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तबादला नीति के विरुद्ध बार-बार स्थानांतरित होने से आहत समाज कल्याण अधिकारी ने दिया इस्तीफा

#आहत समाज कल्याण अधिकारी ने लगाया भ्रष्टाचार का आरोप.

अफसरनामा ब्यूरो
लखनऊ : राजधानी लखनऊ में तैनात जिला समाज कल्याण अधिकारी (विकास) रणजीत सिंह ने गुरुवार को मनमाने ढंग से तबादला किये जाने से आहत होकर इस्तीफा दे दिया. समाज कल्याण अधिकारी ने आरोप लगाया कि उनका तबादला निजी हित साधन के लिए बार-बार किया गया. और कुछ भ्रष्टाचारी पर्दे के पीछे से तबादला उद्योग चलाने का काम कर रहे हैं. रंजीत सिंह ने ट्रांसफर-पोस्टिंग में भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए निदेशक को त्यागपत्र भेज दिया. निदेशक को लिखे पत्र में आरोप लगाया है कि 2 साल में ही उनका 4 बार तबादला किया जा चुका है, जबकि जिला समाज कल्याण अधिकारी केएस मिश्रा 2013 से अब तक एक ही जगह तैनात हैं. जौनपुर से बसपा विधायक सुषमा पटेल के पति भी हैं समाज कल्याण अधिकारी. समाज कल्याण निदेशक जेपी चौरसिया को भेजे पत्र में उन्होंने लिखा है कि ऐसा कौन सा जनहित है जो हर छह माह में स्थानांतरण से पूरा होगा.

उनका आरोप है कि मेरे तबादले में किसी सक्षम द्वारा स्वीकृति भी नहीं ली गयी जबकि लखनऊ में ही मेरे समकक्ष एक अन्य अधिकारी 7 साल से तैनात है. क्या मुख्य सचिव की स्थानांतरण नीति यही होती है. रणजीत सिंह के पत्र के अनुसार 31 मई 2017 के आदेश के अनुपालन में लखनऊ में जिला समाज कल्याण अधिकारी (विकास) का पद संभाला था 11 माह बाद ही उनका तबादला लखीमपुर खीरी कर दिया गया. उनके इस तबादले को सीएम के निर्देश पर अगस्त 2018 में निरस्त किया गया. फिर 7 माह बाद ही मार्च 19 में उनका तबादला हरदोई किया गया.

रणजीत सिंह के तबादले में जनहित और समाज हित का हवाला दिया गया. रणजीत सिंह ने लिखा कि यह इस्तीफा किसी दुःख अथवा पीड़ा से नहीं बल्कि सोच-समझकर दिया गया है. लेकिन यह आरोप भी लगाया कि उनके केस में स्थानांतरण नीति का भी उल्लंघन किया गया है, विभाग की वार्षिक स्थानांतरण नीति के अनुसार उनका तबादला नहीं हुआ है. 29 मार्च 2018 को जारी व्यवस्था है कि एक जनपद में 3 वर्ष की अवधि को पूर्ण कर चुके अफसर को स्थानांतरित किया जाएगा. नीति में यह भी व्यवस्था है कि 20 प्रतिशत से अधिक अफसरों का तबादला मुख्यमंत्री के अनुमोदन से किया जाएगा. लेकिन उनके केस में इसका भी अनुपालन नहीं किया गया और इसके बावजूद भी 7 मार्च 2019 को उनका हरदोई तबादला कर दिया गया. जिला समाज कल्याण विभाग में समूह “क” व “ख” के किसी भी अधिकारी के स्थानांतरण की पत्रावली मुख्यमंत्री के अनुमोदन के लिए भेजी ही नहीं गई ऐसा करने के पीछे किसी तरह का न जनहित है और न ही विभाग हित. बल्कि कुछ भ्रष्टाचारी तत्व जो कि अफसरों के आपसी गठजोड़ से विभाग को पर्दे के पीछे से चला रहे हैं वे मुझे हटाकर अपने मनपसंद अफसर की तैनाती कराना चाहते हैं ताकि को अपने गलत कार्यों को अंजाम दे सकें.

afsarnama
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