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यूपी जलनिगम में भ्रष्टाचार और भ्रष्टाचारियों को संरक्षण का सिलसिला जारी, मुरादनगर की घटना के बाद भी उदासीन अफसरशाही

#प्रबंध निदेशक का 5 जनवरी का आदेश बना चर्चा का विषय, जिसको देनी थी सजा उसको जाँच लम्बित होने के बाद भी दिया अतिरिक्त प्रभार.

अफसरनामा ब्यूरो

लखनऊ : मुरादनगर में हुए श्मशान घाट के हादसे के बाद सुर्खियों में उत्तर प्रदेश जल निगम का एक और कारनामा सामने आया है जो जलनिगम के प्रबंध निदेशक अनुराग यादव के दिनांक 5 जनवरी 2021 को जारी आदेश पत्रांक संख्या 36/प्र -1/2005-0096/21 के मुताबिक़ मुख्य अभियंता (पी0पी0आर0बी0डी0/टी0ए0सी0) तथा संयुक्त प्रबंध निदेशक (प्रशासन) का काम देख रहे मोहम्मद जुबैर अहमद के सेवानिवृत्त होने पर उनका चार्ज सी०एंड०डीएस० के निदेशक गुलाब चंद दूबे को सौंपे जाने से जुड़ा हुआ है.

वर्तमान प्रबंध निदेशक अनुराग यादव द्वारा भ्रष्ट व सवालों के घेरे में चल रहे गुलाब चंद को इस कदर सुप्रीम पावर बनाना निगम के अंदर चल रहे खेल को समझने के लिए काफी है. सरकार बदली, सिस्टम बदला, पर नहीं बदल सका है जल निगम की कार्यशैली. जल निगम की निर्माण एजेंसी सी०एंड०डीएस० के निदेशक पद पर बैठे गुलाबचंद दूबे जोकि खुद तमाम तरह के आरोपों व जांच से घिरे हैं उनको इस कदर निगम का तमाम महत्वपूर्ण चार्ज दिया जाना वर्तमान की योगी सरकार के पारदर्शिता के सिस्टम को धता बता रहा है.

तमाम शिकायतों और लम्बित जांच के बाद भी संयुक्त निदेशक, प्रशासन का अतिरिक्त चार्ज मिलने से सुप्रीम पावर बने गुलाब चंद

गुलाब चंद दूबे, संयुक्त निदेशक प्रशासन का अतिरिक्त चार्ज मिलने से निगम में सुप्रीम पावर के रूप में उभरे हैं जबकि इनके खिलाफ तमाम शिकायते और गंभीर जांच अभी भी शासन स्तर पर लंबित हैं. मजेदार बात यह है कि खुद गुलाब चंद दूबे की जांच सेवानिवृत्त्त हो चुके जुबैर अहमद के पास था जोकि अब नए प्रभार में खुद गुलाब चंद दूबे के पास आ गया है. इसके अलावा कुम्भ मेले में जल व्यवस्था एवं उसके निर्माण कार्य में प्रयुक्त होने वाली सामग्री की खरीद में इनके द्वारा गंभीर अनियमितता भी की गयी और चीजों को कई गुना ज्यादा के दामों पर खरीदा गया. जिसके सम्बन्ध में स्थानीय सपा नेता कुंवर रेवती रमण ने तत्कालीन प्रबंध निदेशक विकास गोठवाल को पत्र लिख शिकायत करते हुए इनको निदेशक पद से हटाने की मांग भी किया है. जिसके बाद प्रबंध निदेशक रहे गोठवाल द्वारा इनके खिलाफ संयुक्त निदेशक (प्रशासन) रहे जुबेर अहमद की अध्यक्षता में एक जांच कमेटी बना दिया गया.

