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योगी की सख्ती, अफसर अब जमीन पर उतर जानेंगे योजनाओं की हकीकत

#सीएम ने तय की जिम्मेदारी नगरों में नगर आयुक्त तो जिलों की जवाबदेही मंडलायुक्त को.

#मंडलायुक्तों को दिखाया आईना और कराया उनकी शक्तियों का एहसास.

#सीएम, मंडलायुक्त की जवाबदेही तय, दें, सुस्त डीएम की रिपोर्ट अन्यथा लें कार्य की धीमी प्रगति की जिम्मेदारी.

#सीएम का निर्देश अधिकारी/कर्मचारी रात्रि निवास भी अपने तैनाती के अनुसार जिला और तहसील मुख्यालय पर ही करें.

#सीएम ने सफाई के मुद्दे पर लखनऊ नगर आयुक्त को लगाई लताड़, बोले मीटिंग और भाषण से काम नहीं चलेगा.

#गोवंश के रख रखाव पर नगर आयुक्त को नसीहत, गोवंशों को पंखा, कूलर से पहले भूसा और पानी चाहिए.

अफसरनामा ब्यूरो

लखनऊ : लोकसभा चुनाव में मिली प्रचंड जीत के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अब एक्‍शन में दिख रहे हैं. चुनाव बाद ही योगी ने कुछ भ्रष्ट अफसरों पर सख्‍ती करते हुए उनका निलंबन भी किया है. मुख्यमंत्री के तेवर से लग रहा है कि वे अभी से विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुट गये हैं. योगी ने जमीन पर सरकार की योजनाओं का कितना क्रियान्वयन हो रहा है सोमवार को इसकी समीक्षा के लिए सूबे के सभी कमिश्नरों और नगर आयुक्तों के साथ बैठक कर कड़ा रुख अपनाते हुए एक सन्देश दे दिया है कि अब उनके द्वारा कार्रवाई का दौर शुरू कर दिया गया है. इस तरह बेलगाम हो चुकी अफसरशाही पर सीएम ने अंकुश लगाना शुरू कर दिया है. फिलहाल भ्रष्टाचारी और कामचोरी करने वाले अफसरों उनके एजेंडे में है.

सोमवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पॉलिथिन, गोवंश और पौधरोपण की समीक्षा, सफाई व नाला टैपिंग पर चर्चा करने के लिए अधिकारियों को बुलाया था. अब प्रधानमंत्री आवास योजना, स्वच्छता, बिजली आदि जैसी सरकारी योजनाओं की जमीनी हकीकत जानने के लिए खुद मुख्यमंत्री 16 जून से लेकर 16 जुलाई तक मंडलवार समीक्षा करेंगे. इस दौरान योजनाओं की हकीकत जानने के लिए पैदल मौके पर जाकर स्थलीय निरीक्षण भी करेंगे. मुख्यमंत्री के इस दौरे के पहले अपर मुख्य सचिव स्तर के अफसर 11 जून से लेकर 15 जून तक मंडलों का निरिक्षण करेंगे और कार्यों की प्रगति देखेंगे.

अपनी तैनाती स्थल पर ही निवास करें अधिकारी/कर्मचारी

समीक्षा बैठक के दौरान मुख्यमंत्री का ने अफसरों को उनके तैनाती स्थल पर निवास करने के लिए ताकीद भी किया. इस सम्बन्ध में मुख्यमंत्री द्वारा बाराबंकी जिले का उदाहरण भी दिया गया कि बाराबंकी जिले का SHO भी रात को लखनऊ आकर सोता है. ऐसे में उच्च अधिकारी यह भी सुनिश्चित करें कि मुख्यालय से लेकर तहसील स्तर तक के सभी अधिकारी रात्रि निवास भी अपनी तैनाती स्थल पर ही करें. जब अफसर अपनी तैनाती के अनुसार जिला अथवा तहसील मुख्यालय पर निवास करेंगे तो वह जनता के बीच ज्यादा समय देंगे जिससे जनता को परेशानी नहीं होगी और सरकारी योजनाओं की हकीकत से वह वाकिफ भी होगा. इंस्पेक्टर, लेखपाल से लेकर जिलाधिकारी तक सभी अपनी तैनाती के अनुसार जिला और तहसील मुख्यालयों पर रात्रि निवास करें.

