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गंगा यात्रा सराहनीय पर लोगों को है गोमती यात्रा का भी इन्तजार, सहायक नदियों की अनदेखी से अपेक्षित परिणामों में रहेगी कमी 

#गंगा यात्रा की तर्ज पर गोमती यात्रा की भी है जरूरत, गंगा की सहायक नदियों के पुनर्जीवन के मौलिक उपाय जरूरी. 

#अविरल व निर्मल गोमती पर “अफसरनामा” की रपट के बाद कुछ मुद्दों पर सरकारी मुहर पर कई अभी भी अछूते. 

राजेश तिवारी

लखनऊ : योगी सरकार की गंगा यात्रा को केंद्र की नमामि गंगा योजना से जोड़ गंगा को स्वच्छ रखने के लिए जनजागरण की बात स्वागत योग्य है. लेकिन उसकी सहायक नदियों को संरक्षित, अविरल व स्वच्छ किये बगैर यह संभव हो पाना कठिन है. आदि गंगा के नाम से पहचान रखने वाली धार्मिक व आर्थिक महत्त्व की गंगा की सहायक गोमती नदी ठोस योजनाओं व उसके क्रियान्वयन के अभाव में गन्दगी, अतिक्रमण का शिकार हो सूख रही है. उत्तर प्रदेश से ही निकल और यहीं पर खत्म होने वाली यह नदी आज अस्तित्व के संकट तक पहुँच चुकी है. गोमती के अलावा उत्तर प्रदेश की अन्य लुप्तप्राय हो चुकी सहायक नदियों सई, कथिना,सरायन,छोहा,सुखेता को भी जीवंत करना होगा ताकि गंगा में अविरल जल बना रह सके. अवध क्षेत्र में आस्था का प्रतीक गोमती नदी के धोपाप घाट से सटे जिले के निवासी और केंद्र की तर्ज पर सूबे में जलशक्ति मंत्रालय का गठन किये जाने के बाद योगी सरकार में राज्य मंत्री से प्रमोशन पा कैबिनेट मंत्री बने महेंद्र सिंह से प्रदेश की थाती कही जाने वाली गोमती के उद्धार की बड़ी उम्मीदें थीं लेकिन फ़िलहाल इसको धक्का लगा है.

ऐसे में गोमती नदी के लिए गंगा यात्रा की तर्ज पर गोमती यात्रा निकाल जन जागरण करने के साथ ही सरकारी तंत्र को भी जागृत करने की तरफ भी सरकार को ध्यान देने की जरूरत है. वैसे तो सरकार ने तमाम योजनायें बनाई हैं और “अफसरनामा” की खबर के बाद भूगर्भ जल विभाग भी चर्चा में आया. लेकिन गोमती नदी में जमी गाद और जलकुम्भी आदि हटाने के लिए ड्रेजिंग मशीन खरीदने की प्रक्रिया चर्चा में आने के बाद करीब चार माह से कोई अता पता नहीं है इन योजनाओं के क्रियान्वयन पर सवाल खड़े करता है. सरकार को गोमती यात्रा निकाल जुगाड़ टेक्नोलाजी की अभ्यस्त अफसरशाही को गोमती के उत्थान के लिए मौलिक कदम उठाने के लिए लगाना होगा.

गोमती यात्रा की जरूरत क्यों ?

गोमती को अविरल व निर्मल बनाने के लिए उसके जल संचयन व जल संरक्षण हेतु तात्कालिक उपाय के बजाय मौलिक उपाय करने की जरूरत है अन्यथा शारदा के उधार पानी से ही काम चलाना पड़ेगा. गंगा यात्रा का उद्देश्य भी बिना सहायक नदियों के उद्धार के संभव नहीं है. जलवायु परिवर्तन या ग्लोबल वार्मिंग के चलते या पेड़ों की अंधाधुंध कटाई के कारण पीलीभीत और लखीमपुर खीरी जिले के फॉरेस्ट कवर के घटने का परिणाम या फिर साठा धान की फसल के लिए गोमती के अंदर तक अवैध रूप से सोलर पंप लगाकर भू-जल का अनियंत्रित दोहन जिसके कारण गोमत ताल से निकलने के बाद कुछ ही दूरी के बाद गोमती आईसीयू में दाखिल हो जाती है. आज अपने उद्भव से 25 किलोमीटर की दूरी में पायी जाने वाली इसकी कई पतली धाराएं विलुप्त हो चुकी हैं. कभी स्वयं के श्रोतों से जलमग्न रहने वाली गोमती में आज जलस्रोतों के उपर गाद जामा होने के कारण बंद हो गये हैं इनको भी जीवित करने का उपाय ढूंढना चाहिए. यही वजह है कि डिफेंस एक्सपो जैसे विशिष्ट आयोजनों को सफल बनाने या गोमती को अविरल और निर्मल दिखाने के लिए जरूरत के मुताबिक फौरी उपाय के तौर पर शारदा नदी का पानी गोमती में छोड़कर काम चलाऊ व्यवस्था करनी पड़ रही है.

