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योगी को अखिलेश से भी ज्यादा पसंद हैं पीसीएस से तरक्की पाए आईएएस अफसर

#राज्य के 75 में 39 जिलों में डीएम पद पर तैनात हैं प्रोन्नत अधिकारी

# योगी सरकार ने एक महिला अफसर सहित पांच मंडलों में बनाये कमिश्नर

#सहारनपुर मंडल के सभी जिलाधिकारी हैं पीसीएस से प्रमोटेड अफसर

#फैजाबाद मंडल के कमिशनर सहित सभी जिलाधिकारी हैं पीसीएस से आये अफसर

 

टी बी सिंह
लखनऊ : लम्बे अरसे तक सरकारों की उपेक्षा का दंश झेल चुके प्रांतीय सिविल सेवा यानी पीसीएस संवर्ग के अफसरों के फिलहाल अच्छे दिन जारी हैं. पिछले दो दशकों के दौरान तरक्की और तैनाती के मामले में सूबे के प्रशासन की रीढ़ कहे जाने वाले इस संवर्ग ने घोर निराशा और क्षोभकाल में भी बेहतर काम किया और इसका इनाम उन्हें अखिलेश यादव की अगुवाई वाली पिछली सरकार में मिलना शुरू हुआ. इसमें शक नहीं कि अखिलेश यादव की सरकार में पीसीएस अफसरों की रिकार्ड तरक्की हुई और एक वक्त तो इस संवर्ग से आईएएस बने अफसरों की पूरे प्रदेश के करीब आधे जिलों में डीएम के पद पर तैनाती की गयी. लेकिन योगी आदित्यनाथ सरकार ने इन अफसरों को और ज्यादा तवज्जो दी जिसका नतीजा है कि राज्य के कुल 75 जिलों में आधे से ज्यादा यानी 39 में जिलाधिकारी के पदों पर पीसीएस से प्रोन्नत आईएएस अफसर तैनात हैं.

आम तौर पर यह माना जाता है कि जिलों के प्रशासन के कुशल प्रबंधन में कार्यकारी पदों पर ज्यादा अनुभव रखने वाले अफसर ज्यादा कामयाब रहते हैं और यही वजह है कि पिछले कई दशकों से उत्तर प्रदेश को छोडकर देश के ज्यादातर राज्यों में जिलाधिकारी अथवा डीसी के पदों पर राज्य सिविल सेवा से तरक्की पाकर भारतीय प्राशासनिक सेवा में आये अफसरों की तैनाती सीधी भर्ती से आये आईएएस अफसरों के मुकाबले संख्या में काफी अधिक होती रही है. उत्तर प्रदेश में पीसीएस से आईएएस में प्रोन्नति की रफ़्तार बेहद सुस्त होती आई है नतीजतन लम्बे समय तक सीधी भर्ती के आईएएस अफसरों का जिलों और मंडलों की तैनाती में एकाधिकार जैसा रहा है. एक वक्त तो 1976 बैच के सिर्फ एक अफसर चरणजीत सिंह बक्शी को आईएएस में प्रोन्नति के साथ डीएम के पद पर तैनाती मिली थी, शेष बैच और आगे के बैच के अफसरों को वर्षों तक तरक्की का इन्तजार करना पडा था. अगर पिछले दो दशकों का इतिहास देखें तो संवर्ग पुनर्गठन न होने के चलते कई दर्जन ऐसे पीसीएस अफसर आईएएस में प्रोन्नति नहीं पा सके और रिटायर हो गए जो सर्वथा योग्य थे. इन हालातों से आजिज कई अफसरों ने तो ज्यादा विलम्ब और वेतन की दृष्टि से आर्थिक नुक्सान को देखते हुए आईएएस संवर्ग में जाने से ही इनकार कर दिया था.