सीएम ने जब कमिश्नर की शक्तियों का कराया एहसास

इसके अलावा मुख्यमंत्री ने कमिश्नर को उनकी शक्तियों का एहसास भी कराया और कार्यों को लेकर मंडलायुक्तों की जवाबदेही भी तय की. उन्होंने कमिश्नर के माध्यम से साफ संदेश दिया कि डीएम के परफॉरमेंस की रिपोर्ट दें. साथ ही क्रियान्वयन की मॉनिटरिंग का एक और नया सिस्टम विकसित किया है. अब योजनाओं की प्रगति की जवाबदेही कमिश्नर की होगी, योजनाओं के पिछड़ने पर डीएम से नहीं मंडलायुक्त से जवाब लिया जाएगा यदि वह सम्बंधित जिले के जिलाधिकारी की रिपोर्ट नहीं भेजता है तो. अभी तक मंडल मुख्यालय पर बैठकर मौज काटने वाले मंडलायुक्तों को जवाबदेह बनाते हुए सीएम योगी ने कहा कि जिलाधिकारी से काम लेना आपका काम है और अपके पास इसका अनुभव भी है क्यूंकि आप लोग खुद डीएम रह चुके हो. इसलिए गाडी और एसी से निकलिए और धूप में चलिए तब जाकर आपको जनता की तकलीफों का एहसास होगा. मंडलायुक्तों को सीएम ने चेतावनी देते हुए कहा कि मौके पर मुआयना कर योजनाओं के क्रियान्वयन पर नज़र रखें, गाड़ी में  घूमना बन्द करें बल्कि जरूरत पड़ने पर पैदल भी चलें. सीएम ने कहा कि जरूरत पड़ने पर वह खुद भी पैदल चलेंगे और योजनाओं की जमीनी हकीकत को देखेंगे. सीएम का कहना था कि जिम्मेदार अधिकारियों को फोन घुमाईये योजनाओं की प्रगति का स्थलीय निरिक्षण करिये, जो जिलाधिकारी काम न कर रहा हो, या फिर नहीं सुन रहे हैं तो शासन को रिपोर्ट करें, फिर हम उसपर कार्यवाही करेंगे.

लखनऊ नगर आयुक्त को मिली लताड़

स्वच्छता के मुद्दे पर लखनऊ नगर आयुक्त को सीएम ने कहा कि आप केवल मीटिंग और भाषण ही करते हैं अब इससे काम नहीं चलेगा, आप पर कोर्ट का आदेश भी बेअसर हो रहा है. लखनऊ, आगरा और कानपुर के नगर आयुक्त स्वच्छता को लेकर रहे निशाने पर, आगरा के अव्वल होने पर और पालीथीन को लेकर जब अफसरों ने आंकड़ों का हवाला देना शुरू किया तब सीएम का कहना था कि अब आंकड़ों से काम नहीं चलेगा. इस दौरान सीएम ने अपनी कानपुर और आगरा विजिट का भी जिक्र किया और कहा कि अभी इन शहरों में गंदगी खत्म कहाँ हुई है. उन्होंने ने निर्देश दिया कि जब तक गन्दगी साफ़ नहीं हो जाती और पालीथीन दिखना बंद नहीं हो जाती तब तक आपका कार्य पूरा नहीं हुआ आंकड़े केवल दिखावा हैं.

गोवंश के रख रखाव पर भी नगर आयुक्त को नसीहत, गोवंशों को पंखा, कूलर से पहले भूसा और पानी चाहिए

समीक्षा बैठक में गोवंश संरक्षण की समीक्षा के दौरान एक अफसर ने मुख्यमंत्री को खुश करने के लिए कहा कि हमने अपने यहाँ गौशाला में पंखे और कूलर की भी व्यवस्था कर दी है, इसपर मुख्यमंत्री मुस्कराते हुए बोले कि आप हमें खुश करने के बजाय उनके लिए केवल भूसा और पानी की व्यवस्था किये रहिये तो भी सही है.

सूत्रों के अनुसार योगी ने कहा कि जल निगम की स्क्रीनिंग करने की जरूरत

मुख्यमंत्री ने कहा कि जल निगम की स्क्रीनिंग करने की जरूरत है. वहां पर तैनात 50 साल से उपर के कर्मचारियों को स्क्रींड करके अनिवार्य सेवानिवृत्त कर देना चाहिए.

बताते चलें कि सोमवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पॉलिथिन, गोवंश और पौधरोपण की समीक्षा, सफाई व नाला टैपिंग पर चर्चा करने के लिए अधिकारियों को बुलाया था. इसके सम्बन्ध में रविवार को मुख्यमंत्री कार्यालय से जारी पत्र में कहा गया था कि इसमें सभी मंडलायुक्त, नगर आयुक्त और प्रबंध निदेशक हिस्सा लेंगे. प्रदेश के 18 मंडलायुक्तों और 17 नगर आयुक्तों की लखनऊ में हुई समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने अपना दृष्टिकोण और एजेंडा व्यापक रूप से अधिकारियों के समक्ष साफ़ कर दिया कि अब वह क्या चाहते हैं और कैसे काम किये जांय. इस बाबत अफसरों को कड़े निर्देश भी दिए. सोमवार को हुई इस समीक्षा बैठक में केवल नगर आयुक्त और मंडलायुक्त थे, बैठक में जिलाधिकारियों को नहीं बुलाया गया था. शहरों की साफ-सफाई की समीक्षा, बैठक में पौधारोपण, पॉलीथिन पर रोक और नमामि गंगे समेत कुल 9 बिंदुओं पर प्रजेंटेशन सीएम के समक्ष हुआ. बैठक में शहरों की सफाई, पॉलीथिन पर रोक, नगरीय क्षेत्र में गोवंश संरक्षण, स्मार्ट सिटी, अमृत योजना, शहरों में नालों को टैप किए जाने की प्रगति, एसटीपी के निर्माण की प्रगति, नमामि गंगे और पौधरोपण अभियान की प्रगति की समीक्षा हुई. बैठक में कमिश्नर, नगर आयुक्त, जल निगम के एमडी को तलब किया गया है। नगर विकास विभाग, वन एवं पर्यावरण विभाग के मंत्री, मुख्य सचिव, अपर मुख्य सचिव, नगर विकास विभाग के प्रमुख सचिव, ऊर्जा, वित्त, पशुधन, पर्यावरण, आवास विभाग के प्रमुख सचिव को भी बुलाया गया था.

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