
#जबकि हमारी विधायी व्यवस्था में न्याय की पारदर्शिता के लिए माननीय जजों की सिंगल बेंच, डबल बेंच और फुल बेंच जैसी है व्यवस्था, फिर भी तत्कालीन मुख्य चिकित्साधिकारी सहित कुल 04 सदस्यीय जांच कमेटी की रिपोर्ट को खारिज कर CMO की क्लीनचिट की रिपोर्ट, कितना उचित?
#महानिदेशक/अपर निदेशक स्वास्थ्य, बस्ती मंडल द्वारा अपने ही आदेशों के क्रियान्वयन में झलक रही बेचारगी, प्रकरण में कार्यवाही के बजाय जारी केवल जांच का खेल.
#आमजन की सेहत से जुड़े और गरीबों की सेहत के लिए कटिबद्ध योगी सरकार में बस्ती CMO के अधीन स्टोर में फर्जी हस्ताक्षर और वार्ड ब्याय को हटाकर फिर वापस वहीँ तैनाती जैसी कालगुजारी और कुछ चिन्हित फर्मों के माध्यम से अतिरिक्त बजट का खेल भी प्रमाणिक रूप से सामने.
अफसरनामा ब्यूरो
लखनऊ : बस्ती के स्वास्थ्य महकमें का चीफ फार्मासिस्ट इतना महत्वपूर्ण हो गया है कि योगी सरकार की पारदर्शिता और सख्त प्रशासन की नीति भी बौनी हो चली है. और वर्तमान CMO से लेकर महानिदेशक तक कागज व कलम की बाजीगरी के सहारे उसको बचाने के लिए कागजी घोड़े दौडाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं. आमजन की सेहत से जुड़े और गरीबों की सेहत के लिए कटिबद्ध योगी सरकार में बस्ती CMO के अधीन स्टोर में फर्जी हस्ताक्षर और वार्ड ब्याय को हटाकर फिर वापस वहीँ तैनाती जैसी कालगुजारी और कुछ चिन्हित फर्मों के माध्यम से अतिरिक्त बजट का खेल भी प्रमाणिक रूप से सामने है. फिलहाल यह पूरा प्रकरण बस्ती से सटे अयोध्या के राममंदिर चढ़ावा चोरी के सिंडिकेट की कालगुजारियों की याद दिला रहा है.
मिली जानकारी के मुताबिक दिनांक 18 जून 2026 को वर्तमान CMO ने अपर निदेशक द्वारा मांगी गयी कृत कार्यवाही की सुस्पष्ट आख्या देने के बजाय उन्हें एक र्रिपोर्ट भेजी जिसमें चीफ फार्मासिस्ट और वार्ड ब्याय के कारनामों और उनपर की गयी कार्यवाई का कोई जिक्र नहीं है, बल्कि उनको बेदाग़ करार देते हुए पूर्व की जांच कमेटी के बिन्दुओं को ही खारिज कर दिया. यानी 15 मई 2024 की 04 सदस्यीय कमेटी की जांच रिपोर्ट को वर्तमान के CMO ने खारिज करते हुए रिपोर्ट अपर महानिदेशक को भेज दिया. अहम् बात यह भी है कि वर्तमान CMO ने अपनी इस रिपोर्ट में वार्ड ब्याय ललित बौद्ध के फर्जी हस्ताक्षर के बाद किये गए तबादले और उसकी पुनः स्टोर में वापसी का कोई जिक्र नहीं किया है. जबकि महानिदेशक के पत्र में साफ़ तौर पर उसी वार्ड ब्याय ललित बौद्ध को वापस सीएमएसडी स्टोर बस्ती में तैनात किये जाने को अनुचित एवं नियमविरुद्ध माना गया है.
वर्तमान CMO बस्ती की रिपोर्ट संख्या मु/चि/अ/जांच/आख्या/26-27/2727(1-2) के अनुसार कहा गया है कि “शिकायतों का अभिलेखीय परिक्षण किया गया परीक्षण में कोई ऐसे तथ्य नहीं पाए गये जिसमें हस्ताक्षर किसी अन्य द्वारा किया गया है. इसलिए इनके विरुद्ध कोई कार्यवाही अपेक्षित नहीं है. यह भी उल्लेखनीय है कि सरकारी कर्मचारी के विरुद्ध प्रतिकूल निष्कर्ष अथवा विभागीय कार्यवाही अनुमानों आशंकाओं एवं अप्रमाणित आरोपों के आधार पर नहीं की जा सकती. इसके लिए कोई प्रमाणिक साक्ष्य का होना आवश्यक है.”
जबकि अपर निदेशक बस्ती मंडल के दिनांक 22 मई 2026 के पत्र की संख्या अ0नि0/शि0-जांच/2026-27 /229-1 में चीफ फार्मासिस्ट अजय कुमार मिश्रा अधीन मुख्य चिकित्सा अधिकारी, बस्ती के विरुद्ध प्राप्त शिकायती पत्रों की आख्या उपलब्ध कराने के सम्बन्ध में तत्कालीन CMO डॉ आर एस दूबे के दिनांक 15 मई 2024 की निरिक्षण आख्या का हवाला देते हुए कहा गया था कि “इस सम्बन्ध में आपके स्तर से दोनों के विरुद्ध की गयी कार्यवाही की सुस्पष्ट आख्या साक्ष्यों सहित अधोहस्ताक्षरी को तत्काल उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें ताकि प्रश्नगत प्रकरण में अग्रेतर कार्यवाही की जा सके.”

