
#पूरे 02 साल में जब कार्यवाही के लिए हुआ पत्र जारी तो बस्ती में तैनात हर CMO की कृपा फर्जीवाड़े के आरोपी चीफ फार्मासिस्ट पर बरकरार?
#प्रकरण में अग्रेतर कार्यवाही हेतु निदेशक पैरामेडिकल चिकित्सा एवं स्वास्थ्य के 21 मई 2026 के पत्र का हवाला देकर, अपर निदेशक बस्ती मंडल द्वारा दिनांक 22 मई 2026 को CMO बस्ती को 15 मई 2024 की फर्जी हस्ताक्षर की गंभीर जांच रिपोर्ट पर “फर्जी हस्ताक्षर करने और कराने वाले के विरुद्ध की गयी कार्यवाही की सुस्पष्ट आख्या उपलब्ध कराने की बात कही गयी. ताकि प्रश्नगत प्रकरण में अग्रेतर कार्यवाही की जा सके.”
#लेकिन #CMO बस्ती द्वारा “फर्जी हस्ताक्षर करने और कराने वाले के विरुद्ध की गयी कार्यवाही की सुस्पष्ट आख्या उपलब्ध कराने” के बजाय एक नई जांच कमेटी के गठन से मामला गहराया. अपरनिदेशक चिकित्सा स्वास्थ्य के पत्र के भी पूरे हुए 01 माह, जिसपर CMO ने पकड़ी अलग ही राह?
अफसरनामा ब्यूरो
लखनऊ : पारदर्शी व्यवस्था व कानून के शासन का दंभ भरने तथा हमेशा राजनीतिक सुर्ख़ियों में बने रहने को प्रयासरत उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक की नाक के नीचे क्या ऐसे ही चल रहा है स्वस्थ्य महकमे का सिस्टम? जहाँ पहले तो बस्ती जिले के फर्जी हस्ताक्षर मामले में गठित जांच कमेटी की 15 मई 2024 की फर्जी हस्ताक्षर की गंभीर जांच रिपोर्ट के 02 साल बाद, 21 मई 2026 को महानिदेशक स्तर से कार्यवाही हेतु पत्र जारी होता है.
इसके बाद अपरनिदेशक, बस्ती मंडल द्वारा निदेशक पैरामेडिकल चिकित्सा एवं स्वास्थ्य के 21 मई 2026 को लिखे पत्र का हवाला देते हए #CMO बस्ती को 22 मई 2026 को पत्र लिख “फर्जी हस्ताक्षर करने और कराने वाले के विरुद्ध की गयी कार्यवाही की सुस्पष्ट आख्या उपलब्ध कराने की बात कही गयी. ताकि प्रश्नगत प्रकरण में अग्रेतर कार्यवाही की जा सके.”

लेकिन बस्ती के चीफ फार्मासिस्ट अजय मिश्र के फर्जी हस्ताक्षर मामले में अपरनिदेशक चिकित्सा स्वास्थ्य का आदेश भी बेकार साबित होता है, और CMO बस्ती की इस जालसाज पर कृपा बरकरार रहती है. CMO बस्ती डॉ निगम द्वारा शासन के पत्र को दरकिनार कर एक और कमेटी के गठन की घोषणा समाचार पत्रों में की जाती है. और उस कथित कमेटी में उन्हीं लोगों को रखा जाता है जिसपर शासन ने सवाल उठा रखा है.

इस तरह चीफ फार्मासिस्ट को बचाने और सीएमओ कार्यालय में सक्रिय काकश के हाथ में खेल रहे CMO की कृपा चीफ फार्मासिस्ट पर बरकरार है. और उसको बचाने के लिए खुद को फंसाने को तैयार हैं. फिलहाल अग्रेतर कार्यवाही के लिए मांगी “फर्जी हस्ताक्षर करने और कराने वाले के विरुद्ध की गयी कार्यवाही की सुस्पष्ट आख्या का 01 माह पूरे होने पर भी पता नहीं है.” CMO के आगे सरेंडर अपरनिदेशक, बस्ती मंडल और पूरे सिस्टम के अगले कदम पर “अफसरनामा” की पूरी नजर है. इस गंभीर प्रकरण का पूरा अपडेट समय-समय पर आमजन के सामने होगा. और सिस्टम की उदासीनता सवालों में होगी?




