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एसडीएम विधूना का मामला, पहले सरकार ने किया सस्पेंड तो अब नियुक्ति विभाग कर रहा परेशान 

#कमिश्नर की जांच रिपोर्ट के बाद भी 20 दिन से मामले को लटकाए पड़ा है नियुक्ति विभाग.

अफसरनामा ब्यूरो 

लखनऊ : 25 नवंबर को अयोध्या में धर्म संसद में भाग लेने जा रहे लोगों को धर्मसभा के नाम पर हुडदंग मचाने से रोकने पर सस्पेंड किये गए औरैया जिले के एसडीएम विधूना और सीओ की खबर को “अफसरनामा” द्वारा प्रमुखता से उठाया गया था. लेकिन अब इसी योगिराज में 2015 बैच के पीसीएस अफसर प्रवेन्द्र कुमार को नियुक्ति विभाग के प्रकोप का सामना करना पड रहा है. बताते चलें कि एसडीएम के सस्पेंड होने के बाद पूरे मामले की जांच कमिश्नर कानपुर को सौंपी गयी थी. कमिश्नर आफिस के सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार कमिश्नर कानपुर की जांच में एसडीएम किसी भी तरह से दोषी नहीं पाए गए और जांच रिपोर्ट को शासन भेज दिया गया. फिलहाल एसडीएम के इस प्रकरण की फाईल नियुक्ति विभाग में पड़ी धूल फांक रही है, और करीब 20-25 दिन बीत जाने के बाद भी तक कोई फैसला नियुक्ति विभाग नहीं ले सका है. वहीँ सीओ की जांच अभी प्रक्रिया में है और इसमें अभी तक जांच अधिकारी द्वारा किसी तरह का फैसला नहीं लिया जा सका है.

पहले उपद्रवियों को टोकने पर खफा सरकार ने औरैया की बिधूना तहसील के एसडीएम को सस्पेंड किया तो अब सरकार का नियुक्ति विभाग देरी करके अलग से सजा देने का काम कर रहा है. बड़ा सवाल यह है कि बिना किसी गुनाह के 2014-15 बैच के इन अफसरों के कैरियर के साथ इस तरह का खिलवाड़ कितना उचित है जबकि वह निर्दोष हैं. तब योगी सरकार का यह फैसला अखिलेश यादव सरकार में दुर्गाशक्ति नागपाल प्रकरण को ताजा कर दिया था. तब यह कहा जा रहा था कि अखिलेश सरकार में जिस तरह से पीसीएस अफसर दुर्गाशक्ति नागपाल का निलंबन राजनीतिक था, इसी तरह योगिराज में 2015 बैच के पीसीएस अफसर प्रवेन्द्र कुमार का निलंबन भी राजनीतिक ही है.

गौरतलब है कि 25 नवंबर को अयोध्या में धर्म संसद में भाग लेने जा रहे लोगों के साथ दुर्व्यवहार और कानून व्यवस्था संभालने में लापरवाही बरतने पर सरकार ने औरैया की विधूना तहसील के एसडीएम प्रवेंद्र कुमार और सीओ भास्कर वर्मा को निलंबित कर दिया था. हालांकि सरकार ने यह कार्यवाही डीएम की रिपोर्ट के आधार पर की थी लेकिन तब भी सवाल यही था कि क्या कानून व्यवस्था बिगड़ने से पहले अगर एहतियातन अफसर द्वारा कोई कदम उठाया जाता है और वह मामला सत्ताधारी दल के कार्यकर्ताओं से जुडा हो तो कार्यवाही अफसर पर की जाती है.

धर्मसभा के नाम पर हुडदंग मचाने से रोकने पर अफसर नपे

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