यही नहीं महानिदेशक द्वारा दिनांक 21 मई 2026 के पत्र संख्या-4डी(2)/58/चीफ फार्मा0/2023/685 में डॉ आरएस दूबे, मुख्य चिकित्साधिकारी की 15 मई 2024 की उस रिपोर्ट का हवाला देते हुए लिखा है कि “उपलब्ध करायी गयी उक्त आख्या में उल्लिखित है कि फर्जी हस्ताक्षर बनाना एवं बनवाना दोनों नियमविरुद्ध एवं अनुशासनहीनता की श्रेणी में आता है. परन्तु इसके सम्बन्ध में उक्त कार्मिकों के विरुद्ध क्या कार्यवाही की गयी इसका उल्लेख उक्त जांच आख्या में नहीं है.” साथ ही पत्र में चीफ फार्मासिस्ट अजय कुमार मिश्र के फर्जी हस्ताक्षर वार्ड ब्याय ललित बौद्ध द्वारा बनाये जाने का जिक्र करते हुए लिखा गया है कि हस्ताक्षर बनाना और बनवाना दोनों नियमविरुद्ध है और बस्ती स्टोर में तैनात वार्ड ब्याय को 18 जून 2024 को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र परसरामपुर बस्ती करने और फिर 16 जनवरी 2025 को उसी वार्ड ब्याय ललित बौद्ध को वापस सीएमएसडी स्टोर बस्ती में तैनात किये जाने को अनुचित एवं नियमविरुद्ध माना गया है.

फ़िलहाल सूत्रों के मुताबिक वर्तमान CMO की उक्त रिपोर्ट के बाद महानिदेशक ने शासन को संदर्भित करते हुए, अपर महानिदेशक को पुनः जांच के लिए निर्देशित किया है.

लेकिन यहाँ अहम् सवाल यह है कि जब अपर निदेशक स्वास्थ्य द्वारा कृत कार्यवाही से अवगत कराने की बात कही गयी तो वर्तमान CMO बस्ती को क्लीनचिट वाली रिपोर्ट भेजना कितना उचित है? और यदि सब ठीक ही था तो उस रिपोर्ट के आधार पर वार्ड ब्याय ललित बौद्ध को क्यों हटाया गया था? और उसके बाद उसको वापस उसी स्टोर में क्यों तैनात किया गया? जब हस्ताक्षर बनाना और बनवाना दोनों ही अनुशासनहीनता की श्रेणी में आता है तो वार्ड ब्याय ललित बौद्ध के साथ ही चीफ फार्मासिस्ट अजय कुमार मिश्र पर कुछ कार्यवाही क्यों नहीं हुई?
और सबसे अहम् यह कि जब वर्तमान मुख्य चिकित्साधिकारी द्वारा पुनः जांच कमेटी की बात मीडिया में सार्वजनिक रूप से कही गयी तो किन परिस्थितियों में और क्यों उन्हें अकेले ही इस क्लीनचिट की रिपोर्ट को अपर महानिदेशक स्वास्थ्य को भेजना पड़ा? क्या किसी कमेटी की रिपोर्ट को एक अफसर द्वारा भेजी गयी रिपोर्ट में झूठा ठहराया जाना न्यायसंगत है? जबकि हमारी विधायी व्यवस्था में न्याय की पारदर्शिता के लिए माननीय जजों की सिंगल बेंच, डबल बेंच और फुल बेंच जैसी व्यवस्था दिया गया है. ऐसे में अपर निदेशक स्वास्थ्य, बस्ती मंडल द्वारा पुनः जांच कराया जाना विधि सम्मत नहीं कहा जा सकता है बल्कि वर्तमान CMO की रिपोर्ट की ही तरह लीपापोती की एक कड़ी ही माना जा सकता है.

अब आगे क्या होता है यह तो वक्त ही बतायेगा लेकिन पूरे प्रकरण में बात केवल फर्जी हस्ताक्षर तक ही सीमित नहीं है. विभाग के अतिरिक्त बजट में विभागीय लोगों की संलिप्तता के दम पर कुछ चिन्हित फर्मों का का खेल बस्ती के साथ ही आसपास के कुछ जिलों तक फैला है. हांलांकि “अफसरनामा” की नजर इसपर है जल्द ही सबूतों के साथ इसका खुलासा किया जाएगा. फिर भी यदि गहराई से शासन से जारी होने वाले अतिरिक्त बजट के खेल की जांच हो जाये तो बस्ती के CMO कार्यालय में तैनात कर्णधारों सहित CHC, PHC से लेकर एक सेवानिवृत्त वित्त नियंत्रक तक कुल 06 फर्मों के एक ही मालिक के साथ की मिलीभगत सामने होगी.




