रेसी की तथा  मुख्यमंत्री योगी के सहयोगियों की होती है.

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