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रामनगरी के मेडिकल कालेज में दवाओं के खेल का मामला, अपनी ही कलम से फंसते राजर्षि दशरथ मेडिकल कालेज के प्रधानाचार्य, दवा सप्लायरों से सांठगाँठ की खुली पोल से मची खलबली   

#प्रधानाचार्य द्वारा प्रतिनियुक्ति पर तैनात अधिकारियों/कर्मचारियों को जारी तबादला आदेश फिर 12 दिन बाद ही उसी के निरस्तीकरण आदेश की जड़ में अनिधिकृत रूप से हुई दवा सप्लाई प्रकरण के खुलासे की दिख रही हड़बड़ी.

#प्रतिनियुक्ति पर तैनात अधिकारियों/कर्मचारियों का तबादला आदेश प्रधानाचार्य का शासन को लिखने के बजाय, सीधे तैनात लोगों को ही आदेश जारी करना, फिर 12 दिन बाद जारी किये गए अपने ही आदेश को “काम की अधिकता बता” निरस्त करना है हड़बड़ी का परिचायक, मामला सुलटाने के लिए दबाव बनाने की भी कर चुके कोशिश. 

अफसरनामा ब्यूरो     

अयोध्या : स्वच्छ, सख्त व पारदर्शी प्रशासन की हिमायती योगी सरकार द्वारा रामनगरी में बनाये गए राजर्षि दशरथ मेडिकल कालेज के प्रधानाचार्य की कार्यशैली ठीक इससे उलट चल रही है. “अफसरनामा” ने खुलासा किया था कि कैसे चार्ज में रहे प्रधानाचार्य डॉ दिनेश कुमार सिंह के समय में मरीज हितों से खिलवाड़ किया गया? और नियमों मानकों को ताख पर रख मिलीभगत से दवा मंगाई गयी.

उसके बाद प्रकरण का खुलासा होने पर मिली जानकारी के मुताबिक़ कार्यवाहक प्रधानाचार्य के रूप में तैनात डॉ दिनेश कुमार मर्तोलिया का मामले की लीपापोती और मैनेजमेंट का खेल चला. दबाव, प्रभाव, कागजों में खेल, ईमेल आईडी का पासवर्ड बदलने जैसी कोशिश किया जाने लगा. इसी बीच प्रधानाचार्य द्वारा 06 मार्च 2026 को मेडिकल कालेज में प्रतिनियुक्ति में तैनात 04 लोगों को (02 डॉ और 02 फार्मासिस्ट) की कार्यावधि पूर्ण होने की बात कह अपने मूल विभाग में वापस जाने के आदेश जारी किये जोकि नियमविरुद्ध था. और इन्हीं आदेश को 12 दिन बाद ही यह कहते हुए निरस्त कर दिए कि कार्य की अधिकता और मरीज हित में आप सबकी तैनाती मेडिकल कालेज में जरुरी है.

नियमविरुद्ध किये गए प्रतिनियुक्ति पर तैनात तबादलों और 12 दिन बाद ही जारी उन सबके निरस्तीकरण पत्रों से ही यह साबित होता है कि “प्रधानाचार्य के जारी आदेश की जड़ में अनिधिकृत रूप से हुई दवा सप्लाई प्रकरण के खुलासे की हड़बड़ी है”. क्योंकि आज भी अनिधिकृत रूप से मंगायी गयी वह दवाएं नियमानुसार स्टोर में न होकर पुरानी बिल्डिंग कमरा नंबर.10 में अलग रखी हैं क्यों? यह भगवान् राम की नगरी और जनता के स्वास्थ्य से जुड़ा विषय होने के कारण अत्यंत ही गंभीर है, शासन को इसका संज्ञान लेकर निष्पक्ष जांच करानी चाहिए.       

क्योंकि बड़ा सवाल यह है कि….     

1. क्या शासन द्वारा प्रतिनियुक्ति पर तैनात किये गए अधिकारी/कर्मचारी को उनकी तैनाती की समयावधि समाप्त हो जाने के बाद शासन को न लिखकर सीधे तैनात अधिकारी/कर्मचारी को पत्र लिखा जाना नियमसंगत है?

