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अटल के नाम पर मिशन, चाहिए पूरा कमीशन, मुरादनगर के बाद बुलंदशहर की घटना

#भाजपा के शिखर पुरुष अटल विहारी बाजपेयी के नाम पर चल रही योजना का अमृत जनता से दूर.

अफसरनामा ब्यूरो 

लखनऊ : सत्ता किसी भी पार्टी की हो हर राजनीतिक पार्टी भ्रष्टाचार उन्मूलन के नाम पर ही शासन करती है. लेकिन हकीकत यह है कि ज्यादातर सरकार बदलने के साथ ही सरकारी तंत्र पर काबिज ठेकेदार और सत्ता के दलाल सिस्टम की जद तक करप्सन के बीज बोने में कामयाब हो जाते हैं. मुरादनगर के श्मशान घाट के घोटाले की जांच अभी ठंडी भी नहीं हुई थी कि बुलंदशहर में अटल अमृत मिशन के तहत 400 करोड़ की लागत से सीवर पाईप लाईन मौसम की पहली बारिश में कई जगह से धंसने की खबर आ गयी.

यह सौभाग्य था कि किसी की जान नहीं गयी लेकिन एक के बाद एक हो रही इस तरह की घटनाओं ने निर्माण कार्यों के घटियापन और अटल अमृत योजना में व्याप्त भ्रष्टाचार को सामने ला दिया. सवालों के घेरे में घिरे जलनिगम के अधिशाही अभियंता पूरे मामले पर जांच कराने की बात करने लगे तो बुलंदशहर नगरपालिका के भाजपा के चेयरमैन ने आरोप लगाया कि उनके सौ शिकायती पत्र दिए जाने के बाद भी अधिकारी कानों में तेल डालकर सोये हैं और जलनिगम के अफसरों पर कोई कार्यवाही नहीं की गयी.

अपनी ही सरकार पर सवाल खड़ा करते बुलंदशहर नगर पालिका के चेयरमैन की बात सही मान ली जाय तो भी सवाल उठता  है कि थैलियों की ताकत से ठेके बटोरने वाले और घटिया गुणवत्ता के निर्माण कराने वाले ठेकेदार जब बेहद घटिया निर्माण सामग्री का इस्तेमाल कर रहे होते हैं तो इसका एक कारण यह भी है कि उनको स्टीमेट से  25-30 प्रतिशत कम तक की धनराशी पर टेंडर दिया जाता है और इस बची धनराशी का बंदरबांट अधिकारी अपने लिए कर लेते हैं. इसके बाद कमीशन की कहानी तो सर्वविदित ही है. अटल अमृत मिशन के ही अंतर्गत कम अवधि में सीवर लाइन धंसने की कई घटनाओं में जांच का भी गठन किया गया लेकिन यह अधिकारी, नेता और ठेकेदार के गठजोड़ का कमाल था कि जांच अंजाम तक नहीं पहुँच पायी और भाजपा के शिखर पुरुष अटल विहारी बाजपेयी के नाम पर चल रही इस योजना का अमृत जनता तक नहीं पहुंच पाया.

यह बेहद लापरवाही और लोट खसोट का परिणाम है कि मुरादनगर हो या बुलंदशहर, या सूबे का कोई और शहर, भुक्तभोगी आम जनता ही होती है और कमीशनखोरी किसी और के हिस्से आती है. एनजीओ के चरागाह बन चुके इस मिशन में इस कदर अनियमितता की गई है की टेंडर प्रक्रिया का भी पालन नहीं किया गया है, टेंडर अथवा ई टेंडर को धता बताते हुए अपने पसंद की फर्म से पाइप की सीधी खरीद कर ली गयी है. जिसका एक मात्र कारण कमीशनखोरी ही बताया जा रहा है. सूत्रों की मानें तो नगर विकास विभाग के तहत चल रहे प्रोजक्टों में सेटिंग-गेटिंग का आलम यह है कि ठेकेदारों को भुगतान के आदेश मिशन निदेशालय से ही किये गये हैं.

इन दोनों प्रकरणों के सामने आने के बाद स्वच्छ भारत मिशन और अमृत मिशन जैसे दो प्रमुख परियोजनाओं के निदेशक पद पर लम्बे समय तक काबिज रहे दो अधिकारियों जोकि वर्तमान में शासन में सचिव और अपर मुख्य सचिव के पद पर तैनात हैं की भूमिका भी चर्चा में है, जिनके अनुभव के आधार पर नियंत्रण में सख्ती होनी चाहिए थी लेकिन मुरादनगर व बुलंदशहर जैसी घटनाएँ अंजाम तक पहुँच रहीं हैं.

हांलांकि इन दोनों घटनाओं के बाद मुख्यमंत्री योगी अपने चिरपरिचित अंदाज में दिखे और भ्रष्टाचार के प्रति सख्ती दिखाते हुए कार्यवाही के निर्देश भी दिए. मुरादनगर के ठेकेदार को एक दिन के अंदर ही गिरफ्तार भी कर लिया गया और बुलंदशहर प्रकरण में भी कार्यवाही शुरू कर दी गयी है. लेकिन सत्ताशीर्ष पर बैठे अधिकारियों की जवाबदेही तय न होने से ऐसे प्रकरणों पर किस हद तक लगाम लगायी जा सकेगी यह देखना होगा. 

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