
अफसरनामा ब्यरो
अयोध्या : मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम की नगरी अयोध्या के मेडिकल कालेज में अंधेरगर्दी चल रही है. कालेज के प्राचार्य डॉ दिनेश कुमार मर्तोलिया और प्रकरण के समय चार्ज में रहे डॉ दिनेश कुमार सिंह ने अपनी प्रशासनिक मर्यादा का त्याग करके अपनी चहेती फार्मों को उपकृत करने में लगे हैं. इसके लिए वह दवा खरीद के मानकों, मरीज हित और बिजली विभाग के सुरक्षा मानकों से भी समझौता करने में लगे हैं. ताजा प्रकरण प्रयागराज से आये बिना बिल, वाउचर व गुणवत्ता सर्टिफिकेट के दवा के 139 डिब्बे और इसके मरीजों में वितरण को लेकर छिड़े विवाद से सम्बंधित है. इसके आलावा इन दोनों की ही सरपरस्ती में कालेज के ही अन्दर पावर स्टेशन के नजदीक बिना अनुमति कैंटीन के लिए किये कराया जा रहे स्थायी निर्माण को रोकने के लिए JE के शिकायती पत्र का संज्ञान लेते हुए चार्ज में रहे तत्कालीन सीएमएस डॉ बागिश कुमार मिश्र, अयोध्या ने पुलिस के माध्यम से निर्माण कार्य रुकवाया.
मुख्यमंत्री योगी की नाक के नीचे रामनगरी अयोध्या में मेडिकल कालेज में मनमानेपन का खुला खेल फर्रुखाबादी चल रहा है. गुणवत्ता को धता बताते हुए बिना जरूरत दवाओं की खरीद से लेकर अवैध रूप से कैंटीन का निर्माण सब कुछ भगवान राम के पिता के नाम पर बने राजर्षि दशरथ राज्य चिकित्सा महाविद्यालय अयोध्या में हो रहा है. इन अनियमितताओं से बेखौफ अयोध्या मेडिकल कालेज के कार्यवाहक प्राचार्य डॉ दिनेश कुमार मर्तोलिया और प्रकरण के समय चार्ज में रहे डॉ दिनेश कुमार सिंह इस कदर बेलगाम हैं कि गुणवत्ता सर्टिफिकेट व जरूरी दस्तावेज मांगने पर स्टोर फार्मेसिस्ट को ही धमका कर दबाव में खंडन लिखवा ले रहे हैं. प्रकरण के उच्च अधिकारियों के संज्ञान में आने के बाद बेअंदाज प्राचार्य ने प्रतिनियुक्ति पर आए फार्मासिस्ट को ही कार्यमुक्ति का आदेश थमा दिया है. वैसे तो डॉ दिनेश कुमार सिंह का पूरा कार्यकाल ही विवादों में रहा है. अब एक बार फिर से सरकार को GST का चूना लगाने के साथ ही मरीजों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ करने की तैयारी है.

मेडिकल कालेज में बिना बिल-बाउचर व गुणवत्ता प्रमाण पत्र से सप्लाई की गयी दवा, GST चोरी समेत मरीजों की सेहत से खिलवाड़, फार्मासिस्ट केन्द्रीय औषधि भंडार के पत्र से हुआ खुलासा
प्रयागराज से कुल 04 शिफ्ट में आये बिना बिल, वाउचर व गुणवत्ता सर्टिफिकेट के दवा के 139 डिब्बों को प्रभारी अधिकारी (स्टोर) ने प्राचार्य का हवाला देकर मौखिक रूप से स्टोर फार्मेसिस्ट को इन डिब्बों को दवा स्टोर में दबाव बनाते हुए रखने एवं मरीजों में वितरित करने को कहा और इसके लिए जरूरी बिल-वाउचर, गुणवत्ता सर्टिफिकेट की मांग किये जाने पर बाद में उपलब्ध कराने की बात कही. इसके बाद दूसरी खेप आने पर जब बिल-वाउचर, गुणवत्ता सर्टिफिकेट जैसे जरुरी दस्तावेज की मांग की गयी जिसके आधार पर दवाओं को स्टोर में जमा किया जाता और मरीजों में वितरित किया जाता, फार्मासिस्ट को फिर से इन कागजों को बाद में दिए जाने का आश्वासन प्रभारी अधिकारी (स्टोर) द्वारा दिया गया. इस दौरान स्टोर फार्मेसिस्ट ने बिना जरुरी दस्तावेज के आये दवा के इन डिब्बों को दवा के स्टोर रूम में न रखकर पुरानी बिल्डिंग के रूम नंबर 10 में रखवा दिया जोकि आज भी वहीँ रखा बताया जा रहा है.
इस तरह प्रयागराज से सप्लाई हुई इस दवा के कागज देने में प्रभारी अधिकारी (स्टोर) द्वारा हीला-हवाली को देखते हुए स्टोर फार्मेसिस्ट योगेश मिश्र ने इन दवाओं को स्टोर में रखने के लिए आवश्यक दस्तावेजों की प्रभारी अधिकारी से 27 फरवरी 2026 को लिखित में मांग करते हुए, प्रतिलिपि प्राचार्य आदि को दे दिया. स्टोर फार्मेसिस्ट योगेश मिश्र के लिखित में जरुरी कागजों की मांग प्राचार्य को नागवार गुजरी और अपनी गर्दन फंसती देख कार्यवाहक प्राचार्य ने 28 फरवरी 2026 को स्टोर फार्मेसिस्ट योगेश मिश्र को दफ्तर में बुलाकर अपने बचत के लिए जबरदस्ती खंडन पत्र लिखवाया और करीब शाम 07 बजे दफ्तर से छोड़ा.

