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शासन की रीढ़ पीसीएस कैडर में सब ठीक नहीं, पदाधिकारी ने उठाए सवाल

#तीन साल से न एजीएम न कार्यकारिणी बैठक, लकवा ग्रस्त हो चुका है पीसीएस संघ.

#दिखाने का दांत रह गया पीसीएस संघ, काम धाम शून्य, संयुक्त सचिव ने माँगा अध्यक्ष व महासचिव का इस्तीफा.

टीबी सिंह
लखनऊ : उत्तर प्रदेश पीसीएस एसोसिएशन में बगावत का सिलसिला जारी है. संघ के एक ही बैच के दो पदाधिकारियों ने लगातार दूसरे दिन संघ के अध्यक्ष व महासचिव पर हमलावर रहे. एक दिन पहले बुधवार को संघ के आडिटर 2000 बैच के पीसीएस अधिकारी समीर वर्मा ने इसकी शुरुआत किया तो अगले दिन पीसीएस एसोसिएशन के संयुक्त सचिव कपिल सिंह ने एक लम्बा चौड़ा पत्र लिखकर सनसनी फैला दिया. कपिल सिंह ने वर्तमान पदाधिकारियों द्वारा संघ के एजीएम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा समय न दिए जाने की बात पर तमाम सवाल खड़े किये. इसके लिए पीसीएस एसोसिएशन के अध्यक्ष और महासचिव की निष्क्रियता को जिम्मेदार ठहराया है. सोशल मीडिया पर वायरल हुए पत्र में उन्होंने सवाल किया कि मुख्यमंत्री से समय के लिए कितना प्रयास किया गया इस बात की जानकारी कार्यकारिणी के सदस्यों के पास नहीं है. कितनी बार सीएम से समय के लिए संघ के अध्यक्ष और महासचिव द्वारा सम्बन्धित अधिकारियों को पत्र लिखे गए.

पत्र के अनुसार वर्तमान कार्यकारिणी द्वारा समय-समय पर भ्रम फैलाया जाता रहा है कि कार्यकारिणी से मिलने का समय वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा नहीं दिया गया जो कि असत्य व भ्रामक है. विगत 3 वर्षों में उत्तर प्रदेश पीसीएस एसोसिएशन का एजीएम न होने से कार्यकारिणी की अकर्मण्यता दृष्टिगत होती है. जानकारों के अनुसार विगत 3 वर्षों में संगठन के शीर्ष पद पर बैठे पदाधिकारी अपनी कैरियर और कुर्सी बचाने में ही लगे रहे और पीसीएस संघ व उसके संवर्ग के हितों की अनदेखी करते रहे. इसके अलावा पीसीएस संवर्ग के लिए चिन्हित पदों तथा नान आईएएस कैडर पदों पर नान पीसीएस अधिकारी तथा आईएएस अथवा अन्य सेवा के अधिकारियों की तैनाती समय-समय पर की जाती रही है जबकि पीसीएस संवर्ग में उक्त पद के लिए कई ऊर्जावान और प्रतिभाशाली छात्र अधिकारी उपलब्ध है. इस संदर्भ में भी वर्तमान कार्यकारिणी अध्यक्ष द्वारा कोई पत्र प्रत्यावेदन उचित माध्यम से शासन को प्रेषित नहीं किया गया जिससे ऊर्जावान अफसरों में निराशा उत्पन्न हुई. राज्य की सर्वश्रेष्ठ सेवा संवर्ग के संघ की कार्यकारिणी विशेषकर अध्यक्ष और महासचिव द्वारा शासन के वरिष्ठ अधिकारियों से समय न प्राप्त किया जाना केवल नेतृत्व हीनता को दृष्टिगत करता है.

