
#महानिदेशक और अपर महानिदेशक के पत्र में फर्जी मामले में कृत कार्यवाई सुस्पष्ट करने के निर्देश के बजाय सीएमओ डॉ. राजीव निगम प्रकरण ने पुनः जांच के लिए डिप्टी सीएमओ डॉ. ब्रजेश शुक्ल, डॉ. एके चौधरी और डॉ. एसबी सिंह की तीन सदस्यीय टीम की गठित. गठित कमेटी के सदस्यों और उनके पूर्व की जांच समिति रिपोर्ट के दृष्टिगत निष्पक्ष जांच कैसे? अभी तक प्रचलित पूरी कार्यवाई सवालों के घेरे में?
#नई 03 सदस्यीय जांच कमेटी में फिर वही पुरानी जांच कमेटी के सदस्य डॉ. एके चौधरी, डॉ. एसबी सिंह का नाम शामिल और तीसरे डॉ. ब्रजेश शुक्ल की तैनाती स्टोर इन्हीं CMO की कृपा से हुई, मामला कोर्ट में लंबित, तो क्या निष्पक्ष हो सकेगी जांच? आखिर CMO निगम की यह कृपा और घोटाले के खेल को रफादफा करने और फर्जी हस्ताक्षर का रिंगमास्टर चीफ फार्मासिस्ट को बचाने के पीछे आखिर क्या है वजह?
#क्या बस्ती CMO कार्यालय महानिदेशक स्वास्थ्य के निर्देशों से भी है ऊपर? भ्रष्टाचार और पारदर्शिता का नारा देने वाले स्वास्थ्य विभाग के मुखिया ने क्यों बंद कर रखा है आँख? सरकार की बंद आँख और स्वास्थ्य निदेशक की टिपण्णी और निर्देशों के इतर CMO की यह पेशबंदी किसी बड़े घोटाले की तरफ कर रहा इशारा!
#जिले में अनुपूरक बजट को मंगाने से लेकर और बड़ी ही शातिर तरीके से उसको किनारे लगाने तक में एक बाहरी व्यक्ति और CMO व उनके कार्यालय की मिलीभगत है सामने, एक ही व्यक्ति की कई फर्मों और खुद स्टोर का काम देख रहे जिम्मेदारों की फार्मों पर ही काम क्यों? उठ रहे सवाल?
अफसरनामा ब्यूरो
बस्ती : बस्ती जिले के विभागीय सीएमएसडी (केंद्रीय औषधि भंडार) में तैनात चीफ फार्मासिस्ट अजय मिश्रा के फर्जी हस्ताक्षर के प्रकरण की जांच फिर से तीन सदस्यीय कमेटी करेगी. इस प्रकरण में वर्ष 2024 में गठित जांच कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में सीएमएसडी से होने वाले सामान के निकासी बाउचर पर चीफ फार्मासिस्ट की जगह एक वार्ड ब्वॉय द्वारा बनाए गए फर्जी हस्ताक्षर का जिक्र किया था. जिसपर स्वास्थ्य महानिदेशक और अपर महानिदेशक स्तर से पूरे 02 साल की चुप्पी के बाद दोबारा हुई शिकायत पर निदेशक के निर्देश पर एडी हेल्थ ने सीएमओ से उक्त जांच की आख्या मांगी थी. स्वास्थ्य महानिदेशक और अपर महानिदेशक द्वारा जारी पत्र में कहा गया है कि “उपर्युक्त विषयक निदेशक (पैरामेडिकल), चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवायें, उ०प्र० लखनऊ के पत्र संख्या-4डी (2)/58/ चीफ फार्मा0/2023/685 दिनांक 21.05.2026 का सन्दर्भ ग्रहण करें। (छायाप्रति संलग्न) जिसके द्वारा श्री अजय कुमार मिश्रा, चीफ फार्मासिस्ट के फर्जी हस्ताक्षर श्री ललित बौद्ध वार्ड ब्वाय द्वारा किया गया था। जिसके लिए दोनों कर्मचारी फर्जी हस्ताक्षर बनाना एवं बनवाना नियम विरूद्ध एवं अनुशासनहीनता की श्रेणी में आता है। जिसकी पुष्टि तत्कालीन मुख्य चिकित्सा अधिकारी बस्ती डा० आर०एस० दूबे के निरीक्षण आख्या दिनांक 15-05-2024 के द्वारा की गई है। इस सम्बन्ध में आपके स्तर से दोनो के विरूद्ध की गयी कार्यवाही की सुस्पष्ट आख्या साक्ष्यों सहित अधोहस्ताक्षरी को तत्काल उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें। ताकि प्रश्नगत प्रकरण में अग्रेतर कार्यवाही की जा सके।”
ऐसे में अहम् सवाल यह है कि 2024 की उक्त जांच रिपोर्ट पर स्वास्थ्य महानिदेशक ने 21 मई 2026 को 02 साल बाद ही क्यों चिट्ठी लिखी? इसके अलावा निदेशक,चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवायें, उत्तर प्रदेश, लखनऊ द्वारा पूर्व की जांच रिपोर्ट में मिली कमियाँ और और मिलीभगत की स्थिति पत्र में की गयी टिपण्णी से स्पष्ट है, तो कार्यवाही के बजाय जनहित और स्वास्थ्य सम्बन्धी जैसे संवेदनशील मुद्दे पर केवल कागजी खेल करना और जांच के नाम पर आरोपियों को बचाना जाहिर है और CMO बस्ती की खुद की भूमिका संदिग्ध है. ऐसे में स्टोर जैसे प्रकरण जहाँ घपले-घोटाले की संभावना एकदम प्रबल होती है और शासन के धन के दुरूपयोग की पूरी गुंजाईश रहती है, में इस तरह की हीलाहवाली किसी न किसी बड़े खेल की तरफ इशारा करती है.


