
#साल दर साल सामने आ रहे इस तरह फर्जीवाड़े के प्रकरण हैं महकमों के लिए अलार्मिंग संदेश.
अफसरनामा ब्यूरो
लखनऊ : यूपी में मेडिकल एजुकेशन के तहत एमबीबीएस की डिग्री हासिल करने के लिए दाखिलों में एक वर्ष के अंदर सामने आए फर्जीवाड़े के दूसरे प्रकरण ने सुबे की सेहत से जुड़े महकमों के लिए अलार्मिंग संदेश दिया है. भले ही योगी सरकार भ्रष्टाचार के विरूद्ध जीरो टॉलरेंस के मूल मंत्र का जप करती रहे लेकिन सरकारी तंत्र इसको अमलीजामा पहनाने में अभी तक सफल नहीं हो पा रहा है. सरकारी मंत्र और तंत्र के बीच की विरोधाभासी स्थितियां सुबे के पड़ोसी राज्य राजस्थान की तर्ज पर निर्णायक कदम उठाए जाने की जरूरत का इशारा कर रही हैं.
प्रदेश में गत वर्ष फर्जी तरीके से धर्म परिवर्तन कर बौद्ध धर्म का छात्र बताते हुए मेरठ के एक निजी कॉलेज में एमबीबीएस में दाखिले का फर्जीवाड़ा हुआ था तो इस बार देश की स्वतंत्रता के लिए संघर्ष करने वाले स्वतंत्रता सेनानियों के आश्रितों के लिए आरक्षित सीटों पर डाका डालने का प्रयास हुआ. बात केवल उत्तर प्रदेश की ही नहीं है. पड़ोसी राज्य #राजस्थान में भी दिव्यंगता का फर्जी प्रमाण पत्र बनवाकर चयन/दाखिले की घटनाएं सामने आई हैं. जिसके बाद उच्च न्यायालय के हस्तक्षेप पर बीते गुरुवार को राजस्थान सरकार ने दिव्यांग कोटे के तहत पूर्व में हुई भर्तियों की जांच के आदेश जारी कर दिए.

दिव्यांग,स्वतंत्रता सेनानी और अल्पसंख्यक सहित कोटा चाहे कोई भी हो, सरकार सामाजिक कल्याण के उद्देश्य के तहत इस प्रकार की व्यवस्था करती है. लेकिन जालसाज और सरकारी महकमों के कुछ भ्रष्ट लोग सरकार की अच्छी-भली मंशा को भी पलीता लगाने से बाज नहीं आते. ऐसे में यह बड़ा सवाल है कि क्या उत्तर प्रदेश में भी जालसाजी रोकने के लिए राजस्थान सरकार की तर्ज पर योगी सरकार कोई सख्त कदम उठाने जा रही है?
#यूपी के स्वास्थ महकमों की सेहत है नासाज, हो रहे फर्जीवाड़े तो कैसे सुधरेगी जनता की सेहत….
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