
#CMO दूबे की अध्यक्षता में 2024 में हुई गोलमाल की जांच और रखी गयी चीफ फार्मासिस्ट को बचाने की बुनियाद, तो अब 2026 में CMO राजीव निगम के समय उसी गोलमाल को गोल करने और व चीफ फार्मासिस्ट को बचाने की चल रही है कोशिश .
#फर्जी हस्ताक्षर और उसकी 2024 की जांच के सम्बन्ध में महानिदेशक/अपर महानिदेशक के 21.05.2026 के पत्र का अभी तक नहीं दिया जवाब,आखिर क्यों ?
#शासन के अतिरिक्त बजट को खपाने के खेल के अहम् किरदार बाहरी व्यक्ति दूबे तो अन्दर के मिश्रा, शुक्ल और निगम. पूरा खेल किसी बड़े घपले-घोटाले की तरफ. रिंग मास्टर के आकाओं और उक्त फर्मों से सम्बन्ध तथा सेंट्रम होटल और अन्य फीस के भुगतान का इन फर्मों व चीफ फार्मासिस्ट का खुलासा जल्द..
अफसरनामा ब्यूरो
लखनऊ : 15 मई 2024 को तत्कालीन मुख्य चिकित्साधिकारी डा० आर०एस० दूबे ने बस्ती जिले के सी०एम०एस०डी० स्टोर यानी केन्द्रीय औषधि भण्डार का निरिक्षण कर प्रस्तुत आख्या में फर्जी हस्ताक्षर का मामला पकड़ा और लिखा कि “स्टाकबुक एवं वितरण वाउचर के अंकन में श्री रामललित बौद्ध, वार्ड ब्वाय की हैण्डराइटिंग में पायी गयी तथा वितरण वाउचर में श्री अजय मिश्रा, चीफ फार्मासिस्ट का फर्जी हस्ताक्षर बना था जा हस्ताक्षर श्री रामललित बौद्ध, बार्ड ब्वाय द्वारा फर्जी किया गया था। फर्जी हस्ताक्षर बनाना एवं बनवाना दोनां नियमविरूद्ध तथा अनुशासनहीनता की श्रेणी में आता है।”
“उप / अपर मुख्य चिकित्साधिकारियां कं मौजूदगी में चीफ फार्मासिस्ट तथा वार्ड व्याय से पूछताछ में भी उक्त फर्जी हस्ताक्षर बनाने का स्वीकार दोनो लोगों द्वारा किया गया। ऐसी स्थिति में सम्बन्धित कर्मचारियों का स्पष्टीकरण लेते हुये श्री रामललित बौद्ध का अन्यत्र स्थल पर स्थानान्तरित किये जाने की आवश्यकता है।”
तत्कालीन CMO डा० आर०एस० दूबे ने “फर्जी हस्ताक्षर बनाना एवं बनवाना दोनां नियमविरूद्ध तथा अनुशासनहीनता की श्रेणी में आता है” का पाठ पढ़ा बड़ी बारीकी से केवल वार्ड ब्याय के अन्यत्र तबादले की संस्तुति किया और चीफ फार्मासिस्ट अजय मिश्र को बचा गए. जबकि प्रस्तुत आख्या के मुताबिक दोनों द्वारा फर्जी हस्ताक्षर की बात स्वीकार किया गया है. इस निरिक्षण दल में CMO डा० आर०एस० दूबे के अलावा डा० ए०के० गुप्ता, अपर मुख्य चिकित्साधिकारी भण्डार एवं डा० एस0बी0 सिंह, उपमुख्य चिकित्साधिकारी, डा० ए०के० चौधरी, उपमुख्य चिकित्साधिकारी की मौजूदगी रही.
पढ़ें तत्कालीन CMO डा० आर०एस० दूबे आदि की 2024 की जांच आख्या……