पीसीएस संघ के आडिटर समीर वर्मा के बाद संयुक्त सचिव कपिल सिंह ने भी मौजूदा कार्यकारिणी पर तय मानक व स्तर के अनुरूप कार्य न करने का आरोप लगाया है. इनका मानना है कि कार्यकारिणी पीड़ित पीसीएस अफसरों के मुद्दों को उठाने में नाकाम रही है. ऐसे कई अवसर आए जब साथी अफसरों ने अपने मुद्दों को लेकर एसोसिएशन की तरफ उम्मीद के साथ देखा, पर एसोसिएशन ने इन सभी को अभी तक केवल मायूस किया है. वर्तमान अध्यक्ष और महासचिव की नेतृत्व क्षमता पर सवाल उठाते हुए संघ के पूर्व अध्यक्षों व महासचिवों के कामों की सराहना किया. पीसीएस एसोसिएशन के चर्चित अध्यक्ष बाबा हरदेव सिंह का जिक्र करते हुए उन्होंने लिखा है कि इसी पीसीएस कार्यकारी शाखा में अध्यक्ष और महासचिव के कई पदों को कई महानुभावों द्वारा सुशोभित किया गया है जो कि कर्तव्यनिष्ठ होने के साथ-साथ नेतृत्व क्षमता रखते हुए एक निर्भीक अधिकारी थे.


बाबा हरदेव सिंह का जिक्र करते हुए उन्होंने लिखा है कि उत्तर प्रदेश सिविल सेवा कार्यकारी शाखा में दो प्रकार के सदस्य आते हैं एक तहसीलदार संघ के प्रोन्नति पाए हुए तथा दूसरे उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग से सीधी भर्ती से चयनित होकर. हरदेव सिंह के कार्यकाल में पीसीएस अधिकारी संघ को मजबूत करने के लिए तहसीलदार से प्रोन्नति पाए हुए अधिकारियों के लिए दो सीट आरक्षित करने का प्रावधान किया गया था. बाबा हरदेव सिंह के इस पहल का सीधी भर्ती व प्रोन्नत होकर आये अधिकारियों द्वारा स्वागत किया गया था. लेकिन इन 3 वर्षों में वर्तमान कार्यकारिणी की निष्क्रियता के कारण तहसीलदार से प्रोन्नत पीसीएस अफसरों द्वारा संघ स्थापित करते हुए वर्तमान अध्यक्ष नंदलाल सिंह के नेतृत्व में अपना एजीएम कराने में सफल रहा. इस दिशा में भी वर्तमान अध्यक्ष और महासचिव द्वारा कोई कार्यवाही ठोस प्रयास नहीं किया गया जिसको लेकर पीसीएस संवर्ग के अधिकारियों द्वारा समय-समय पर असंतोष प्रकट किया गया है.

एक दिन पहले संघ के संयुक्त सचिव कपिल सिंह ने संघ के अध्यक्ष और महासचिव से इस्तीफा मांगकर तमाम सवाल खड़े किए थे. आज गुरुवार को एक पत्र लिखकर उन्होंने संगठन के पदाधिकारियों को अपनी पीड़ा से अवगत कराया. कपिल सिंह ने अपना उद्गार व्यक्त करते हुए लिखा है की विगत 3 वर्ष में एक बार भी कार्यकारिणी की बैठक आहूत नहीं की गई तथा कई प्रकरणों में कार्यकारिणी समिति के सदस्यों को भी सूचना नहीं दिया गया. वह यह भी बताने से नहीं चूके हैं कि मैं भी वर्तमान में कार्यकारिणी समिति में संयुक्त सचिव के पद पर हूँ लेकिन यदि पिछले 3 वर्षों में पीसीएस संघ के कार्यकलापों का मंथन किया जाए तो प्रतीत होता है कि जैसे उत्तर प्रदेश पीसीएस संघ शक्ति विहीन और अकर्मण्य हो चुका है.

पिछले 3 वर्षों में कोई एजीएम अध्यक्ष एवं महासचिव द्वारा नहीं बुलाई गई जबकि यह एजीएम हो जानी चाहिए थी ताकि नव आगंतुक पीसीएस अधिकारियों से परिचय स्थापित हो सके और संवर्ग के संभावित समस्याओं एवं उनके लंबित रहने के कारणों और उसके निदान की चर्चा की जा सके. सदस्यों के इस परिचय से काडर के जमीनी स्तर पर किए गए अच्छे प्रशासनिक प्रयोग और उसके परिणामों से संबंधित दूसरे सदस्यों को जानकारी होने से उसका लाभ उठाते और प्रयोग के तौर पर अपने जिले तथा क्षेत्र में इसका क्रियान्वयन करके शासन की नीतियों को गतिशील बनाने का काम ही करते. लेकिन यह दुख का विषय है अध्यक्ष एवं महासचिव द्वारा आहूत करने के लिए किसी विशिष्ट प्रयास से ना तो कार्य कराया गया और ना ही सेवा के अधिकारियों से शेयर किया गया, जिससे ऊर्जावान अधिकारियों में निराशाजनक स्थिति उत्पन्न हो गई है.