बताते चलें कि बस्ती के तत्कालीन सीएमओ डॉ. आरएस दूबे ने 15 मई 2024 को सीएमएसडी की जांच के उपरांत फर्जी हस्ताक्षर की पुष्टि अपनी निरीक्षण आख्या में की थी. इस बात की शिकायत शासन स्तर पर होने के बाद निदेशक पैरामेडिकल चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं उत्तर प्रदेश ने अपर निदेशक चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण बस्ती मंडल को पत्र लिखकर कार्रवाई से अवगत कराने को कहा और अपर निदेशक डॉ. नीरज पांडेय ने सीएमओ को पत्र लिखकर आख्या तलब की है. जिसके बाद सीएमओ डॉ. राजीव निगम ने प्रकरण की पुनः जांच के लिए डिप्टी सीएमओ डॉ. ब्रजेश शुक्ल, डॉ. एके चौधरी और डॉ. एसबी सिंह की तीन सदस्यीय टीम गठित की है. इसमें महत्वपूर्ण यह है कि CMO बस्ती द्वारा पुनः गठित इस जांच कमेटी के 02 सदस्य उसी 2024 की पुरानी जांच कमेटी के सदस्य रहे हैं जिनकी रिपोर्ट पर महानिदेशक ने टिप्पणी कर अनुचित ठहराया है. और इस नई कमेटी के एक सदस्य डॉ. ब्रजेश शुक्ल की तैनाती खुद CMO ने स्टोर में किया है. मिली जानकारी के मुताबिक़ स्टोर के चीफ फार्मासिस्ट और CMO द्वारा तैनात किये गए RCH डॉ. ब्रजेश शुक्ल दोनों ही बस्ती के ही मूल निवासी और रिश्तेदार हैं. ऐसे में निष्पक्ष जांच की उम्मीद कैसे? फ़िलहाल “अपर निदेशक, चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, बस्ती मण्डल द्वारा पत्र संख्या-4डी(2)/58/चीफ फार्मा0/2023/685 दिनांक 21.05.2026 को निर्देशित किया है कि अजय कुमार मिश्रा, चीफ फार्मासिस्ट अधीन मुख्य चिकित्सा अधिकारी, बस्ती के विरुद्ध प्राप्त शिकायतों के सम्बंध में सुस्पष्ट जांच आख्या तत्काल महानिदेशालय को उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें. ताकि प्रकरण में अग्रेतर कार्यवाही की जा सके.” लेकिन गठित कमेटी के सदस्यों और उनकी पूर्ववत भूमिका के दृष्टिगत निष्पक्ष जांच रिपोर्ट की उम्मीद कम है. और अभी तक प्रचलित पूरी कार्यवाई सवालों के घेरे में है?
इसके अलावा बस्ती जिले में मुख्यालय से अनुपूरक बजट लाने और उसको खपाने का बड़ा खेल भी आपसी मिलीभगत से जारी है. जाहिर है कि स्टोर में तैनात चीफ फार्मासिस्ट और RCH की इसमें अहम् भूमिका होती है. फ़िलहाल बस्ती जिले में एक बाहरी व्यक्ति के माध्यम से CMO अपने इन्हीं स्टोर में बैठे दोनों शागिर्दों के साथ मिलकर सरकारी धन के दुरुपयोग और लूट को अंजाम दे रहे हैं. जोकि जरुरतमंदों के साथ छलावा और शासन के पारदर्शिता के दावों के विपरीत है. शासन के इस अनुपूरक बजट को एक ही व्यक्ति की अलग-अलग कंपनियों के नाम पर वर्क आर्डर जारी कर कागजी खेल के माध्यम से किया जाता है. इन कंपनियों में Gem India,RS Enterprises,Shivay,Radhey Shyam Agency,XYZ Enterprises, Virindavan Traders & Ritham Enterprises का नाम प्रमुख है. इनमें अहम् बात यह है कि इन कंपनियों में एक का मालिक स्टोर में तैनात दो जिम्मेदारों में से एक के परिवार का सदस्य भी है. ऐसे में आखिर बस्ती जिले के CMO office की कृपा आखिर इन कंपनियों पर ही क्यों? एक प्राइवेट व्यक्ति के हाथों कौन-कौन हुआ लाभान्वित? इसकी विस्तृत और निष्पक्ष जांच किसी सक्षम स्तर से कराए जाने पर हकीकत सामने होगी.