प्रबंध निदेशक के आदेश से खुद की जांच का प्रभार गुलाब चंद दूबे के पास

फिलहाल अभी भी यह जांच लंबित है और अनुराग यादव के इस आदेश से खुद गुलाब दूबे के पास खुद की जांच आ गयी है. इसके अलावा प्रोजेक्ट, प्लानिंग, रिसर्च जैसे महत्वपूर्ण कार्य और टेक्नीकल एडवाइजरी कमेटी (TAC)जैसी महत्वपूर्ण जांच की जिम्मेदारी भी गुलाब चंद के पास दे दिया गया है. वहीँ गुलाब चंद दूबे जलनिगम में सबसे सीनियर चीफ इंजीनियर हैं और जलनिगम में संयुक्त प्रबंध निदेशक (JMD)का सबसे बड़ा पद होने के नाते सबसे वरिष्ठ मुख्य अभियंता को ही यह पद मिलना चाहिए, लेकिन गुलाब चंद को संयुक्त प्रबंध निदेशक के पद पर न बैठाकर निदेशक सी०एंड०डीएस० बनाया गया है जोकि नियम व व्यवहारिक रूप से अनुचित है.

गुलाब चंद दूबे के कारनामें कम भी नहीं

“अफसरनामा” द्वारा अपने पहले के अंकों में गुलाब दूबे के कारनामों और उनके कृपा पात्र प्रोजेक्ट मैनेजर यूनिट 48 महोबा के कारनामों को उजागर किया था. जिसमें टेंडर, गुणवत्ता में नियमितता, विकास भवन चित्रकूट के निर्माण हुए भ्रष्टाचार को लेकर जिलाधिकारी द्वारा एक पूरी रिपोर्ट साक्ष्यों के साथ शासन को कार्यवाही के लिए लिखा गया, इसके अलावा और भी कई मामलों को जिला प्रशासन द्वारा समय-समय पर शासन को भेजा गया. लेकिन गुलाबचंद दूबे की सरपरस्ती के चलते प्रोजेक्ट मैनेजर लक्ष्मीकांत भी गुलाब चंद की ही तरह दो-दो यूनिटों का प्रभार पाकर मजबूत हो चला है. इसके अलावा महोबा/हमीरपुर में लक्ष्मीकांत के खिलाफ TAC जांच भी निदेशालय पर आज तक लम्बित है जिसका निस्तारण नहीं किया जा सका है. और अब इस जांच का मुखिया गुलाब चंद के बन जाने से जांच की निष्पक्षता और उसके परिणाम को समझना आसान है.

फिलहाल गुलाब चंद को मिले नए प्रभार से लक्ष्मीकांत तिवारी की चांदी हो गयी है. गुलाब चंद की कृपा से लक्ष्मीकांत तिवारी जैसे परियोजना प्रबंधक सरकार के नियमों की अनदेखी कर भ्रष्टाचार में लिप्त हैं. निदेशक गुलाबचंद द्वारा उनको संरक्षण दिए जाने का काम किया जा रहा है. निदेशक गुलाब चन्द्र से अपने करीबी संबंधों के बल पर किसी भी जांच को ठंडे बस्ते में डालवा देना लक्ष्मीकांत के लिए कोई बड़ी बात नहीं है. ऐसे ही एक प्रकरण में लक्ष्मीकांत के कारनामों के शिकायत के बाद गठित की गई टी०ए०सी० जांच को महीनों से निदेशक सी०एंड०डीएस० गुलाबचंद द्वारा दबा दिया गया है. और तो और प्रकरण में एसआईटी जांच की भी सिफारिश की गई थी लेकिन महीनों बीतने के बाद भी अभी तक मामला केवल सिफर ही रहा है. मजेदार बात यह है कि यह प्रकरण भी परियोजना प्रबंधक लक्ष्मीकांत तिवारी और निदेशक गुलाब चंद दूबे के बीच का है और टीएसी जांच की फाईल को निदेशक द्वारा दबा दिया गया है.

चहेते प्रोजेक्ट मैनेजर को दिया पूरे बुंदेलखंड का प्रभार

इन सबके बावजूद गुलाब चंद ने चांदी काटने के लिए लक्ष्मीकांत को फिलहाल पूरे बुंदेलखंड का प्रभार दे दिया है. लक्ष्मीकांत को महोबा यूनिट के साथ ही साथ पत्रांक संख्या 158/म0प्र0अधि0-002/40 दिनांक 29 दिसंबर 2020 को झांसी यूनिट का भी प्रोजेक्ट मैनेजर बना दिया. इसके अलावा पत्रांक संख्या 159/म0प्र0अधि0-002/41 दिनांक 29 दिसंबर 2020 को ही गुलाब चंद द्वारा अपने एक और चहेते कमलेश कुमार को दो-दो यूनिटों का चार्ज दे दिया. जबकि सी0एन्ड0डी0एस0 मुख्यालय पर प्रोजेक्ट मैनेजर स्तर के कई इंजीनियर गुलाब चंद की कृपा के इन्तजार में खाली बैठे हैं.