परंपराओं के अनुसार दो दिवसीय एजीएम आहूत किए जाने का प्रावधान है जिसमें प्रथम दिन प्रदेश के मुख्यमंत्री से मार्गदर्शन करने हेतु निवेदन किया जाता है लेकिन विगत 3 वर्षों में अध्यक्ष और सचिव द्वारा किसी पत्र के माध्यम से और ना ही किसी अपॉइंटमेंट हेतु कोई पत्राचार किया गया. इस संदर्भ में किसी तरह की कोई जानकारी कार्यकारी समिति के सदस्यों को नहीं दी गई. लोकतांत्रिक तानाशाही रवैए के साथ किसी भी ज्वलंत प्रश्न पर मूकदर्शक अथवा मौन धारण कर कार्यकारिणी द्वारा भ्रम फैलाया जा रहा है और इस वजह से संवर्ग के अधिकारियों में भ्रम की स्थिति है व पूरी कार्यकारिणी की विश्वसनीयता संदेह के घेरे में है. कार्यकारिणी के अध्यक्ष वह महासचिव एवं उपाध्यक्ष द्वारा मूकदर्शक बने रहना संघ की कार्यकारिणी की क्षमता एवं अधिकारियों की जवाबदेही ना होने का जीता जागता उदाहरण दर्शाता है.

कपिल सिंह ने अपने पत्र में 26 जनवरी को आहूत की गयी एजीएम को लेकर भी टिप्पड़ी किया और वर्तमान पदाधिकारियों से प्रश्न किये. उन्होंने लिखा कि महासचिव महोदय के माध्यम से यह जानकारी हुई है कि दिनांक 26 जनवरी 2020 को कार्यकारिणी की बैठक प्रस्तावित की गई है. जब पिछले 3 वर्षों में एजीएम आहूत करने के लिए कोई पत्राचार या कोई ठोस प्रयास वर्तमान अध्यक्ष एवं महासचिव द्वारा नहीं किया गया तो क्या 26 जनवरी 2020 की बैठक जो महासचिव द्वारा आहूत की गई है उसमें सर्वप्रथम एजेंडा अपनी अंतरात्मा की आवाज पर नैतिकता के आधार पर माननीय अध्यक्ष एवं महासचिव अपना त्याग पत्र प्रस्तुत करेंगे अथवा नहीं ?

यह बात सर्वप्रथम अध्यक्ष एवं महासचिव द्वारा स्पष्ट होनी चाहिए अन्यथा 3 वर्षों के नेतृत्व को स्वीकार करते हुए सामूहिक त्यागपत्र देते हुए तत्काल एजीएम आहूत कर नवीन कार्यकारिणी गठन किए जाने पर विचार किया जाना उचित प्रतीत होता है. आहूत बैठक चूंकि 26 जनवरी 2020 को है तथा 26 जनवरी संविधान दिवस के रूप में पूरे राष्ट्र में मनाया जाता है. तो ऐसे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय दिवस के दिन यह सुअवसर है कि आप अपनी अंतरात्मा की आवाज को सुनकर तथा आपके नेतृत्व में समस्त कार्यकारिणी तथा महासचिव उपाध्यक्ष कोषाधिकारी तथा अन्य सदस्य स्पष्ट करें कि क्या पिछले 3 वर्षों में एजीएम को आहूत कराने के लिए ईमानदारी से कोई प्रयास किया गया अथवा नहीं ? यदि नहीं तो तत्काल इसकी स्वीकार कर कार्यकारिणी को अवगत कराएं.

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