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उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा आयोग का हुआ गठन

# 1981 बैच के पूर्व आईएएस चंद्रभूषण पालीवाल को बनाया गया अध्यक्ष  

अफसरनामा  

लखनऊ : उत्तर प्रदेश सरकार ने अधीनस्थ सेवा आयोग का गठन कर दिया है और इसका अध्यक्ष चंद्रभूषण पालीवाल को बनाया गया है. इसके अलावा अधीनस्थ सेवा योग में  ह्रदय नारायण राव , डॉ सीमा रानी , डॉ ओंकार प्रसाद मिश्रा , अरुण कुमार सिन्हा और डॉ अशोक कुमार अग्रवाल को आयोग का सदस्य बनाया गया है. समूह ‘ग’ के रिक्त पदों पर भर्ती के लिए गठित इस आयोग में अध्यक्ष व सात सदस्यों के पद अभी तक खाली थे. और इसके लिए सरकार ने नए अध्यक्ष व सदस्यों के चयन के लिए आवेदन मंगाए थे लेकिन नगर निकाय चुनाव की वजह से चयन की कार्रवाई पूरी नहीं हो सकी थी. जिसको अब जाकर सरकार द्वारा आवेदनों की स्क्रीनिंग के बाद  आयोग का गठन किया गया है. बताते चलें कि 19 मार्च 2017 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के शपथ लेने के बाद तत्कालीन मुख्य सचिव राहुल भटनागर ने आदेश जारी कर सभी गैर शासकीय सलाहकारों, निगमों, विभागों व समितियों में अध्यक्षों, उपाध्यक्षों और सदस्यों को हटाने का आदेश जारी किया था.

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर मुख्य सचिव राजीव कुमार ने आज अधीनस्थ सेवा चयन आयोग का गठन करते हुए पूर्व आईएएस चन्द्रभूषण पालीवाल को अध्यक्ष बनाया दिया. यूपी के जालौन जिले के रहने वाले 1981 बैच के आईएएस रहे चंद्रभूषण पालीवाल सदस्य राजस्व परिषद के पद से नवंबर 2014 में रिटायर हुए थे. इससे पहले वह प्रमुख सचिव नगर विकास के अलावा स्वास्थ्य विभाग, परिवहन व भूमि सुधार जैसे विभागों में प्रमुख पदों पर भी रह चुके हैं.

सूबे की योगी सरकार ने सत्ता में आने के बाद से ही विभिन्न विभागों में खाली पदों को भरने के लिए गंभीर है और इसी क्रम में रिक्त पदों पर भर्ती को शीर्ष प्राथमिकता में लेते हुए आयोग के गठन से जुड़ी प्रक्रिया शुरू कर दी गयी थी. आयोग के इन पदों के लिए अवकाश प्राप्त आईएएस अधिकारियों से लेकर सैकड़ों की संख्या में लोगों ने आवेदन किए थे. अध्यक्ष पद के लिए एक पूर्व सीएम के रिश्तेदार, दो पूर्व कृषि उत्पादन आयुक्त के अलावा केंद्रीय प्रतिनियुक्ति से रिटायर हुए दो अन्य आईएएस अधिकारियों के नाम भी चर्चा में आये थे.

प्रदेश में कुल खाली चल रहे पदों की संख्या 60 हजार से अधिक है जिनमें अधीनस्थ सेवा आयोग द्वारा भर्ती किये जाने वाले रिक्त पदों की संख्या लगभग 50 हजार है. अधीनस्थ आयोग के गठन के बाद अब इन रिक्त पदों को भरने का शीघ्र शुरू किया जा सकेगा.

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