
#फर्जी हस्ताक्षर के खेल की जांच करने वाली रिपोर्ट और जांच कमिटी के सदस्यों की तैनाती पर उठ रहे सवाल? हर मलाईदार पदों पर तैनाती का केंद्र चीफ फार्मासिस्ट.
#अजय मिश्र CMSD और डॉ बृजेश शुक्ला RCH की जुगलबंदी दिला रही है बसपा सरकार के NRHM घोटाले की याद, दोनों सजातीय बस्ती जिले के मूल निवासी, आपसी केमेस्ट्री जोरदार.
#आखिर क्यों CMO बस्ती द्वारा शासनादेशों के विपरीत तृतीय श्रेणी के डाक्टर ब्रजेश शुक्ला की की गयी तैनाती जबकि इस पद पर तैनाती के लिए चतुर्थ श्रेणी के डाक्टर ही हैं अनुमन्य.
#इस तैनाती को लेकर आखिर क्यों डॉ ए के गुप्ता को जाना पड़ा कोर्ट, मामला लंबित.
#दवा, उपकरण अथवा अन्य सामग्री की बजटानुसार खरीद-फरोख्त, रखरखाव, वितरण व बिल अनुमोदन की अहम् पार्ट होता है स्टोर का प्रभार, जोकि नियमतः 02 लोगों के हाथ में होता है. 01 चीफ फार्मासिस्ट और एक चतुर्थ श्रेणी का डाक्टर, और यहीं शुरू होता है NRHM जैसा खेल, आखिर कब जागेगा स्वास्थ्य महकमा?
अफसरनामा ब्यूरो
लखनऊ : बस्ती जिले के स्वास्थ्य महकमे में तैनाती और काले कारनामों के काकश का अंदाजा वहाँ पर हुई तैनाती और हुए खेल से लगाया जा सकता है. वैसे तो स्वास्थ्य विभाग में दवा और उपकरणों की खरीद व वितरण आदि का खेल कोई नया नहीं है. बसपा का NRHM जैसे घोटाले इसके गवाह हैं. लेकिन पार्टी विद डिफ़रेंस का नारा देने वाली और शुचिता व पारदर्शिता का पाठ पढ़ाने वाली योगी सरकार की नाक के नीचे बस्ती जिले में जारी खेल और उसपर लीपापोती सवाल खड़े करती है. जहाँ एक चीफ फार्मासिस्ट के साथ जिले के जिम्मेदार एक साथ खड़े मिलते हैं और स्वास्थ्य महानिदेशक स्तर से जिले के जिम्मेदारों को जारी पत्र में जांच के बेसिक बिंदु को उद्घृत किया जाता है.
बताते चलें कि वर्ष 2024 में फर्जी हस्ताक्षर का मामला और उसपर गठित कमेटी के सदस्यों की हास्यास्पद रिपोर्ट जिसमें बेसिक जांच के नियमों को दरकिनार किया गया, यह निदेशक, चिकित्सा स्वास्थ्य सेवायें लखनऊ द्वारा दिनांक 21 मई 2026 को अपर निदेशक चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, बस्ती मंडल को प्रेषित पत्र संख्या 4डी(2)/58/चीफ फार्मा0/2023/685 के पत्र से साफ़ हो जाता है. फिलहाल इसमें अपर निदेशक चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, बस्ती मंडल ने मुख्य चिकित्साधिकारी बस्ती को पत्रांक संख्या अ0नि/शि0-जाँच/2026-27/229-1 दिनांक 22 मई 2026 के माध्यम से यह कहते हुए कि फर्जी हस्ताक्षर करना और कराना दोनों ही नियमविरुद्ध और अनुशासनहीनता की श्रेणी में आता है, अग्रेतर कार्यवाही के लिए सुस्पष्ट आख्या प्रमाण सहित माँगा है. ऐसे में अब देखना यह होगा कि बस्ती जिले के स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार इसमें अब किस तरह की लीपापोती करते हैं.
ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि फर्जी हस्ताक्षर की जांच के लिए तत्कालीन मुख्य चिकित्साधिकारी बस्ती डॉ आर0एस0 दूबे की अध्यक्षता में गठित कमेटी के अन्य सदस्य इनमें नोडल अधिकारी डॉ एस0बी0 सिंह, डॉ ए0के0 गुप्ता, डॉ ए0के0 चौधरी अभी तक बस्ती में यथावत तैनात हैं और इसी कमेटी की 15.05.2024 की जांच रिपोर्ट पर उक्त पत्र में टिपण्णी की गयी है. ऐसे में उक्त प्रकरण की पुनः निष्पक्ष जांच शासन स्तर से कराना उचित होगा ताकि सरकार की मंशा के अनुरूप असलियत सामने आ सके. गौरतलब है कि वर्ष 2024 में बस्ती जिले में स्टॉक बुक और वितरण वाउचर पर अपने स्थान पर एक वार्ड ब्वाय (राम ललित बौद्ध) से हस्ताक्षर करवाने का दोष सिद्ध होने के बाद भी कोई कार्यवाही नहीं हो सकी है. उक्त प्रकरण की जांच करने वाले तत्कालीन सीएमओ डॉ आर एस दूबे के नेतृत्व में गठित कमेटी की रिपोर्ट की निष्पक्षता शासन के पत्र से उजागर होती है कि किस तरह से लीपापोती करके रिपोर्ट भेज शासन को गुमराह करने का काम किया गया है.
15.05.2024 की उक्त रिपोर्ट की बेसिक खामियों से मिलीभगत और एक सिंडिकेट के तौर पर बस्ती जिले के स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली उजागर है. और ऐसा प्रतीत होता है कि बस्ती जिले का CMO कार्यालय शासन के प्रति उत्तरदायी न होकर चीफ फार्मासिस्ट की मुट्ठी में रहता है.
बस्ती जिले में तैनाती के खेल से जुड़े हैं बाकी के खेल, आखिर कब होगी विस्तृत जांच
डॉ बृजेश शुक्ला, वर्तमान में करीब एक साल से ACMO स्टोर के पदभार में तैनात हैं. इसके पहले डॉ एके गुप्ता के पास CMSD और RCH का चार्ज रहा था. जिसको वर्तमान cmo ने आते ही बदलकर डॉ शुक्ला को तैनात कर दिया था. जिसके सम्बन्ध में एक कोर्ट केस भी किया गया है कि जब चतुर्थ श्रेणी के 03 डॉ वहीँ तैनात हैं तो तृतीय श्रेणी के डॉ की तैनाती क्यूँ? जबकि शासनादेश के अनुसार इस पद पर चतुर्थ श्रेणी के डाक्टर की तैनाती होनी चाहिए.
दरअसल पूरा खेल यही पर है. स्टोर का प्रभार नियमतः 02 लोगों के हाथ में होता है, 01 चीफ फार्मासिस्ट और एक चतुर्थ श्रेणी का डाक्टर. फ़िलहाल अजय मिश्र, चीफ फार्मासिस्ट प्रभार CMSD स्टोर प्रभारी यानी खरीदे गए दवा व उपकरण के रख रखाव और वितरित करने की जिम्मेदारी के साथ साथ बिल को प्रमाणित करने का काम करते हैं. जबकि RCH डॉ शुक्ला के पास बजट के अनुसार जरूरी उपकरणों और दवाओं आदि की नोटशीट के काम के आलावा NRHM के बजट की नोटशीट आदि बनाना और पेमेंट बिल को वेरीफाई करना यानि पेमेंट का नोडल होता है.
अजय मिश्र CMSD और डॉ शुक्ला RCH दोनों के पास बजट अनुसार जरूरी उपकरणों, दवाओं आदि की खरीद फरोख्त, रखरखाव और वितरित करने की जिम्मेदारी होती है. ऐसे में दोनों की केमेस्ट्री का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि दोनों बस्ती जिले के निवासी और सजातीय हैं. और सूत्रों के मुताबिक़ दोनों की आपसी केमेस्ट्री भी मजबूत है. बस्ती जिले के स्वास्थ्य विभाग में केंद्रीय औषधि भंडार (CMSD) में चीफ फार्मासिस्ट के पद पर कार्यरत अजय कुमार मिश्र, डिप्लोमा फार्मासिस्ट राजपत्रित अधिकारी एसोसिएशन, जिला इकाई बस्ती के अध्यक्ष भी रहे हैं. शेष अगले अंक में……
फर्जी हस्ताक्षर के सम्बन्ध में 15.05.2024 की जांच रिपोर्ट और निदेशक, चिकित्सा स्वास्थ्य सेवायें लखनऊ द्वारा दिनांक 21 मई 2026 को अपर निदेशक चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, बस्ती मंडल को प्रेषित पत्र के लिए नीचे दिए लिंक पर क्लिक करें……
#चीफ फार्मासिस्ट की मुट्ठी में रहता है बस्ती CMO और कार्यालय, इसीलिए 2024 के फर्जी हस्ताक्षर के मामले में शिकायत पर तत्कालीन सीएमओ डॉ आर एस दूबे ने किया था लीपापोती, दो साल बाद शासन द्वारा प्रेषित पत्र 21 मई 2026 के पत्र से हुआ खुलासा.



