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लखनऊ : इलाहाबाद हाईकोर्ट की आद्योगिक इकाईयों पर सख्त टिपण्णी, कहा कंपनियों की तिजोरी से मजदूरों की भूख बड़ी. न्यायमूर्ति सरल श्रीवास्तव व सुधांशु चौहान की खंडपीठ ने 30 से अधिक नामचीन कंपनियों की याचिकाओं को खारिज कर यह टिपण्णी किया. कोर्ट ने कहा कि मजदूरों के हक़ में बने कानूनों को सिर्फ इसलिए रद्द नहीं किया जा सकता कि कंपनी पर आर्थिक बोझ बढेगा. बताते चलें कि केंद्र सरकार ने 2015 में कानून बदलकर बोनस पात्रता की सीमा 10000 से बढ़कर 21000 और गणना की सीमा 3500 बढाकर 7000 कर दिया था. इस संशोधन से अधिक वेतन पाने वाले कर्मचारी भी बोनस के अधिकारी हो गए. इसके खिलाफ कंपनियों ने यह कहते हुए चुनौती दी थी कि पिछले साल की बैलेंसशीट बंद हो चुकी है. पिछली तारीख से भुगतान करने पर करोड़ों का बोझ पड़ेगा. इसपर कोर्ट ने उक्त टिपण्णी करते हुए कहा कि बोनस दान नहीं, श्रमिकों का अधिकार है.

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