सपा सरकार में आजम के रहे हैं करीबी, डीएम की शिकायत के बाद भी चहेते पर नहीं किया कोई कार्यवाही

उत्तर प्रदेश जल निगम की निर्माण इकाई सी०एंड०डीएस० के निदेशक गुलाब चन्द्र दूबे जिनको कि सपा सरकार के कद्दावर मंत्री रहे आजम खान का करीबी माना जाता है की मेहरबानी अपने परियोजना प्रबन्धक लक्ष्मीकांत तिवारी पर इस कदर जारी है कि उसके खिलाफ कोई जांच अंजाम तक नहीं पहुँच पा रही है और वह अभी तक फाईलों में दब कर धूल फांक रही है. यह सिस्टम के लिए शर्मनाक तब और हो जाता है जब खुद जिले का जिलाधिकारी शासन को शिकायत कर परियोजना प्रबंधक पर कार्यवाही की बात करता है परन्तु साल भर बीतने के बाद भी कार्यवाही तो दूर दोषी को पुनः उसी जिले में निदेशक द्वारा तैनाती दे दी जाती है.

चित्रकूट विकास भवन के निर्माण में हुए भ्रष्टाचार का मामला, डीएम भेज चुके हैं कार्यवाही करने की रिपोर्ट

बताते चलें कि चित्रकूट के विकास भवन के निर्माण में घटिया सामग्री का उपयोग जिसकी शिकायत और कार्यवाही की संस्तुति खुद जिलाधिकारी द्वारा किया गया था, के एक वर्ष बीत जाने के बाद भी ठन्डे बस्ते में है और लक्ष्मीकांत पर कार्यवाही तो दूर उसको एक यूनिट का और प्रभार दे दिया गया है. इसके अलावा आसरा आवास योजना के तहत सूबे के जनपद महोबा में आवासीय भवनों/इकाईयों के निर्माण में शासन के निर्देश को धता बताते हुए इंसिटू कुलपहाड़ और इंसिटू चरखारी में हुए घपले की शिकायत के बाद गठित टीएसी जाँच जिसकी पत्रांक संख्या 130/टी०ए०सी० 2052-0586-2020 है जोकि दिनांक 15 फरवरी 2020 को निदेशक सी०एंड०डीएस० गुलाब चन्द्र दूबे को भेजा जा चुका है. उसको भी निदेशक महोदय की मेहरबानी से दबा दिया गया है. यह निदेशक की ही मेहरबानी का परिणाम है कि महोबा जनपद में एक लम्बे समय तक रेजिडेंट इंजीनियर से परियोजना प्रबंधक के रूप में तैनात रहकर लक्ष्मीकांत तिवारी ने सरकार द्वारा निर्धारित निर्माण के मानकों और टेंडर प्रक्रिया को धता बता धन उगाही के काम में वर्षों से लगा हुआ है जोकि अभी भी अनवरत जारी है.

मुरादनगर की घटना से सूबे की अफसरशाही सबक लेने के बजाय कितनी उदासीन बनी हुई है सी०एंड०डीएस० के निदेशक गुलाब चन्द्र दूबे इसके एक उदाहरण मात्र है. यदि जलनिगम के इस सिस्टम पर नजर डाली जाय तो उपर से नीचे तक एक सुनियोजित तरीके से भ्रष्टाचार को बढावा और भ्रष्टाचारियों को संरक्षण देने का काम किया जा रहा है. जोकि मुख्यमंत्री योगी की मंशा और उनके सिस्टम के पारदर्शिता के फार्मूले को ठेंगा दिखा रहा है. फिलहाल यदि शासन इसकी गहराई में जाएगा तो और भी कहानियाँ सामने आएँगी.

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