रिंगमास्टर चीफ फार्मासिस्ट अजय मिश्र ने महानिदेशक/अपर महानिदेशक कार्यालय में सांठगाँठ के बल पर आख्या पर कार्यवाई को पूरे 02 साल दबवाया, जोकि 21 मई 2026 को महानिदेशक के पत्र से फिर प्रकाश में आया. इस पत्र के प्रकाश में आने और अपने कारनामों की खबरों की सुर्ख़ियों से रिंगमास्टर चीफ फार्मासिस्ट अजय मिश्र इधर लगातार स्वास्थ्य निदेशालय में बाबुओं के कमरे में देखा गया है.
इस बीच फर्जी हस्ताक्षर मामले की 15 मई 2024 की जांच रिपोर्ट के बाद 18 जून 2024 को तत्कालीन CMO द्वारा वार्ड ब्याय राम ललित बौद्ध का तबादला सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र परसरामपुर बस्ती कर दिया गया. फिर इसी वार्ड ब्याय को चीफ फार्मासिस्ट के दबाव में उन्हीं CMO दूबे द्वारा 16 जनवरी 2025 को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मरवटिया, बस्ती के अधीन तैनात करते हुए अग्रिम आदेश तक CMSD स्टोर में कार्य करने हेतु आदेशित किया.
जिसको कि महानिदेशक व अपरमहानिदेशक ने अपने पत्र में अनुचित और नियमविरुद्ध बताते हुए जांच आख्या में उल्लिखित कि “फर्जी हस्ताक्षर बनाना एवं बनवाना दोनों ही नियम विरुद्ध और अनुशासनहीनता की श्रेणी में आता है, परन्तु इसके सम्बन्ध में उक्त कर्मियों के विरुद्ध क्या कारवाही की गयी इसका उल्लेख जांच आख्या में नहीं है.” को संदर्भित कर कृत कार्यवाही सहित सुस्पष्ट जांच आख्या की मांग किया.
पढ़ें महानिदेशक/अपरमहानिदेशक द्वारा CMO बस्ती को भेजा गया पत्र…..

#वर्तमान CMO राजीव निगम भी चीफ फार्मासिस्ट अजय मिश्र के उसी फर्जी हस्ताक्षर मामले को गोल करने की कसमकस में…..
चीफ फार्मासिस्ट के काकश का अंदाजा इसी से लगे जा सकता है कि फर्जी हस्ताक्षर की जांच समिति के सामने चीफ फार्मासिस्ट की स्वीकारोक्ति के बाद 2024 के उक्त फर्जी हस्ताक्षर मामले के प्रकाश में आने पर वर्मान CMO राजीव निगम भी चीफ फार्मासिस्ट अजय मिश्र को बचाने में जुट गए. और खबरों के अनुसार फर्जी हस्ताक्षर मामले की दोबारा जांच कराने की बात सामने आयी. जिसमें CMO राजीव निगम के हवाले से कहा गया है कि इस पुनः जांच में डिप्टी CMO डॉ बृजेश शुक्ल, डॉ एके चौधरी और डॉ एसबी सिंह की तीन सदस्यीय टीम गठित की गयी है.

इसमें गौरतलब यह है कि CMO द्वारा गठित इस नयी जांच के 02 सदस्य 2024 की जांच समिति के सदस्य रहे हैं, जिनकी रिपोर्ट पर महानिदेशक स्वास्थ्य द्वारा टिपण्णी कर जवाब माँगा गया है. और 01 अन्य डिप्टी CMO डॉ बृजेश शुक्ल जोकि इन्हीं CMO द्वारा RCH स्टोर इसी चीफ फार्मासिस्ट अजय मिश्र के साथ बनाये गए थे.
#उक्त के दृष्टिगत अगर देखा जाये तो 2024 से लेकर आज 2026 तक बस्ती में तैनात किये गए CMO की मेहरबानी आखिर इस चीफ फार्मासिस्ट पर क्यों है? यह एक बड़ा सवाल है?
दरअसल सारा खेल पैसों का व शासन से मांगे जाने वाले अतिरिक्त बजट के खाने पकाने के खेल और उसके सिंडिकेट का है. चीफ फार्मासिस्ट इस पूरे खेल का रिंगमास्टर है. चीफ फार्मासिस्ट अजय मिश्र अपने कथित रिश्तेदार और महानिदेशालय के बाबुओं के दम पर सिस्टम का खेल मैनेज करता है, तो इसमें CMO की कृपा से तैनात RCH डॉ शुक्ला का साथ रहता है. एक बाहरी व्यक्ति “विवान उर्फ़ सूरज दूबे” बाहर की फर्मों को काम दिलाने तथा CMO व स्टोर के बीच कड़ी का काम करता है. यदि निष्पक्ष जांच की जाये तो करीब आधा दर्जन फर्में इनमें Gem India,RS Enterprises,Shivay,Radhey Shyam Agency,XYZ Enterprises, Virindavan Traders & Ritham Enterprises का नाम प्रमुख है. इन फर्मों में से एक, स्टोर में तैनात लोगों के परिवार का बताया जा रहा है.
कुल मिलाकर उक्त पूरा खेल किसी बड़े घपले-घोटाले की तरफ इशारा कर रहा है. और इसको मैनेज करने की कोशिश में रिंगमास्टर महानिदेशालय के बाबुओं सहित अन्य आकाओं की परिक्रमा करते देखा जा रहा है. रिंग मास्टर के आकाओं और उक्त फर्मों से सम्बन्ध तथा सेंट्रम होटल और अन्य फीस के भुगतान का इन फर्मों व चीफ फार्मासिस्ट का खुलासा जल्द होगा.
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