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लखनऊ : उत्तर प्रदेश के अस्पतालों में डाक्टरों की कमी बनी समस्या, विभाग की तरफ से शासन को भेजी रिपोर्ट के मुताबिक लेवल-2 और लेवल-3 स्तर के डाक्टरों की सबसे ज्यादा कमी, जिससे सामुदायिक स्वस्थ्य केंद्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सहित जिलों के अस्पताल हो रहे प्रभावित. डाक्टरों की भर्ती की कवायद तो हुई शुरू लेकिन हुई एक भी नहीं. स्वास्थ्य विभाग ने 601 विशेषज्ञ, 1790 एमबीबीएस डाक्टरों की भर्ती के लिए नवम्बर 2025 में मांगे आवेदन, जनवरी 2026 में हुए इन्टरव्यू लेकिन 30 जनवरी को आने वाला परिणाम मेरिट और पारदर्शिता की भेंट चढ़ी. महानिदेशालय द्वारा शासन को भेजी गयी रिपोर्ट के अनुसार लेवल-2 के डाक्टरों के 7240 पदों में से 5497 पद खाली, लेवल-3 में डाक्टरों के 5199 पद लेकिन 2007 डाक्टर ही उपलब्ध. इसके अलावा संयुक्त निदेशक स्तर के 2858 पदों में से 1330 पद खाली, डेंटल सर्जन के 70 में से 58 और साधारण ग्रेड के डेंटल सर्जन के 970 पदों में से 157 पद खाली हैं. जागरूकता और हेल्थ कैम्प जैसे स्वास्थ्य अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के 8853 पदों में से 6364 पद खाली. स्टाफ नर्स के 8113 पदों में से 3257 पर भर्ती नहीं हुई. “वाक् इन इन्टरव्यू” के तहत बीते वर्ष दिसंबर में 2300 से अधिक पदों के लिए हुआ इन्टरव्यू लेकिन एक भी नहीं हो सकी भर्ती. इसपर प्रमुख सचिव चिकित्सा स्वास्थ्य का कहना है कि “मेडिकल भर्ती बोर्ड” बनाये जाने से अब इस प्रक्रिया में देरी नहीं होगी, “वाक् इन इन्टरव्यू” से की जायेंगी भर्तियाँ.

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