
अफसरनामा ब्यूरो
लखनऊ : उत्तर प्रदेश के बलरामपुर जिले के छांगुर प्रकरण में हो रहे खुलासे से एकतरफ जहाँ तत्कालीन जिलाधिकारी द्वारा भेजी गयी रिपोर्ट की पुष्टि हो रही है. वहीँ योगी सरकार की कार्यशैली पर प्रश्नचिन्ह भी लग रहा है. बताते चलें कि वर्ष 2024 में तत्कालीन #DM बलरामपुर, अरविन्द कुमार सिंह ने सीमावर्ती जिले में संदिग्ध गतिविधियों की रिपोर्ट शासन को सौंपी थी, लेकिन रिपोर्ट करीब डेढ़ वर्षों तक दबी रही. रिपोर्ट में तत्कालीन पुलिस अधिकारियों का नाम भी उजाकर हुआ. लेकिन अपनी जिम्मेदारी निभाने वाले #डीएम अरविन्द सिंह को राजस्व परिषद् में भेज दिया गया और इतने बड़े सिंडिकेट से मिलीभगत वाली पुलिस के तत्कालीन मुखिया केशव कुमार को एक दूसरे जिले की कमान सौंप दी गयी. यही नहीं कप्तान साहब को इसके आलावा 15 अगस्त को स्वंत्रता दिवस पर सम्मान भी दिया गया. अब नेपाल सीमा से सटे बलरामपुर, श्रावस्ती और बहराईच जिले के आंकड़ों ने गृहमंत्रालय की भी चिंता बाधा दिया है.
आखिर कौन रहा है मेहरबान? क्या इसकी भी जांच कर जिम्मेदारी योगी सरकार तय करेगी? अब यह सवाल अहम् हो चला है. सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक़ प्रकरण के सामने आने और शासन को रिपोर्ट भेजे जाने के बाद बड़ी गहमागहमी रही थी और तत्कालीन डीएम और कप्तान के बीच मतभेद आदि की भी स्थिति सामने आयी थी. जिसके बाद डीएम राजस्व परिषद और कप्तान को सम्मान के साथ दुसरे जिले में भेज दिया गया था. लेकिन खबरों के मुताबिक़ अब केन्द्रीय गृह मंत्रालय की चिंता से यह प्रकरण और गंभीर हो चुका है और इसके कारकों व जिम्मेदारों पर कार्यवाई की संभावना बढ़ गयी है.
केन्द्रीय गृह मंत्रालय की चिंता के कारकों सीमावर्ती जिलों में जनसांख्यकीय बदलाव, स्थानीय पलायन और बाहरियों की सक्रियता, अवैध धार्मिक अतिक्रमण और मानव तस्करी और आपराधिक घटनाओं में वृद्धि है. फ़िलहाल नेपाल सीमा से सटे #बलरामपुर #श्रावस्ती #बहराईच जिले की स्थिति के कारकों को लेकर केन्द्रीय गृह मंत्रालय की चिंता से मामला और गंभीर हो गया है.
