लखनऊ : राजधानी लखनऊ में गैस की किल्लत, पर जायके की आंच देशी संशाधनों से अभी ज़िंदा है. लखनऊ के नेतराम, मधुरिमा, रत्तिलाल, लक्ष्मी पूड़ी भंडार, वेज कार्नर और रायल कैफे जैसे प्रतिष्ठान भट्ठी, कोयले और लकड़ी जैसे पारम्परिक तरीके से आग जलाकर बचा रहे अपना पारम्परिक प्रतिष्ठान. मेस, इफ्तारी का खाना अब चूल्हे पर हुआ निर्भर.

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