सरकारों द्वारा गोमती को लेकर जब कोई विशिष्ट आयोजन किया जाता रहा है तो अफसरशाही शारदा का पानी छोड़ कर उसको स्वच्छ, अविरल व निर्मल बना दिया जाता है. लेकिन सवाल यह है कि ठोस व मोलिक कदम उठाने के बजाय कब तक इस उधार के पानी से काम चलाएंगे. आस्था में अर्थव्यवस्था का सरकार का फार्मूला गंगा के साथ गोमती पर भी पूर्ण रूप से लागू होता है.

शारदा  के पानी से भरेगा गोमती का पेट तभी सफल होगा डिफेंस एक्सपो

5 फरवरी से एक्सपो की शुरुआत हो रही है इस दौरान लाइव शो में कोस्टल वार्ड के रोमांचक प्रदर्शन के दौरान गोमती में निगरानी वोट व लड़ाकू नावें उतारी जाएंगी. इसके लिए नदी में जिला प्रशासन द्वारा सिंचाई विभाग की मदद से शारदा नदी का पानी छोड़ा जाएगा. एक्सपो के दौरान किसी तरह की परेशानी ना आए इसके लिए लखीमपुर खीरी के पास से गोमती में पानी छोड़ा जाएगा.

नदी के पाट हो रहे अतिक्रमण का शिकार, राजस्व विभाग के पास इसके मापांकन की नहीं कोई ठोस योजना

आजम खान को रामपुर में नदी की जमीन हड़पने के आरोप में योगी सरकार के पोर्टल ने एंटी भूमाफिया घोषित कर दिया लेकिन गोमती नदी के पाट सिकुड़ने के कारण खाली हो रहे भू भाग को कब्जाने की खबरें आये दिन सुर्खियाँ बनती हैं पर सरकार का राजस्व विभाग इसके मापांकन के लिए कोई ठोस योजना अभी तक सामने नहीं ला सका है. कब्जाई गयी जमीन को मुक्त कराने या खाली पड़े भूभाग को भूजल स्तर बढाने, माइक्रो फोरेस्टिंग के लिए उपयोग में लाने या फिर नदी संरक्षण के लिए प्रयोग किये जाने की दिशा में कोई कारगर कदम नहीं उठाया गया. गोमती नदी के सिकुड़ने से खाली हुई जमीन को राजस्व विभाग द्वारा चिन्हित व उसका सीमांकन करा कर उस जमीन का उपयोग वृक्षारोपण से लेकर तमाम आर्थिक दृष्टि की योजनाओं में किया जा सकता है जोकि सरकार की मंशा के अनुरूप आस्था और अर्थव्यवस्था दोनों का पूरक होगा.

योगी की गोमती सफाई की ड्रेजर मशीन खरीदने की घोषणा का पता नहीं, अखिलेश सरकार में खरीदी गयी मशीन सरयू व घाघरा में लगाई गयी 

