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मित्तल की बीमारी से बेपटरी हुई वित्त विभाग की प्रशासनिक व्यवस्था, आंतरिक लेखा में चल रहा प्रमोशन में खेल

#मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विभागों में जल्द प्रोन्नति के आदेश की उड़ी धज्जियां.
#आंतरिक लेखा परीक्षा निदेशालय में A.A.O. के लिए डी. पी. सी. एकबार फिर टली.
#लेखाकारों की पदोन्नति का मामला 2 साल से है लम्बित, जबकि इनके एक ग्रेड उपर और एक ग्रेड नीचे के पदों पर हो चुकी है पदोन्नति.

अफसरनामा ब्यूरो

लखनऊ : शासन सत्ता की हनक के होने या न होने का सबब जानना हो तो सूबे के अपर मुख्य सचिव वित्त संजीव मित्तल के बीमार पड़ जाने के बाद उनके पद का अतिरिक्त प्रभार प्रमुख सचिव, एस राधा चौहान को सौंपे जाने पर अधीनस्थों के बेतकल्लुफ़ होने से समझा जा सकता है. ताजा मामला निदेशक, आंतरिक लेखा के अधीन Accountant से A.A.O की होने वाली डीपीसी से जुड़ा है. जिसकी डेट एक बार फिर से आगे बढ़ाकर 29 अक्टूबर कर दी गयी है. इसका कारण आंतरिक लेखा की कुछ आंतरिक तैयारी नही हो पाना बताया जा रहा है. बताते चलें कि यह डीपीसी 2 वर्ष की रिक्तियों के विरुद्ध प्रस्तावित की गई थी जो कि लंबे अरसे से लम्बित है और डेट निर्धारित करके भी कई बार टाली जा चुकी है.

*आखिर क्या वजह है जो इस DPC को लम्बित किया जा रहा है? जबकि इसे एक ग्रेड उपर और एक ग्रेड नीचे की DPC काफी पहले ही पूरी हो चुकी है.

जानकारों की माने तो डीपीसी लटकाने के इस खेल में निदेशालय पर बैठे कार्मिकों और मालदार विभागों में कई दशकों से जमे लेखाकारों का एक गुट काफी सक्रिय है और इस डीपीसी की प्रक्रिया को बाधित कर रहा है. जिसके चलते तारीख तय होने के बाद भी तमाम हथकंडे अपनाते हुए प्रक्रियात्मक कमी बता कर अगली तारीख तय कर दी जा रही है.

बताते चलें कि सहायक लेखाकार से लेखाकार की डीपीसी पिछले माह हो चुकी है. अब लेखाकार से सहायक लेखाधिकारी के लगभग सौ पदों पर डीपीसी होनी है जोकि लम्बित चल रही है. इससे उपर सहायक लेखाधिकारी से वित्त एवं लेखाधिकारी के पद पर भी बीते 19 अक्टूबर को लोकसेवा आयोग के स्तर से डीपीसी की जा चुकी है. मजे की बात है कि जो डीपीसी हो चुकी है उसका मिनट अभी तक सार्वजनिक नहीं हुआ है. और बीच के पदों पर लम्बित डीपीसी कराने मन हीलाहवाली का दौर जारी है. बताते चलें कि वित्त लेखाधिकारी (ग्रेड पे 5400) से उपर के वित्त सेवा के अधिकारियों की डीपीसी आनन्-फानन में शासन स्तर से कर दी जाती है, तो क्या कारण है कि सूबे के कृषि, उद्यान, पेंशन, खाद्य रसद, माध्यमिक शिक्षा तथा ग्राम विकास जैसे महत्वपूर्ण विभागों में दो दशक से भी अधिक समय से जमे और अपने मलाईदार पटलों पर बरकरार लेखाकारों की प्रोन्नति सहायक लेखाधिकारी के पद पर होने में तमाम तरह की अडचने आ रही हैं.

*सीएम योगी के निर्देश और सरकार की मंशा को दिखाया जा रहा ठेंगा

मुख्यमंत्री योगी के स्वच्छ प्रशासन और पारदर्शी सिस्टम का इससे बड़ा मजाक और क्या हो सकता है कि इस एक ग्रेड के प्रमोशन को रोकने के लिए पूरा एक सिंडिकेट सक्रिय है. मालदार जगहों पर बैठे लेखाकार जिनको कि प्रमोशन पाने पर अपनी वर्तमान सीट के खाली होने के बाद ऊपरी कमाई के बंद होने का भय है, इनमें शामिल बताये जा रहे हैं और अन्य को दो सालों से प्रमोशन से वंचित रखने के लिए तन, मन, धन से लगे हुए हैं. आरोप तो यह भी लगाये जा रहे हैं कि खुद निदेशक आंतरिक लेखा जोकि डीपीसी कमेटी की चेयरपर्सन हैं यह सब जानते हुए मूकदर्शक बन इन सबकी मंशा को अंजाम तक पहुंचाने हेतु ढिलाई बरत रही हैं.

*आंतरिक लेखा में खिलाड़ी खड़ी कर रहे सरकार के लिए मुसीबत तो विपक्ष को मिलेगा मौक़ा

ऐसे में अपने से एक ग्रेड ऊपर और एक ग्रेड नीचे के लोगों के प्रमोशन पाने और निदेशक आंतरिक लेखा की इस उदासीनता के चलते प्रमोशन से वंचित रहने वाले बड़ी संख्या में लेखाकार काफी चिंतित हैं. और यदि वह अपनी दो साल से लम्बित डीपीसी की मांग को लेकर सड़क पर उतर प्रदर्शन करना शुरू करेंगे तो सरकार के लिए दिक्कत तो विपक्ष को भी एक मौका मिलेगा.

*आंतरिक लेखा निदेशालय के गठन पर भी उठ रहे सवाल, निदेशक आन्तरिक लेखा ने 15 दिन में डीपीसी कराने की बात कही थी, पर नहीं हुई पूरी मिली डेट

प्रमोशन के लंबित करने के इस खेल से आंतरिक लेखा निदेशालय के गठन पर भी सवाल उठने लगे हैं. कार्मिकों की समस्याओं को सुलझाने के लिए गठित किये गए इस निदेशालय की अभी की कार्यशैली से कर्मियों की समस्या को सुलझाने के बजाय उलझाया ही जा रहा है. इसके पहले गत माह निदेशक आंतरिक लेखा परीक्षा से बातचीत में उनके द्वारा 15 दिन में डीपीसी किये जाने की बात भी कही गई थी. लेकिन जानकारों की मानें तो मामला इतना सीधा नहीं है. इसके कई पहलू हैं जिनकी तह तक जाने की जरूरत है.

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