जानकार बताते हैं कि जब तैनाती शासन की अनुमति से हुई है तो वापसी भी शासन की ही अनुमति से होनी चाहिए. पूर्व में प्रधानाचार्य रहे डॉ सत्यजीत वर्मा के समय 2022 में अयोध्या, बस्ती, बहराईच के जिलों में प्रतिनियुक्ति तैनात अधिकारियों/कर्मचारियों को शासन के आदेश संख्या 21 अक्टूबर 2022 को पत्रांक संख्या I/228772/71-3-2022 के माध्यम से उनके मूल विभाग में वापस किया गया था. जिसमें 06 चिकित्सक और 23 कर्मियों का नाम शामिल था.       

मिली जानकारी के मुताबिक बीते दिसंबर माह में “एमडी NHM” ने “प्रमुख सचिव” के हवाले से सभी प्रधानाचार्यों को यह सलाह दिया था कि जिले के अस्पतालों में तैनात स्वास्थ्य विभाग के किसी भी अधिकारी/कर्मचारी को बिना DGME की पूर्व अनुमति के रिलीव नहीं किया जाएगा. लेकिन इसके विपरीत शासन के आदेशों को दरकिनार कर प्रधानाचार्य ने शासन की बिना पूर्व स्वीकृति के इस तरह का पत्र लिखा. वैसे सीजन के तबादले में भी शासन ही अधिकृत होता है.

2. सवाल यह भी है कि जब “राजर्षि दशरथ स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय सम्बद्ध चिकित्सालय में पर्याप्त मानव संशाधन उपलब्ध है.” की बात 06 मार्च 2026 को जारी पत्र में कहकर तबादला किया गया, तो 12 दिन बाद यानी 18 मार्च 2026 को अचानक ऐसी कौन सी परिस्थिति बनी कि उक्त जारी आदेश को “कार्यों की अधिकता और रोगी हित” बता वापस लेना पड़ा?

जबकि उक्त 02 डाक्टरों और 02 फार्मासिस्टों को उनकी प्रतिनियुक्ति अवधि, विस्तारित अवधि को दर्शाते हुए इसी माह 06 मार्च 2026 को यह कहते हुए कि “वर्तमान में राजर्षि दशरथ स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय सम्बद्ध चिकित्सालय में पर्याप्त मानव संशाधन उपलब्ध है. ऐसे में आपकी विशेषता एवं सेवाओं का लाभ अन्य किसी स्थान जहाँ आवश्यकता हो, पर मिल सके, इस मंशा से समग्र विचारोपरांत आज दिनांक 06.03.2026 अपराह्न से आपको मूल विभाग हेतु कार्यमुक्त किया जाता है.” कार्यमुक्त कर दिया जाता है, का पत्र दिया गया था.

मेडिकल कालेज में प्रतिनियुक्ति पर तैनात 02 डॉ और 02 फार्मासिस्ट का तबादला और निरस्तीकरण पत्र….

दरअसल मेडिकल कालेज में अनिधिकृत रूप से हुई दवा सप्लाई प्रकरण के समय प्रधानाचार्य के चार्ज में डॉ दिनेश कुमार सिंह और अब मामले को सार्वजनिक होने के बाद कार्यवाहक प्रधानाचार्य के रूप में तैनात डॉ दिनेश कुमार मर्तोलिया अपनी प्रशासनिक मर्यादा का त्याग करके उन चहेती फार्मों को उपकृत करने के साथ ही अब अपनी गर्दन बचाने के लिए नियमविरुद्ध आदेशों की झड़ी लगा दिए हैं. मेडिकल कालेज में बिना बिल, बिना मानक के दवा मंगा आमजन की सेहत से खिलवाड़ करने वाले प्राचार्य शासन के आदेश/निर्देश को मानने के बजाय खुद को उसके उपर समझते हैं.

मेडिकल कालेज परिसर में इनकी सरपरस्ती में हो रहे कैंटीन के स्थायी निर्माण को बिजली विभाग के जेई की शिकायत पर सीएमस को पुलिस के माध्यम से निर्माण कार्य रुकवाना पड़ा था. मेडिकल कालेज का प्रशासन संभालने के लिए तैनात किये गए प्रधानाचार्य अपना मूल काम छोड़कर अन्य वह सभी काम कर रहे हैं जोकि उनके अधिकार क्षेत्र से बाहर और अनैतिक हैं. 

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