तारीफ़ करनी होगी अखिलेश यादव सरकार की जिसने पहल की और केंद्र सरकार के डीओपीटी से बेहतर समन्वय बनाकर बड़ी संख्या में पीसीएस अधिकारियों को आईएएस संवर्ग में प्रोन्नति का मार्ग प्रशस्त किया. इतना ही नहीं वाराणसी और लखनऊ सहित कई महत्वपूर्ण जिलों में प्रोन्नत आईएएस अफसरों को डीएम पद पर तैनात भी किया. नौकरशाही में लंबा वक्त गुजार कर सेवानिवृत्त हो चुके कई अफसरों का मानना है कि पीसीएस से तरक्की पाए आईएएस अफसरों की महत्वपूर्ण तैनाती में योगी आदित्यनाथ सरकार पिछली सरकार से कहीं आगे है.

अक्सर सूबे के आधिकांश जिलों में सीधी भर्ती से आये अफसरों को तैनात करने का दबाव इसी संवर्ग के उच्च पदों पर बैठे अफसरों की ओर से रहता था, लेकिन जब सत्ताशीर्ष पर बैठा राजनेता तय कर लेता है कि उसे क्या करना है तब कथित उच्च पदस्थ ब्यूरोक्रेसी भी शिथिल हो जाती है.

फिलहाल प्रदेश के जिलों और मंडलों में मंडल कमिश्नर और जिलों के जिलाधिकारियों की तैनातियों पर नजर डालें तो सूबे के 75 जिलों में से 39 जिलों के डीएम प्रोन्नति पाए आईएएस अफसर हैं. इसके अलावा सूबे के 18 मंडलों में 5 मंडल के कमिश्नर भी प्रमोटी आईएएस ही हैं. इन पांच अफसरों में झांसी में कुमद श्रीवास्तव, मिर्जापुर में मुरली मनोहर लाल, फैजाबाद में मनोज मिश्रा, बस्ती में दिनेश कुमार सिंह और चित्रकूट मंडल में राम विशाल मिश्रा शामिल हैं. प्रोन्नति पायी महिला अफसरों की प्रदेश में कुल 9 जिलों में जिलाधिकारी के पद पर और एक मंडल में कमिश्नर के पद पर तैनाती है, जिनमें दो प्रमोटी आईएएस सुल्तानपुर संगीता सिंह और अमेठी में शकुन्तला गौतम डीएम के पद पर तथा कुमुद श्रीवास्तव मंडलायुक्त के पद पर तैनात है. योगी सरकार का इन प्रोन्नति पाए अधिकारियों पर भरोसे का आलम यह है कि प्रदेश के महत्वपूर्ण मंडलों में से एक फैजाबाद मंडल में मंडलायुक्त से लेकर सभी जिलों के जिलाधिकारी ये प्रोन्नत अफसर हैं. वहीँ सहारनपुर मंडल में कमिश्नर आईएएस लेकिन मंडल के सभी जिलों के डीएम प्रमोटी आईएएस अफसर ही हैं.

योगी सरकार ने प्रदेश के जिन जिलों में प्रमोशन से आईएएस बने इन अफसरों को जिलाधिकारी बनाया है वह सूबे के महत्वपूर्ण जिले माने जाते रहे हैं. फिलहाल प्रदेश के जिन जिलों की कमान संभाल रहे हैं ये अफसर उसमें आजमगढ़,बलिया,मैनपुरी,मथुरा,कासगंज,बरेली,कानपुर देहात,कन्नौज,औरैया,गोरखपुर,महराजगंज,चित्रकूट,हमीरपुर,महोबा,ललितपुर,गोंडा,बहराईच,बलरामपुर,फैजाबाद,बाराबंकी,आंबेडकर नगर,सुल्तानपुर,अमेठी,बंदायूँ,बस्ती,संतकबीर नगर,मिर्जापुर,सोनभद्र,मुरादाबाद,बिजनौर,संभल, गौतमबुद्धनगर,लखीमपुर,वाराणसी,चंदौली ,सहारनपुर,शामली,मुजफ्फर नगर और बांदा जिले शामिल हैं.

 

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