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स्वच्छ जल और स्वच्छ नदी के प्रति सभी प्रतिबद्ध लेकिन गोमती को कब मिलेगा खेवनहार

#पीएम मोदी और प्रकाश जावड़ेकर ने दिखाई स्वच्छ जल और स्वच्छ नदी के प्रति प्रतिबद्धता, राजधानी लखनऊ में भी उठी गोमती नदी को स्वच्छ बनाने की मांग.

अफसरनामा ब्यूरो

लखनऊ : अक्सर ऐसा होता रहा है कि मई-जून के महीने में जब पेय जल की किल्लत शुरू होती है तो जल संचयन, संरक्षण और नदियों को स्वच्छ बनाने के प्रयासों की चर्चा फिजा में तैरने लगती है. फिर सरकारी और गैर-सरकारी संगठनों की सक्रियता अचानक से बढ़ जाती है लेकिन आप इसे प्रधानमंत्री की प्रतिबद्धता कहें या मुद्दों को समयबद्ध कार्यक्रम के तहत अंजाम तक पहुंचाने की सजगता, आज जब गुजरात के कच्छ में अक्षय ऊर्जा पार्क के उदघाटन के साथ साथ उनके द्वारा मांडवी के “Water Desalination plant” का लोकार्पण किया गया तो कहीं न कहीं उसमें पूर्व में शुरू किए गए प्रयासों के फलीभूत होने का आत्मसंतोष का भाव भी दिख रहा था. ख़ुद प्रधानमंत्री के शब्दों में “पानी को घरों में पहुचाने के साथ-साथ पीने के पानी का श्रोत बनाना भी जरूरी है. इसी लक्ष्य के साथ समुन्द्र के खारे पानी को शुद्ध करके इस्तेमाल करने की व्यापक योजना पर भी काम हो रहा है. मांडवी का Desalination Plant जब तैयार हो जाएगा तो इससे लाखों परिवारों को लाभ होगा. आज कच्छ का किसान हो या सरहद पर खड़ा जवान, दोनों की पानी की चिंता दूर हुई है.”

प्रधानमंत्री की प्रतिबद्धता की श्रृंखला में एक और कड़ी जोड़ते हुए पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने भी जल शक्ति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत के साथ बैठक की और दोनों के बीच इस मुलाकात में नदियों को स्वच्छ बनाने की योजना और उस पर होने वाले खर्च पर चर्चा हुई. परिणामस्वरूप पुणे के मुलामाठी नदी को स्वच्छ बनाने की योजना पर सहमति बनी जिस के लिए जल्द ही निविदा आमंत्रित की जायेगी.

इस खबर के तुरंत बाद ही सूबे की राजधानी लखनऊ में भी गोमती नदी की स्वच्छता के लिए इसी तरह के टेंडर प्रक्रिया शुरू शुरू करने की मांग शुरू हो गई है. हालांकि सूबे के लिए प्रस्तावित नई जल नीति में नदियों की स्वच्छता के संबंध में भी प्रावधान के निर्देश जलशक्ति मंत्री डॉक्टर महेन्द्र सिंह द्वारा दिए गए हैं.

लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या मुलामुठा की सफाई की तर्ज पर गोमती की स्वच्छता के लिए भी कोई निविदा आमंत्रित की जायेगी वो भी तब जबकि जावड़ेकर से कहीं अधिक प्रभाव वाले देश के रक्षा मंत्री लखनऊ से सांसद हैं और गोमती के उदगम स्थल से लेकर गंगा में संगम करने तक के क्षेत्रों के दर्जनों मंत्री, सांसद और विधायक जीत कर सत्ता के सहभागी बनें हैं. पर्यावरण और वन्य जीवों को लेकर सजग व संवेदनशील रहने वाली सांसद मेनका गाँधी भी गोमती के उदगम स्थल पीलीभीत से सांसद रही हैं और वर्तमान में वह सुल्तानपुर जिले की सांसद हैं जहां से गोमती नदी की धारा गुजरती है.

मंगलवार को उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने अतुल्य गंगा परियोजना का ऑनलाइन शुभारम्भ करते हुए कहा कि गंगा को निर्मल बनाने में लोगों की सहभागिता व जागरूकता जरूरी है. उन्होंने कहा कि जीवनदायिनी गंगा हमारी संस्कृति की पहचान है तो वह आध्यात्मिक चिंतन, जलवायु और अर्थवयवस्था आदि पर अपना अमिट छाप छोडती है. लेकिन गंगा को अविरल बनाने के लिए उसकी सहायक नदियों के प्रवाह को पुनः वापस ल़ाना होगा.

हालांकि सूबे के लिए प्रस्तावित नई जल नीति में नदियों की स्वच्छता के संबंध में भी प्रावधान के निर्देश जलशक्ति मंत्री डॉक्टर महेन्द्र सिंह द्वारा दिए गए हैं लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या मुलामुठा की सफाई की तर्ज पर गोमती की स्वच्छता के लिए भी कोई निविदा आमंत्रित की जायेगी वो भी तब जबकि जावड़ेकर से कहीं अधिक प्रभाव वाले देश के रक्षा मंत्री लखनऊ से सांसद हैं और गोमती के उदगम स्थल से लेकर गंगा में संगम करने तक के क्षेत्रों के दर्जनों मंत्री, सांसद और विधायक जीत कर सत्ता के सहभागी बनें हैं.

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afsarnama
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