यूपी में कानून के रखवाले बिना भत्ते पेट पालें

#योगीराज में न्यायिक कार्य करने वाले अधिकारी भत्तों से वंचित.

#नियुक्ति विभाग दबाये बैठा है अफसरों के भत्ते की फाईल.

#तमाम लिखापढ़ी के बाद भी टरका रही है सरकार.

अफसरनामा ब्यूरो

लखनऊ : योगीराज के रंग ढंग निराले हैं. नौकरशाही को संभालने और सही तैनाती में बुरी तरह नाकाम योगी सरकार में अजीबो-गरीब कारनामें देखने को मिल रहे हैं. न्यायिक कार्यों को चुस्त-दुरुस्त करने के नाम पर बड़ी तादाद में राज्य सेवा के अफसरों की तैनाती तो कर दी गयी पर इस सेवा के बदले उन्हें अनुमन्य भत्ते आदि देने में योगी सरकार हीला-हवाली कर रही है.

 

हालांकि न्यायिक कार्य में रत इन अफसरों को वेतन का दस फीसदी न्यायिक भत्ता और पुस्तकालय व्यय के तौर पर 500 रुपये प्रतिमाह दिए जाने के स्पष्ट निर्देश हैं पर सरकारी अफसर खासकर नियुक्ति विभाग इस मामले में कान में तेल डाल कर बैठा है. वैसे इस शासन में नियुक्ति विभाग का यह कोई नया कारनामा नहीं है. अभी हाल ही में लखनऊ नगर निगम में एक साथ और एक ही बैच के एक अधिकारी को अपने ही साथी का मातहत बना दिया है.

 

आलम यह है कि राजस्व परिषद के आयुक्त एवं सचिव के पत्रों पर भी कोई सुनवाई नही हो रही है. राजस्व न्यायिक अधिकारियों के इन पदों पर तैनात दर्जनों की तादाद में अफसर इस सुविधा से वंचित हैं. इस समय योगी राज में बड़ी संख्या में अपर आयुक्त न्यायिक व अन्य पदों पर जिनमें तहसीलदार से लेकर एसडीएम तक शामिल हैं, इन पदों पर तैनात हैं.

सबसे अजब बात तो यह है कि इस मामले में राज्यपाल के आदेश साफ हैं और यह पत्र सरकार के आला अधिकारियों के संज्ञान में बार-बार पहुंचाया है. बीते दो सालों से इस पूरे मामले में सिर्फ फाइलें दौड़ रही हैं और कारवाई सिफर है.

 

 

वाह रे योगी का नियुक्ति विभाग, लखनऊ नगर निगम में बैचमेट को ही बना दिया मातहत

 

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