
#जब दवाएं नहीं थीं, तब महंगे उत्पादों को मंगाया, और जब ये हुए एक्सपायर तो मामला प्रकाश में आया.
अफसरनामा ब्यूरो
अयोध्या : अयोध्या के दशरथ मेडिकल कॉलेज (दर्शननगर) में गंभीर मरीजों पर शोध (रिसर्च) के उद्देश्य से खरीदी गई लाखों रुपये की शैम्पू और बॉडीवॉश की खेप उपयोग न होने के कारण एक्सपायर (बर्बाद) हो गई है। लगभग 20 लाख रुपये की लागत से खरीदे गए वाटरलेस (बिना पानी के) शैम्पू और बॉडीवॉश को मरीजों पर इस्तेमाल करने के बजाय गोदाम में डंप कर दिया गया, जिससे वे समय के साथ एक्सपायर हो गए। इन उत्पादों को बेड सोर (बेड पर रहने वाले मरीजों को होने वाले घाव) से पीड़ित मरीजों की स्वच्छता और शोध के लिए मंगाया गया था।
फरवरी 2025 में तत्कालीन प्रभारी प्राचार्य डॉ. सत्यजीत वर्मा के कार्यकाल में 2000 से अधिक पीस वाटरलेस बॉडीवॉश (499 रुपये प्रति पीस) और 2200 पीस से अधिक शैम्पू (449 रुपये प्रति पीस) कलेंस्टा इंटरनेशनल कंपनी से खरीदे गए थे। वर्तमान प्राचार्य डॉ. दिनेश सिंह मार्तोलिया ने इस मामले की जांच के लिए कमेटी गठित की है और खरीद प्रक्रिया की जांच की बात कही है। हैरानी की बात यह है कि जब दवाएं नहीं थीं, तब इन महंगे उत्पादों को मंगाया गया और जब ये एक्सपायर हो गए, तब मामला प्रकाश में आया।
राजर्षि दशरथ मेडिकल कालेज से संबद्ध अस्पताल में लंबे समय तक बिस्तर पर पड़े मरीजों को संक्रमण से बचाने के लिए होने वाला शोध अधूरा है। इसके लिए खरीदा गया लाखों रुपये का शैंपू और बॉडीवॉश गोदाम में पड़ा है। मौजूदा अधिकारी अब मरीजों को इसका लाभ पहुंचाने के बजाय इसकी खरीद पर ही सवाल उठा रहे हैं।
दरअसल अस्पताल के ऑर्थो, न्यूरो सर्जरी व आईसीयू में भर्ती मरीज लंबे समय तक बेड पर पड़े रहते हैं। नहाने धोने में अक्षम होने से उन्हें कई तरह का संक्रमण हो जाता है। खतरों से बचाने के लिए उनके लिए मेडिकल कॉलेज दर्शन नगर में एक शोध की कार्ययोजना तैयार की गई। इसके लिए 19.76 लाख रुपये से 2000 पीस जलरहित बॉडीवाश व 2200 पीस शैंपू खरीदा गया। नौ सितंबर, 2025 को आपूर्ति होने के बाद बाल रोग, न्यूरो सर्जरी, स्त्री एवं प्रसूति रोग विभागों में इसका उपयोग भी हुआ। नवंबर से शोध की प्रक्रिया शुरू हुई तो 16 जनवरी, 2026 को तत्कालीन प्राचार्य को हटा दिया गया, तब से शोध कार्य अधूरा है।


