
#चीफ फार्मासिस्ट की मुट्ठी में रहता है बस्ती CMO और कार्यालय, इसीलिए 2024 के फर्जी हस्ताक्षर के मामले में शिकायत पर तत्कालीन सीएमओ डॉ आर एस दूबे ने किया था लीपापोती, दो साल बाद शासन द्वारा प्रेषित पत्र 21 मई 2026 के पत्र से हुआ खुलासा.
अफसरनामा ब्यूरो
लखनऊ : “वही कातिल वही मुंसिफ” कहां इंसाफ फिर होगा? स्वास्थ्य विभाग के लिए सबसे सटीक हैं ये लाइने. जहां तमाम नियम कानूनों को धता बताते हुए कुछ लोग दशकों से एक ही जिले में और सालों से एक ही कुर्सी पर तैनाती का सुख भोग रहे हैं. और जब कभी जांच होती है तो जांच कमेटी भी उन्हीं की होती है और फिर से वही पुराना खेल शुरू होता है जो वर्षों से चलता आ रहा है. इसमें बस्ती जिले का हाल सबसे गज़ब है, जहां लगभग 28 सालों से उसी जिले में और 07 सालों से उसी कुर्सी पर काबिज चीफ फार्मासिस्ट एक बार फिर से अपनी मनमानी पर उतारू है. मामला अजय कुमार मिश्र, चीफ फार्मासिस्ट (ईएचआरएमएस-190620) सीएमएसडी स्टोर आधीन सीएमओ बस्ती का है. जो तमाम तबादला नियमावली को एक बार फिर से धता बताने की तैयारी में है. फ़िलहाल तबादला सीजन का आज अंतिम दिन है और चीफ फार्मासिस्ट अजय मिश्रा को इन दिनों सत्ता के गलियारों में फिर से गणेश परिक्रमा करने में देखा जा सकता है, ताकि उसका बस्ती प्रेम बना रहे.
जबकि बीते दिनों स्वास्थ्य महानिदेशक की ओर से उक्त फार्मासिस्ट सीएमएसडी, बस्ती, अजय कुमार मिश्र पर अपनी जगह एक वार्ड ब्वाय राम ललित बौद्ध से स्टाकबुक व वितरण बाउचर में हस्ताक्षर करवाने व इसे स्वीकार करने के आरोप सिद्ध होने पर की गयी कारवाई से अवगत कराने का भी पत्र भेजा गया है. “पत्र के अनुसार मुख्य चिकित्सा अधिकारी, व अन्य की मौजूदगी में दिनांक 15.05.2024 को सी0एम0एस0डी में किये गए निरिक्षण आख्या एच0 डब्ल्यू0सी0 में वितरित किये गए सामग्रियों का स्टाक बुक एवं बाउचर के मिलान में अजय कुमार मिश्रा, चीफ फार्मासिस्ट के फर्जी हस्ताक्षर बनाना एवं बनवाना दोनों नियमविरुद्ध एवं अनुशासनहीनता की श्रेणी में आता है.” फर्जी हस्ताक्षर करने का दोष सिद्ध आरोपी वार्ड ब्याय राम ललित बौद्ध का दिनांक 18.06.2024 को तो कर दिया गया लेकिन दिनांक 16.01.2025 को मुख्य चिकित्सा अधिकारी बस्ती के आदेश से पुनः वापस उसी जगह तैनाती पाने में कामयाब रहा. और चीफ फार्मासिस्ट अजय मिश्र और वार्ड ब्याय की जुगलबंदी फिर से परवान चढ़ रही है.

मजे की बात यह है कि एक शिकायत पर किस तरह से लीपापोती की जा सकती है और एक सिंडिकेट के तौर पर जांच और काम को अंजाम दिया जा सकता है, यह चीफ फार्मासिस्ट अजय मिश्रा के फर्जी हस्ताक्षर मामले की 15 मई 2024 को मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ आर एस दूबे के नेतृत्व में गठित जांच कमेटी और उसकी रिपोर्ट से लगाया जा सकता है. समिति की लीपापोती, उसकी जांच रिपोर्ट से जाहिर है और इसका खुलासा शासन द्वारा प्रेषित 21 मई 2026 के उक्त पत्र से भी स्पष्ट है.

बड़ा सवाल यह है कि इतने पर जिम्मेदारों की आँख बंद क्यूँ है, और इसके लिए जिम्मेदार कौन है? क्या इस पर स्वास्थ्य विभाग के शासन में बैठे जिम्मेदारों पर नजर पड़ेगी? और डायल 100 की तरह हर जगह उपस्थित रहने वाले और खबरनवीसों से घिरे रहने वाले उपमुख्यमंत्री जिनके पास स्वास्थ्य महकमा का जिम्मा है, क्या यह सब नहीं देख पा रहे हैं? चुनावी वर्ष में यह कितना फायदेमंद होगा यह तय करना पार्टी और सरकार का काम है लेकिन स्वास्थ्य विभाग में भ्रष्टाचार की जड़ें कितनी गहरी हैं और जिम्मेदारों की आँखें किस तरह से बंद है इसका अंदाजा लगाया जा सकता है.
चीफ फार्मासिस्ट अजय मिश्रा की तैनाती का विवरण




