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वित्त विभाग के दो अनमोल रतन, एक धनन्जय तो एक रामरतन

अफसरनामा ब्यूरो

लखनऊ : सूबे का वित्त विभाग आजकल कुछ इसी तरह की फिल्मी पेरोडी को गुनगुना रहा है. दोनों अधिकारी एक दूसरे के पूरक हैं जिसमें धनन्जय सिंह ग्रामीण अभियंत्रण विभाग में वित्त नियंत्रक हैं तो रामरतन पहले ग्रामीण अभियंत्रण विभाग में उपसचिव थे और वर्तमान में वित्त विभाग में उपसचिव के पद पर बैठ व्यय नियंत्रण का काम देख रहे हैं. अब इसे विडंबना नहीं तो और क्या कहेंगे कि जिस रामरतन ने ग्रामीण अभियंत्रण विभाग में वर्ष 2016-17 के बजट लैप्स के प्रकरण को गोलमाल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी और व्यय नियंत्रण की धज्जियाँ उड़ा दी, सरकार के विनियोग लेखे को गलत करा दिया. उन्हीं रामरतन को वित्त व्यय नियंत्रण की जिम्मेदारी दे दी गयी है.

 “अफसरनामा” के पिछले अंकों में बजट मैनुअल और फाइनेन्शियल हैण्डबुक के तमाम नियमों के गंभीर उल्लंघन करने वाले वित्त नियंत्रक धनन्जय सिंह के बारे में खबरें प्रकाशित होने के बाद भी शासन के हाकिमों के कान पर जूं भी न रेंगी तो “अफसरनामा” द्वारा कारण जानने के लिए अपनी पड़ताल को आगे बढ़ाया गया और उसमें जो जानकारी सामने आयी वो सनसनीखेज थी. तिकड़मों के बादशाह माने जाने वाले धनन्जय सिंह तत्कालीन विभागीय मंत्री से रही अपनी नजदीकियों की वजह से वित्तीय नियमों के नियमन से ज्यादा अन्य मामलों में रूचि रखते हैं. इसलिए वित्त महकमे के लिए 31 मार्च 2017 जैसे संवेदनशील व महत्वपूर्ण दिन भी कार्यालय समय पूरा कर घर चले गए और फोन स्वीच आफ कर दिया. जब वित्त नियंत्रक जिम्मेदार न हो तो बजट लैप्स होगा ही. लेकिन रहस्यमयी तिकड़मों का दौर इसके बाद ही शुरू हुआ.

जानकारों के मुताबिक़ लैप्स बजट के संबंध में ए.जी. की ओर से शासन को पत्र भेजा गया जिसके बाद R.E.S विभाग की ए.जी आडिट होती है और उसके बाद एकाएक शांति छा जाती है और रामरतन ग्रामीण अभियंत्रण से वित्त विभाग पहूंच जाते हैं. बताते चलें कि ये वही रामरतन हैं जिन्होने नियमविरूद्ध तरीके से लैप्स बजट को पी. एल. ए. में डलवाने की कोशिश की थी और जिन्हें एक अन्य मामले में तत्कालीन एपीसी प्रभात कुमार ने आर.ई.एस के चर्चित रहे पूर्व डायरेक्टर उमाशंकर के साथ ही चार्जशीट दी है. यही कारण है कि पूर्व मुख्यसचिव अनूपचंद्र पांडेय (तत्कालीन आयुक्त एवं प्रमुख सचिव,वित्त) के जमाने में हुए इस प्रकरण पर उनके वित्त विभाग से हटने के बाद से आजतक कोई कार्यवाही नहीं हो पायी है.

ध्यान रहे तबाह होती अर्थव्यवस्थाओं के मूल में किसी हद तक राजकोषीय अनुशासन का भंग होना एक वजह रही है. शायद यही वजह है की सी.ए.जी लगातार सूबे की सल्तनत को आगाह कर रही है और खुद प्रधानमंत्री देश के वित्त और कर ढाँचे से जुड़े निकम्मे अफसरों पर कार्यवाही करा रहे हैं लेकिन लगता हे कि उत्तर प्रदेश शासन में हावी जुगाड़तंत्र के आगे इन बातों का कोई महत्व नहीं रह गया है.

कहाँ तो विभाग द्वारा किये गये व्यय की वास्तविक स्थिती की जानकारी वित्तीय सांख्यिकी निदेशालय से प्राप्त करके शासन के वित्त विभाग को बताने और जरूरत से अधिक बजट अनुमान बनाने और लगभग 1.5 करोड़ कम बजट सरेन्डर करने के जिमेदारों के खिलाफ कार्यवाही की जानी थी और कहाँ आँकड़ो की जादूगरी और फाइलों को घुमाने की कलाबाजी दिखाकर प्रकरण में लीपापोती करने में रामरतन और धनन्जय सिंह कामयाब रहे. आप इसे मिलीभगत या दुरभी संधि कुछ भी कह सकते हैं लेकिन ये शासन के जुगाड़तंत्र की ताकत की जीती जागती मिशाल है. विभाग में निजाम बदलने के साथ अब देखना यह होगा कि कि बदले निजाम का क्या इनपर कोई असर होगा, क्या कोई कार्यवाही हो पायेगी.

ग्रामीण अभियंत्रण विभाग में की जा रही लैप्स बजट को छिपाने की कोशिश

ग्रामीण अभियंत्रण विभाग में की जा रही लैप्स बजट को छिपाने की कोशिश

ग्रामीण अभियंत्रण विभाग में लैप्स बजट को छिपाने का जिम्मेदार वित्तनियंत्रक बना जांच अधिकारी

ग्रामीण अभियंत्रण विभाग में लैप्स बजट को छिपाने का जिम्मेदार वित्तनियंत्रक बना जांच अधिकारी

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