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लखनऊ की मेयर और नगर आयुक्त के बीच पत्रों की जवाबी कव्वाली जारी, नहीं थम रही रार

#मेयर ने नगर आयुक्त इंद्रमणि त्रिपाठी व चीफ इंजीनियर आरएन त्रिपाठी के खिलाफ विजलेंस जांच की सिफारिश करते हुए शासन को पत्र भेजा.

#इसके पहले भी नगर निगम में कोरोना महामारी के बीच राहत कार्यों की आंड़ में भ्रष्टाचार के मामले को लेकर मेयर, नगर आयुक्त को लिख चुकी हैं पत्र.

#जवाब में नगर आयुक्त ने कहा था कि महापौर के पत्र का जवाब पत्र से ही दिया जाएगा और इस संबंध में पूरी जानकारी के साथ शासन को एक पत्र भेजा जाएगा.

#मेयर के साथ ही संवर्ग भी चल रहा असंतुष्ट, संघ के मुद्दों पर चुप्पी का आरोप.  

राजेश तिवारी
लखनऊ : सूबे की राजधानी लखनऊ के नगर निगम में कोरोना महामारी के बीच राहत कार्यों की आंड़ में भ्रष्टाचार के मामले को लेकर मेयर संयुक्ता भाटिया और नगर आयुक्त इन्द्रमणि त्रिपाठी के बीच पत्रों की जवाबी कव्वाली जारी है. 07 मई 2020 को मेयर संयुक्ता भाटिया द्वारा राजधानी लखनऊ में राहत कार्यों की आंड़ में भ्रष्टाचार को लेकर नगर आयुक्त इन्द्रमणि को लिखे पत्र के जवाब में नगर आयुक्त ने कहा था कि बिना किसी आधार के ऐसे आरोप लगाना दुःखद है. कोविड-19 संकट के समय मेयर का पत्र नगर निगम कर्मचारियों का मनोबल भी तोड़ सकता है. नगर आयुक्त ने कहा था कि महापौर के पत्र का जवाब पत्र से ही दिया जाएगा और इस संबंध में पूरी जानकारी के साथ शासन को एक पत्र भेजा जाएगा. अब 26 जुलाई 2020 को लखनऊ नगर निगम की मेयर संयुक्ता भाटिया ने इस पत्र का जवाब शिकायती पत्र से दिया है. मेयर ने नगर आयुक्त इंद्रमणि त्रिपाठी और आरआर विभाग के चीफ इंजीनियर आरएन त्रिपाठी के खिलाफ विजलेंस जांच की सिफारिश करते हुए शासन को पत्र भेजा है. जिसमें उनके द्वारा एक शिकायत कर्ता द्वारा की गयी शिकायतों के तमाम प्रपत्रों और आडिओ का जिक्र भी किया है.

इसके पहले भी नगर निगम में चल रहे भ्रष्टाचार का खुलासा खुद महापौर संयुक्ता भाटिया ने नगर आयुक्त इन्द्रमणि त्रिपाठी को एक पत्र लिखकर किया था. महापौर ने अपने पत्र में आरोप लगाया था कि राजधानी के कोरोना हाट स्पाट इलाकों में सैनिटाइजेशन के नाम पर भ्रष्टाचार कर लाखों रुपए हजम किए जा रहे हैं. दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की महापौर ने नगर आयुक्त से अपील की थी. हांलांकि तब नगर आयुक्त ने आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए कहा था कि कोविड-19 को लेकर नगर निगम की ओर से जारी राहत व बचाव कार्यों के लिए अभी तक कोई खरीद नहीं की गयी है. राशन व भोजन आदि का वितरण दान में प्राप्त सामग्री से ही हो रहा है. सैनिटाइजर भी नगर निगम को सीएसआईआर से फ्री में प्राप्त हुआ है. जिसका वितरण व छिड़काव किया जा रहा है.

मेयर संयुक्ता भाटिया के घोटाले के आरोप के जवाब में नगर निगम के अधिकारियों ने नया फंड ही बना दिया था. मेयर के खिलाफ खोले गए इस मोर्चे के बाद नए फंड में एक ही दिन में 18 लाख रुपये भी जमा हो गए थे. नगर आयुक्त इंद्रमणि त्रिपाठी की मौजूदगी में हुई बैठक में मेयर के आरोप पर चर्चा के बाद तय हुआ था कि कोरोना के खिलाफ लड़ाई में नगर निगम के बजट से कोई पैसा खर्च नहीं किया जाएगा. नए कोविड-19 ऑफिशियल डोनेशन फंड में नगर निगम के अधिकारी ही योगदान देंगे. इसमें एक-एक महीने की सैलरी भी अधिकारियों ने जमा की. जरूरत पर और पैसा दिये जाने की बात कही गयी. खुद नगर आयुक्त ने 1.50 लाख रुपये फंड में दिए थे. वहीं सभी अपर नगर आयुक्त, उप निदेशक पशु कल्याण, नगर स्वास्थ्य अधिकारी, मुख्य अभियंता आदि ने सहयोग किया था.

जबकि मेयर ने आरोप लगाया था कि सैनिटाइजर बांटने के लिए 2 रुपये की बॉटल के लिए 10 रुपये में खरीद दिखाई गई. इससे नगर निगम की छवि खराब हुई है. 24 घंटे में नगर आयुक्त से कार्रवाई कर रिपोर्ट भी मेयर ने मांगी थी. सीएसआर फंड से मिली बॉटल उधर, नगर आयुक्त का कहना है कि अभी कोई खरीद नहीं की गई है. जिन 10 हजार बॉटल की खरीद की बात की जा रही है. उन्हें आरपीएम साइंटिफिक ने अपने सीएसआर फंड से बिना कोई कीमत लिए दान में दिया है. मेयर को आरोप लगाने से पहले सही तथ्य जानने चाहिए थे. अब कोरोना से लड़ाई में जरूरी मास्क, सैनिटाइजर आदि की खरीद 26 अधिकारियों के सहयोग से बने फंड से ही होगी. पहले भी कम्युनिटी किचन चलाने के लिए नगर निगम अधिकारियों ने अन्नदा फंड में 11.84 लाख रुपये जमा किए थे.

फिलहाल पीसीएस संघ के अध्यक्ष और लखनऊ के नगर आयुक्त इन्द्रमणि त्रिपाठी अपने उपर अभी तक लग रहे तमाम आरोपों को तो खारिज करते आये हैं और तमाम आरोप प्रत्यारोप के बीच राजधानी के नगर आयुक्त और पीसीएस संघ के अध्यक्ष की कुर्सी पर जमे हुए हैं. जानकारों का कहना है कि इनके उपर जब उपर वाले का हाथ है तो इनका क्या बिगड़ने वाला है. जानकार बताते हैं कि इन्द्रमणि की पीसीएस संघ का अध्यक्ष होने के बावजूद अपने संवर्ग के हितों को अनदेखा किये जाने से उनके अपने संवर्ग में भी नाराजगी कम नहीं है. मथुरा में एक SDM पर हुए हमले के बाद यह आम चर्चा थी कि क्या PCS संघ इसका संज्ञान लेगा और मुख्यमंत्री से मिलकर अपने अधिकारियों की सुरक्षा की मांग करेगा. वहीँ संघ के ही कुछ लोगों का यह भी कहना था कि संघ के 13 पीसीएस अफसर सस्पेंड चल रहे हैं और 1 जेल में हैं लेकिन कोई बोलने वाला नहीं है बस अपनी कुर्सी की पड़ी है.

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