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“अफसरनामा” उठाता रहा है गोमती नदी के संरक्षण और सफाई का मुद्दा, अब देर से चेती सरकार का यह प्रयास कितना होगा असरदार, भविष्य के गर्भ में

अफसरनामा ब्यूरो

लखनऊ : गोमती को प्रदुषण मुक्त और अविरल करने के लिए कई विभागों के समन्वित प्रयास की जरूरत है.
सालों पहले उठाया था मुद्दा लेकिन नहीं जमीन पर इसकी हकीकत अभी तक नहीं देखने को मिली है, अभी तक सरकार का प्रयास केवल कागजी ही रहा है. सरकार से आस इस बार भी है, अब देखना होगा कि यह जमीन पर कितना सत्य होता है. फिलहाल उत्तर प्रदेश राज्य परिवर्तन आयोग ने शनिवार को लखनऊ में राज्यस्तरीय कार्यशाला “Revitalizing the Lifeline: Clean Gomti 2026” का आयोजन किया.

राज्य परिवर्तन आयोग के मुख्य कार्यपालक अधिकारी मनोज कुमार सिंह के निर्देशन में आयोजित इस कार्यशाला ने गोमती नदी के पुनरुद्धार की दिशा की ठोस नींव रखी गयी. इस व्यापक और बहुआयामी कार्यशाला का उद्देश्य गंगा की प्रमुख सहायक नदी गोमती को प्रदूषण मुक्त, स्वच्छ, सतत और जीवनदायिनी स्वरूप में पुनर्स्थापित करने हेतु एक समग्र, वैज्ञानिक, व्यावहारिक और दीर्घकालिक रणनीति तैयार करना रहा, ताकि नीति निर्माण से लेकर जमीनी क्रियान्वयन तक एक सुदृढ़, समन्वित और प्रभावी कार्ययोजना विकसित की जा सके.

इसके पहले भी प्रदेश की नदियों के पुनरुद्धार के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने खुद कमान संभाली थी. और एक माह में डीपीआर तैयार करने के निर्देश दिए थे. पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नमामि गंगे एवं ग्रामीण जलापूर्ति विभाग के कार्यों की समीक्षा के दौरान अविरल निर्मल गोमती की परिकल्पना को मूर्त रूप देने के निर्देश दिए थे. और इस बाबत अधिकारियों को एक माह में विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार कर प्रस्तुत करने हेतु कहा था. बताते चलें कि उत्तर प्रदेश में बहने वाली गोमती एक ऐसी नदी है जिसमें जल का प्रवाह उसके खुद के स्रोतों से होता है. लेकिन साफ़ सफाई आदि के आभाव में स्रोत बंद हो गए हैं या फिर बंद होने के कगार पर हैं, जिसके चलते इसमें जल की भी कमी हो गयी है. ऐसे में मुख्यमंत्री योगी की सक्रियता से इस नदी के उद्धार की उम्मीद जगी है.

इस आयोजित कार्यशाला के मौके पर राज्य परिवर्तन आयोग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मनोज कुमार सिंह ने कहा कि “गोमती नदी उत्तर प्रदेश की जीवनरेखा है. और इसके संरक्षण व पुनरुद्धार के लिए एक समग्र, वैज्ञानिक तथा दीर्घकालिक दृष्टिकोण अपनाना अत्यंत आवश्यक है. “Revitalizing the Lifeline: Clean Gomti 2026” कार्यशाला का आयोजन इसी उद्देश्य से किया गया है, ताकि नीति-निर्माण, वित्तीय प्रबंधन, तकनीकी नवाचार और जनसहभागिता को एक साझा मंच पर लाकर ठोस एवं व्यवहारिक कार्ययोजना तैयार की जा सके. बतातें चलें कि मनोज कुमार सिंह इसके पहले प्रमुख सचिव नगर विकास भी रह चुके हैं और उस समय भी एकबार गोमती नदी के उद्धार की शुरुआत की गयी थी.

इस अवसर पर पंचायती राज विभाग, नगर विकास विभाग, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और अन्य राज्य स्तरीय विभागों के बीच समन्वय स्थापित कर एकीकृत कार्ययोजना लागू करने पर रणनीतिक सहमति बनी. सभी प्रतिभागियों ने इस बात पर बल दिया कि विभागीय तालमेल, तकनीकी दक्षता, वित्तीय पारदर्शिता और सामाजिक सहभागिता के समन्वय से ही गोमती को पुनः उसकी प्राकृतिक, स्वच्छ और अविरल धारा में लौटाया जा सकता है. “Revitalizing the Lifeline: Clean Gomti 2026” गोमती नदी को स्वच्छ, निर्मल और पुनर्जीवित बनाने की दिशा में एक मजबूत आधार प्रदान करेगा और आने वाले वर्षों में यह प्रयास न केवल पर्यावरण संरक्षण की मिसाल बनेगा, बल्कि उत्तर प्रदेश के सतत विकास मॉडल को भी नई दिशा देगा.

इस राज्यस्तरीय कार्यशाला में संत बलबीर सिंह सीचेवाल (सांसद, राज्यसभा), सुषमा खारखवाल (महापौर, लखनऊ नगर निगम), भारतीय सेना के सेंट्रल कमांड के चीफ ऑफ स्टाफ लेफ्टिनेंट जनरल नवीन सचदेवा, एवीएसएम, एसएम, अक्षत वर्मा, आईएएस (अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी, स्टेट ट्रांसफार्मेशन कमीशन, उत्तर प्रदेश सरकार), राजेन्द्र सिंह (वाटरमैन ऑफ इंडिया), लेफ्टिनेंट जनरल नवीन सचदेवा, एवीएसएम, एसएम (चीफ ऑफ स्टाफ, सेंट्रल कमांड, भारतीय सेना), सुमिला गुल्यानी (प्रैक्टिस मैनेजर, वाटर साउथ एशिया, विश्व बैंक), डेविड मैल्कम लॉर्ड (लीड वाटर स्पेशलिस्ट, विश्व बैंक), एवं सुश्री लॉरा सस्टरसिक (प्रोग्राम डायरेक्टर वाटर, जीआईज़ेड) सहित अन्य राष्ट्रीय अंतर्राष्ट्रीय स्तर के विशेषज्ञों ने प्रतिभाग किया.

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