गोमती की सफाई के लिए अखिलेश सरकार में सिंचाई विभाग ने 4 ड्रेजर मशीन खरीदी थी जोकि बाद में सरयू और घाघरा में प्रयोग की जाने लगी. गोमती की सफाई के लिए बढ़ते दबाव और सीएम योगी द्वारा किये गए महा सफाई अभियान के बाद गोमती में जमी जलकुम्भीयों और गाद को हटाने के लिए ड्रेजिंग मशीन खरीदने की सुगबुगाहट नए सिरे से शुरू हुई, तो तत्कालीन डीएम के हस्तक्षेप से एक निजी बैंक के CSR फंड से लखनऊ नगर निगम द्वारा 02 ड्रेजर मशीन खरीदने की घोषणा की गई जो कि श्री शर्मा की विदाई के समय तक इस मशीन की खरीद की संख्या एक दर्जन से ज्यादा हुई और नगर आयुक्त इंद्रमणि त्रिपाठी को इसकी जिम्मेदारी दी गई. चूंकि ड्रेजर मशीन का बजट शासन से नहीं आना था इसलिए शासन ने भी कोई पूछताछ नहीं किया ऐसे में शर्मा जी गए और बात आई गयी हो गयी. फिलहाल गोमती की दशा में कोई सुधार नहीं वह अपनी दशा पर आंशु बहा रही है और डिफेंस एक्सपो के लिए सरकार को गोमती की अविरलता को दिखाने के लिय जलराशि शारदा नदी से उधार लेनी पड़ रही है.

आस्था के सहारे भी अर्थव्यवस्था को आगे बढाने में नहीं है गोमती का कोई जोड़

गोमती नदी उत्तर भारत में बहने वाली एक प्रमुख नदी है और इसकी लंबाई उद्गम से लेकर गंगा में समावेश तक लगभग 900 किमी है. यह प्रदेश के 11 जिलों से होकर गुजरती है. इसका उद्गम पीलीभीत जिले की तहसील माधौटान्डा के पास फुल्हर झील(गोमत ताल) से होता है और यह वाराणसी के निकट सैदपुर के पास कैथी नामक स्थान पर गंगा में मिल जाती है. आस्था के अनुसार भी इसका काफी महत्त्व है. ऐसे में यदि इसके जलश्रोतों को जीवंत कर पानी को आवरल व स्वच्छ करने के साथ ही घाटों को विकसित करने से लोगों की आस्था जहां और बलवती होगी तो वहीं इसका असर अर्थव्यवस्था पर भी पड़ेगा. सूबे के जिन 11 जिलों से होकर यह नदी गुजरती है वहां की जमीन काफी उपजाऊ है जहां पर व्यापारिक खेती आदि के माध्यम से लोगों का जीवन स्तर सुधर सकता है.

इसके अलावा इस नदी के कई घाटों का काफी पौराणिक महत्त्व है. पुराणों के अनुसार गोमती ब्रह्मर्षि वशिष्ठ की पुत्री हैं तथा एकादशी को इस नदी में स्नान करने से संपूर्ण पाप धुल जाते हैं. हिन्दू ग्रन्थ श्रीमद्भागवत गीता के अनुसार गोमती भारत की उन पवित्र नदियों में से है जो मोक्ष प्राप्ति का मार्ग हैं. पौराणिक मान्यता ये भी है कि रावण वध के पश्चात “ब्रह्महत्या” के पाप से मुक्ति पाने के लिये भगवान श्री राम ने भी अपने गुरु महर्षि वशिष्ठ के आदेशानुसार इसी पवित्र पावन आदि-गंगा गोमती नदी में स्नान किया था एवं अपने धनुष को भी यहीं पर धोया था और स्वयं को ब्राह्मण की हत्या के पाप से मुक्त किया था. आज यह स्थान सुल्तानपुर जिले की लम्भुआ तहसील में स्थित है एवं धोपाप नाम से जाना जाता है. लोगों का मानना है कि जो भी व्यक्ति गंगा दशहरा के अवसर पर यहाँ स्नान करता है, उसके सभी पाप आदिगंगा गोमती नदी में धुल जाते हैं. सम्पूर्ण अवध में गोमती तट पर स्थित “धोपाप” के महत्व को कुछ इस तरह से समझाया गया है कि ग्रहणे को काशी, मकरे प्रयाग, चैत्र नवमी को अयोध्या, तो दशहरा धोपाप.

तो क्या अब गोमती संरक्षण के लिए होगा ठोस उपाय या फिर पहले की ही तरह रंग-रोगन !

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दस्तक-2 यानी संचारी रोग की रोकथाम की तर्ज पर गोमती संरक्षण का कार्य क्यूँ नहीं?

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भूगर्भ जल से जलमग्न रहने वाली गोमती पर अस्तित्व का संकट, कहीं सरस्वती नदी न बन जाय गोमती

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