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कोरोना की आड़ में बचता चार्जशीटेड संजय तिवारी, प्रबंधन व शासन की मेहरबानी से कर रहा रिटायर होने की तैयारी

#पहले वित्तीय अनियमितता की जांच लम्बित होने के बावजूद आलोक कुमार ने किया तैनाती.

#अब दो-दो चार्जशीट होने के बाद भी प्रबंधन व शासन मेहरबान, जांच के खेल में उलझा रिटायर करने की है तैयारी.

राजेश तिवारी

लखनऊ : भ्रष्टाचार और भ्रष्टाचारियों को सबक देंने के लिए कटिबद्ध योगी सरकार का ध्यान जब से कोरोना संकट से निपटने में लगा तब से भ्रष्टाचारियों की पौ बारह हो गयी है.

बिजली विभाग के जीपीएफ घोटाले के सामने आने और कांग्रेस के आक्रामक होने से पहली बार बैक फुट पर आयी योगी सरकार की नाक के नीचे उत्पादन निगम में निदेशक कार्मिक की नियुक्ति जीपीएफ घोटाले में सीबीआई जांच से गुजर रहे आलोक कुमार द्वारा तब की गई जब उसपर एक वित्तीय अनियमितता का मामला लम्बित था. विभाग के सूत्रों के अनुसार संजय तिवारी को ओबरा अग्निकांड की चार्जशीट के साथ ही दूसरी चार्जशीट इसी वित्तीय अनियमितता के मामले में दे दी गयी है.

प्रोबेशन पर चल रहा बिजली निदेशक वित्तीय अनियमितता आरोपी भी, बिजली घर भी फुंकवाया, अब भी पद पर ठाठ से

प्रोबेशन पर चल रहा बिजली निदेशक वित्तीय अनियमितता आरोपी भी, बिजली घर भी फुंकवाया, अब भी पद पर ठाठ से

अब इसे प्रबंधन की कमजोरी कहें या फिर शासन की उदासीनता कि नियुक्ति से लेकर पूरा सेवाकाल सवालों के घेरे में होने के बावजूद संजय तिवारी को माला पहनाकर रिटायर करने की तैयारी में सिस्टम जुटा है. पहले कमेटी फिर उसके मेम्बर पर उंगली उठाकर औऱ चार्जशीट के बाद कोर्ट के दांव पेंच से अभी तक बचता आ रहा है और उसको प्रबंधन द्वारा मौके पर मौका भी दिया जा रहा है. संजय तिवारी का सेवाकाल अब चंद महीने ही बचा है.

ओबरा अग्नि कांड जिसमें सरकार के करोड़ों रुपये स्वाहा हुए उसकी जांच कमेटी के एक सदस्य को सवालों के घेरे में खड़ा कर प्रमुख सचिव से कमेटी में मनमाफिक बदलाव कराने का फायदा यह मिला कि फरवरी माह में बनी इस कमेटी को 1 माह के भीतर रिपोर्ट देनी थी लेकिन अभी तक इस प्रकरण में कुछ नहीं किया जा सका.

अभी ताजा मामले में कार्मिक विभाग में जड़ें जमा चुका संजय तिवारी अपने अधीनस्थ 4 अफसरों का प्रमोशन रोके रखा जोकि छः महीने पहले ही हो जाना चाहिए था. जिसमें फिलहाल प्रबंध निदेशक द्वारा जवाब मांगा गया. अब देखना यह होगा कि संजय तिवारी के जवाब से प्रबंधन कितना सन्तुष्ट होता है. बहरहाल इस पत्र व्यवहार के बावजूद प्रमोशन से लेकर तैनाती तक कई सवाल हैं जिनका जवाब प्रबंधन और खुद संजय तिवारी को देना होगा.

दो-दो चार्जशीट होने के बावजूद ऐसे व्यक्ति को कार्मिक निदेशक जैसे महत्वपूर्ण पद पर प्रबंधन व शासन द्वारा बैठाए रखना और उससे सहानुभूति दर्शाना किसी बड़े मामले की तरफ इशारा करता है, जबकि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अंशुल अग्रवाल जैसे बड़े अफसरों पर कार्यवाही कर सरकार की मंशा को जाहिर कर चुके हैं. अब देखना होगा कि क्या मुख्यमंत्री की नजर इस भृष्ट निदेशक कार्मिक पर पड़ेगी या फिर इसको अभयदान दिया जा चुका है.

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