बस्ती CMO कार्यालय में तैनात फर्जी हस्ताक्षर के आरोपी चीफ फार्मासिस्ट के खिलाफ एक और जाँच, शासन का पत्र जारी, जब फर्जी हस्ताक्षर मामले की जांच ही निष्पक्ष नहीं तो नए का क्या?

#पहला सवाल यह कि जब फर्जी हस्ताक्षर मामले में गठित तत्कालीन कमेटी ने अपनी रिपोर्ट 2024 में दे दिया, तो 2026 यानी दो साल बाद महानिदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवायें उत्तर प्रदेश व उनके कार्यालय द्वारा उसपर टिपण्णी कर और आख्या मंगाने की सुध क्यों आयी? इन 02 साल की चुप्पी का कारण क्या रहा?

#दूसरा सवाल यह कि जब फर्जी हस्ताक्षर मामले की जांच पूरी होकर रिपोर्ट जमा की जा चुकी है तो CMO कार्यालय बस्ती द्वारा महानिदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवायें उत्तर प्रदेश को उपलब्ध कराने में हीलाहवाली क्यों?

#तीसरा सवाल यह कि फर्जी हस्ताक्षर मामले की जमा जांच रिपोर्ट CMO बस्ती द्वारा महानिदेशक को 15 दिन बीत जाने के बाद भी नहीं उपलब्ध करा रहे, आखिर वजह क्या है और किस चीज को छुपाया जा रहा है?

#इसके आलावा जब फर्जी हस्ताक्षर मामले में महानिदेशक कार्यालय की ओर से जारी चिट्ठी में इंगित टिप्पणी ने जांच रिपोर्ट पर सवाल खड़े कर रही है तो शासन के पत्र के बाद हुई जांच क्या निष्पक्ष होगी यह सवालों में है?

अफसरनामा ब्यूरो

लखनऊ : बस्ती CMO कार्यालय में घटित होने वाली हर घटना और खेल की चीफ फार्मासिस्ट एक अहम् कड़ी होता है. और CMO की कृपा से अपने सजातीय, स्वजनपद के रिश्तेदार डॉ बृजेश शुक्ल को भी स्टोर में तैनाती दिला दिया ताकि खेल को बखूबी अंजाम दिया जा सके. शासन द्वारा जारी बजट को अपनी कुछ चिन्हित व चहेती कंपनियों को देना और उनसे उपकृत होना ही पूरा खेल है. जानकारों के मुताबिक़ फर्जी हस्ताक्षर मामला भी इसी कड़ी से जुड़ा बताया जा रहा है.

फिलहाल रिंगमास्टर चीफ फार्मासिस्ट अजय मिश्रा के खिलाफ आई0जी0आर0एस0 सन्दर्भ संख्या CB00070722069 के माध्यम से शिकायत हुई. जिसमें उसको अन्यत्र स्थानांतरित किये जाने की बात कहते हुए तमाम अन्य आरोप लगाए गए थे. उक्त शिकायत के सम्बन्ध में दिनांक 01 जून 2026 को शासन के चिकित्सा अनुभाग-07 ने पत्रांक संख्या CM-43/पांच-7-2026 के माध्यम से महानिदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवायें उत्तर प्रदेश को पत्र भेज कर 02 दिवस के भीतर आख्या उपलब्ध कराने को कहा है.

ऐसे में फर्जी हस्ताक्षर मामले की जांच रिपोर्ट पर महानिदेशक के पत्र में की गयी टिपण्णी से जांच कमेटी और उसकी रिपोर्ट दोनों संदेह के घेरे में है और CMO द्वारा जांच रिपोर्ट देने में की जा रही हीलाहवाली से इसकी पुष्टि भी होती है. ऐसे में इस एक नए शिकायत की जांच कितनी निष्पक्ष होगी इसका अंदाजा लगाया जा सकता है.

गौरतलब है कि आखिर फर्जी हस्ताक्षर मामले में जांच कमेटी की CMO कार्यालय में उपलब्ध सम्पूर्ण रिपोर्ट आख्या महानिदेशक को 15 दिन बीत जाने के बाद भी उपलब्ध कराने में इतनी देरी क्यों हुई? स्टाक रजिस्टर में फर्जी हस्ताक्षर के आरोपी रिंगमास्टर चीफ फार्मासिस्ट को पहले गठित कमेटी ने अपने रिपोर्ट में बचाया. अब समिति की रिपोर्ट पर टिपण्णी के साथ, महानिदेशक के 21 मई 2026 को भेजे गए पत्र से मची है खलबली, जवाब देने में छूट रहा पसीना. हांलांकि महानिदेशक कार्यालय भी 02 साल बाद जागा है और 2024 की जांच रिपोर्ट पर मई 2026 में सख्त टिपण्णी के साथ सम्पूर्ण जांच रिपोर्ट तलब किया है.

बस्ती CMO और प्राईवेट व्यक्ति सूरज उर्फ़ विवान दूबे का क्या है कनेक्शन? आखिर किस क्षमता में CMO कार्यालय में यह रखता है हनक? कामों के बंटवारे में होता है कमीशन का खुला खेल, एक प्राईवेट व्यक्ति का मीटिंग से लेकर कामों में कैसे रहती है पूरी दखलंदाजी?

नोट : “अफसरनामा” जल्द ही सप्लाई फर्मों के साथ इनके कनेक्शन का खुलासा करेगा…. इससे सम्बंधित अन्य खबरों के लिए नीचे दिए लिंक पर क्लिक करें….

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