Free songs
BREAKING

प्रेसटूल खरीद मे माल काटा मौत बांटी बीएस तिवारी ने

#मौत, मुकदमे और इन्क्वायरी सब पर भारी बीएस तिवारी.

#प्रेसटूल की जांच के मामले में लीपापोती किया पूर्व एमडी अमित गुप्ता ने.

#आश्चर्यजनक  यह कि घोटाले के इन प्रकरणों पर विभाग के बडबोले मंत्री और ईमानदार चेयरमैन दोनों चुप हैं.

#बीएस तिवारी की जांच उस व्यक्ति को सौंपा जिसकी CR लिखते हैं खुद बीएस तिवारी.  

#प्रेस टूल के फर्जीवाड़े से बचने और कूटरचित द्स्ताबेजों की तैयारी से बीएस तिवारी आज छुट्टी के दिन हरदुआगंज अपने करीबी GM से मुलाक़ात करने गया. 

अफसरनामा ब्यूरो 

लखनऊ : पिछले दिनों “अफसरनामा” ने बीएस तिवारी के कारनामों में एक प्रेस टूल को गलत तरीके से फायदा पहुंचाने की खबर चलाई थी जिसमें बीएस तिवारी ने एक काम के लिए एक ही जगह गाजियाबाद की 3 फर्म से निविदा मंगाकर  एक को जबरदस्ती खारिज कर दिया था जबकि दूसरे को उसी आधार पर प्रेस टूल का कम्पटीटर बना कर खड़ा कर दिया था ताकि एक तरफा निविदा के लिए फाइल को लखनऊ निदेशालय ना भेजना पड़े और खुद के स्तर पर मामले को मैनेज कर प्रेस टूल को काम दिया जा सके.

“अफसरनामा” द्वारा खबर चलाने के बाद जब सरकार व जिम्मेदार अफसरों की निद्रा टूटी तो वे पूरे प्रकरण की लीपापोती में लग गये. खबर चलने के बाद पूर्व प्रबंध निदेशक अमित गुप्ता ने प्रेस टूल के प्रकरण की जांच के लिए एक अधिशासी अभियंता स्तर का अधिकारी नियुक्त कर जांच सौंप दिया. यह महोदय यह भी भूल गए कि उन्हीं की सरकार जिसमें वो प्रबंध निदेशक बनाए गए उसने ही एक शासनादेश जारी किया था कि जिस अधिकारी अथवा कर्मचारी पर आरोप लगा है उसकी जांच उससे एक पद सीनियर का अधिकारी करेगा.

ऐसे में विद्युत उत्पादन निगम के निदेशक तकनीकी बीएस तिवारी की जांच एक अधिशासी अभियंता को दिया जाना खुद में एक सवाल खड़ा करता है. सवाल यह भी है कि जिस विद्युत अभियंता की चरित्र पंजिका पर उत्पादन निगम के निदेशक तकनीकी बीएस तिवारी को नोट लिखने का अधिकार हो वह अधिशासी अभियंता कैसे अपने निदेशक बीएस तिवारी की जांच स्वतंत्र व निष्पक्ष रुप से कर पाएगा. अगर ऐसा संभव होता तो शासन को वह शासनादेश जारी करने की जरूरत ही क्यों पड़ती कि आरोपी अफसर की जांच उससे एक पद सीनियर का अधिकारी करेगा. क्या इतनी सी साधारण बात पूर्व प्रबंध निदेशक अमित गुप्ता के समझ में नहीं आई और उन्होंने पूरे प्रकरण को निपटाने के लिहाज से जांच को पिछली सरकार में बिजली विभाग के चेयरमैन रहे संजय अग्रवाल की तरह एक निचले स्तर के अधिकारी जो की दोषी अफसर के कई पायदान नीचे है को जांच सौंप दिया.