स्टोर फार्मेसिस्ट योगेश मिश्र शाम 07 बजे प्राचार्य के दफ्तर से निकल और दबाव से उबरने के बाद अपने मूल विभाग के अधिकारी अपरनिदेशक चिकित्सा स्वास्थ्य, अयोध्या मंडल को पूरे घटनाक्रम को उसी दिन ईमेल के माध्यम से अवगत कराया. जिसमें स्टोर फार्मेसिस्ट ने प्राचार्य द्वारा दबाव डालकर पत्र लिखवाने और बिना प्राचार्य के कार्यालय से क्रय आदेश जारी हुए दवाओं की खरीद का जिक्र आदि किया.

उक्त प्रकरण के उजागर होने और उच्च अधिकारीयों के संज्ञान में आने पर अपनी गर्दन फंसती देख शुरू हुआ बचने-बचाने का खेल
ऐसे में प्राचार्य ने मामले की लीपापोती करने व अपनी गर्दन बचाने के लिए वर्तमान स्टोर फार्मेसिस्ट योगेश मिश्र को उसकी कुर्सी से हटाना जरूरी समझा ताकि अपने मनमाफिक लोगों को उक्त कुर्सी पर बैठा कर अपने बचत के लिए जरूरी कागजों से खेल कर सके. इसके लिए उसने 06 मार्च को प्रतिनियुक्ति पर आये स्टोर फार्मेसिस्ट योगेश मिश्र को कार्यमुक्ति का आदेश थमा दिया. दरअसल, स्वास्थ्य विभाग में दवाओं की खरीद की एक प्रक्रिया है. जिसमें पहले सम्बंधित दवा के स्टोर फार्मेसिस्ट द्वारा डिमांड लेटर प्राचार्य को दिया जाता है. फिर प्राचार्य कार्यालय से क्रय आदेश जारी होने के बाद ही दवा की खरीद होती है. उक्त में इस प्रक्रिया का पालन नहीं हुआ है. सप्लाई से आयी दवा को “स्टाक रजिस्टर” में अपडेट करने के पहले बिल, वाउचर, गुणवत्ता रिपोर्ट और किसके आर्डर से यह आया है इसकी कापी चाहिए होती है.

मिली जानकारी के मुताबिक पूरे प्रकरण को यदि देखा जाये तो इसमें कालेज के प्रधानाचार्य और सम्बंधित फर्मों से सांठगाँठ का पूरा खेल स्पष्ट है. वजह भी साफ़ है कि जब फार्मेसिस्ट ने इसके सम्बंधित कोई डिमांड लेटर नहीं दिया तो यह दवा मेडिकल कालेज में आयी कैसे? और अगर आयी भी तो फार्मेसिस्ट द्वारा इन दवाओं को “दवा स्टोर” में क्यों नहीं रखा गया? साथ ही बड़ा सवाल यह कि स्टोर में रखने के लिए जरुरी दस्तावेज देने में हीला हवाली क्यों हुई? इसके अलावा यदि दवा की खरीद नियमसंगत तरीके से हुई है तो उन जरूरी कागजों को सामने लाकर पारदर्शिता को स्पष्ट क्यों नहीं किया जाता?
इसके आलावा यदि पारदर्शिता सामने लाकर स्टोर फार्मेसिस्ट को कार्यमुक्ति का आदेश दिया जाता तब भी ठीक था, लेकिन प्राचार्य द्वारा स्टोर फार्मेसिस्ट को जारी किये गए कार्यमुक्ति के आदेश की टाईमिंग आदि पर भी बड़ा सवाल है? बिना बिल-वाउचर व गुणवत्ता सर्टिफिकेट के कार्यवाहक प्राचार्य की मिलीभगत से मरीजों को देने के लिए नियमविरुद्ध तरीके से मंगाई जा रही इस दवा से सरकार को होने वाले GST नुकसान का आखिर जिम्मेदार कौन है? जबकि योगी सरकार कर संग्रह और राजस्व वसूली बढाने के साथ ही नियम संगत काम करने की प्रतिबद्ध है.
मेडिकल कालेज में तैनात बिजली विभाग के जेई से नहीं ली कोई अनुमति और कराने लगे कैंटीन का स्थायी निर्माण, जेई की लिखित शिकायत पर सीएमएस ने सम्बंधित पुलिस से रुकवाया काम, प्राचार्य यहाँ भी रहे चुप
राजर्षि दशरथ मेडिकल कालेज में प्रतिनियुक्ति पर तैनात बिजली का काम देख रहे जेई की बगैर किसी अनुमति कराया जा रहा था स्थायी कैंटीन का निर्माण, जबकि उसके नीचे अंडरग्राउनड पावर केबल गयी है. इस तरह बिजली विभाग के सुरक्षा मानकों की हो रही थी अनदेखी. इसकी लिखित सुचना प्राचार्य और सीएमएस को जेई द्वारा दिए जाने पर सीएमएस की पहल पर पुलिस बल के माध्यम से काम रुकवाया गया. इसके बाद से जेई के मुताबिक उसको भी मौखिक प्रताड़ना प्राचार्य के चार्ज में रहे दिनेश सिंह द्वारा दिया जा रहा है.
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