लखनऊ : यूपी की ट्रेनों में तैनात लोको पायलट ट्रेन ड्यूटी के बजाय कार्यालयों में की ड्यूटी को दे रहे तरजीह, खासकर नए कार्यालयों में निभा रहे सहायक की भूमिका. राजधानी लखनऊ के 125 से ज्यादा लोको पायलट अपनी मूल तैनाती पर नहीं. इनमें से कई लोको पायलट रेलवे के बड़े अफसरों के यहाँ दे रहे अपनी सेवायें. जबकि एक लोको पायलट को हफ्ते में 01 दिन (30 घंटे) का मिलता है रेस्ट, ट्रेन लेकर पहुँचने के बाद 6 से 8 घंटे और मुख्यालय से लौटने के बाद 16 घंटे का मिलता है रेस्ट, साल में करीब 50 छुट्टियां मिलने का है प्रावधान फिर भी इससे रहे हैं बच. खबरों के मुताबिक लखनऊ मंडल की 14 लाबी में कुल 2230 लोको पायलट की है तैनाती, लेकिन प्रमुख लाबियों में पद से ज्यादा तैनाती. लखनऊ में 701 पद के सापेक्ष 785 तैनात, अयोध्या 209 पद के सापेक्ष 235 तैनात, सुल्तानपुर 225 पद के सापेक्ष 257 तैनात और वाराणसी में 526 पद के सापेक्ष 528 लोको पायलट तैनात हैं. जबकि मंडल की 10 लाबी ऐसी हैं जहाँ जरुरी तैनाती से कम तैनात हैं. इनमें जौनपुर में जरूरी 45 पदों में से 35 खाली, प्रयागराज में सभी 37 पद खाली, टांडा थर्मल के सभी 07 पद खाली, रायबरेली में 189 की जगह 170 तैनात, पंडित दींनदयाल उपाध्याय (मुगलसराय) में 60 में से 32 पद खाली, गौरीगंज के सभी 03 पद खाली, फूलपुर के सभी 10 पद खाली और ऊंचाहार के सभी 09 पद खाली हैं. चिंताजनक स्थिति यह है कि इन प्रमुख लाबी में अतिरिक्त तैनाती है जबकि फील्ड में लोको पायलट की कमी है. ऐसा रेल सञ्चालन की चुनातियों से बचने के लिए हो रहा है.

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