यह पूरा प्रकरण दर्शाता है की पिछली सरकार में जिस तरह से जंगलराज कायम था कमोवेश वही स्थिति योगीराज में उनके बिजली विभाग में भी कायम है, जहां जांच के नाम पर केवल व केवल छलावा और धोखा देने का काम किया जा रहा है. सवाल यह भी है कि इतने इतने गंभीर मुद्दों पर क्या चेयरमैन आलोक कुमार व विभागीय मंत्री श्रीकांत शर्मा की नजर नहीं पड़ रही या फिर पिछले सरकार के चेयरमैन और मंत्री की तरह यह भी आंखें मूंदे बैठे हैं. फिलहाल इनकी कार्यशैली और उनकी चुप्पी पूरे प्रकरण को लेकर यही साबित करता है कि बिजली विभाग के लिए अखिलेश राज हो या योगीराज कोई फर्क नहीं पड़ता, यहाँ केवल बीएस तिवारी जैसे अफसरों का राज चलता है इसीलिए पिछली सरकार से वीएस तिवारी का राज अभी तक कायम है.

बताते चलें कि हरदुआगंज में बीएस तिवारी का भ्रष्टाचार का एक और खुलासा आरटीआई के माध्यम से हुआ. मिली  जानकारी के अनुसार तत्कालीन परियोजना प्रबंधक बीएस तिवारी ने हरदुआगंज स्टेशन में टरबाइन मेंटेनेंस के लिए अपनी चहेती कंपनियों को मेंटेनेंस का काम देने के लिए टेंडर में खेल किया और अयोग्य कंपनियों को भी योग्य ठहराते हुए अपने स्तर से 15 हजार के काम को 16 लाख में कराया.

बीएस तिवारी ने टेंडर को पूल किया जा सके इसके लिए टरबाईन मेंटिनेंस के लिए ई टेंडर न करके अल्प निविदा कराया ताकि अपनी मनपसंद कंपनियों को अपने मनपसंद रेट पर टेंडर दिया जा सके. इस टेंडर की प्रक्रिया में टेंडर के मूल्य के निर्धारण का जो फार्मूला निर्धारित किया गया है उसका भी अनुपालन नहीं किया गया और आर्बिट्रेरी (KUTUA) तरीके से टर्बाइन मेंटिनेंस के काम के लिए 16 लाख लागत निर्धारित करके अल्प निविदा (लिफाफा) मांगा लिया. इसके अलावा प्रस्तावित एस्टीमेट पर वित्त नियंत्रक का साईन जरूरी होता है उसको भी नहीं कराया बीएस तिवारी ने क्यूंकि उसको डर था कि कहीं वित्त नियंत्रक इसपर कोई आपत्ति न लगा दे और पूरा मामला लखनऊ स्थित मुख्यालय भेजना पड़े.

यही नहीं 10 लाख से उपर के काम को ई टेंडरिंग के जरिये दिए जाने के नियम को तोड़ा और अल्प निविदा यानी फिजिकल टेंडर निकालने से पहले अपने से उपर के अधिकारी से अनुमोदन लेना पड़ता है और इसके लिए फाईल को बीएस तिवारी को लखनऊ स्थित मुख्यालय भेजना पड़ता जिससे उसके इस खेल को उजागर होने का ख़तरा था.

इतना ही नहीं तब के परियोजना प्रमुख और अब जुगाड़ के बल से निदेशक उत्पादन निगम की कुर्सी पर बैठे गबन के खिलाड़ी बीएस तिवारी के इस अल्पकालीन निविदा में भाग लेने वाली कुल तीन कंपनियां मेसर्स प्रेस टूल गाजियबाद, रोप इंडस्ट्रीज गाजियाबाद व मेसर्स शेप मशीन एक ही जगह गाजियाबाद की ही रहीं. आरटीआई से मिली जानकारी के अनुसार अल्प निविदा में भाग लेने वाली इन तीनों कंपनियों में केवल एक मेसर्स प्रेस टूल ही योग्यता पूरी कर सकती थी बाकी दोनों का अनुभव प्रमाण पत्र सप्लाई का लगा था. इन दोनों कंपनियों ने अपने अनुभव प्रमाण पत्र के लिए बीएचईएल (BHEL) को सप्लाई की गई मटेरियल की स्लिप लगाई, जब कि काम मेंटेनेंस का था.

प्रेस टूल की कहानी प्रमाण सहित पढने के लिए नीचे दिए लिंक पर क्लिक करें……… 

मौत का सौदागर, गबन का खिलाड़ी, बीएस तिवारी

मौत का सौदागर, गबन का खिलाड़ी, बीएस तिवारी

 

afsarnama
Loading...

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*

Time limit is exhausted. Please reload the CAPTCHA.

Scroll To Top