यूपी में उपमुख्यमंत्री के विभाग का बुरा हाल, बस्ती जिले का CMO कार्यालय बना दलाली का अड्डा

#आखिर फर्जी हस्ताक्षर मामले में जांच कमेटी की CMO कार्यालय में उपलब्ध सम्पूर्ण रिपोर्ट आख्या महानिदेशक को 15 दिन बीत जाने के बाद भी उपलब्ध कराने में इतनी देरी क्यों? क्या एक फार्मासिस्ट पूरे सिस्टम पर है भारी?

#स्टाक रजिस्टर में फर्जी हस्ताक्षर के आरोपी रिंगमास्टर चीफ फार्मासिस्ट को पहले गठित कमेटी ने अपने रिपोर्ट में बचाया. अब समिति की रिपोर्ट पर टिपण्णी के साथ, महानिदेशक के 21 मई 2026 को भेजे गए पत्र से मची है खलबली, जवाब देने में छूट रहा पसीना. हांलांकि महानिदेशक कार्यालय भी 02 साल बाद जागा है और 2024 की जांच रिपोर्ट पर मई 2026 में सख्त टिपण्णी के साथ सम्पूर्ण जांच रिपोर्ट तलब किया है.

#प्राईवेट व्यक्ति सूरज उर्फ़ विवान दूबे का आखिर किस क्षमता में CMO कार्यालय में हनक? कामों के बंटवारे में होता है कमीशन का खुला खेल, एक प्राईवेट व्यक्ति का मीटिंग से लेकर कामों में कैसे रहती है पूरी दखलंदाजी? यह संयोग है या फिर प्रयोग, कि बस्ती CMO की तैनाती के साथ ही हुई इसकी उत्पत्ति?

#स्टाक में रिंगमास्टर चीफ फार्मासिस्ट के साथ उसके रिश्तेदार, सजातीय व गृह जनपद के निवासी डॉ बृजेश शुक्ला को शासन के नियमों के विरुद्ध तैनाती देने का क्या मतलब? मिश्रा, दूबे और शुक्ला के समागम और CMO निगम की कृपा से काम कर रहा काकश, और लाभान्वित हो रहीं कुछ चुनिन्दा फर्में.

अफसरनामा ब्यूरो

लखनऊ : उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग का बुरा हाल है. सरकार की मंशा के विपरीत और उसके दावों को धता बताते हुए सिस्टम में बैठे खिलाड़ी रिंगमास्टर की तरह अपने खेल को अंजाम देने में लगे हैं. राजधानी लखनऊ के प्रतिष्ठित मेडिकल यूनिवर्सिटी KGMU में हुए दवा खरीद घोटाले की आग अभी ठंडी भी नहीं हुई कि बस्ती जिले में CMO,CMSD और RCH के साथ एक बाहरी व्यक्ति की जुगलबंदी वहाँ के पूरे सिस्टम पर भारी है और मनमाने कामों को अंजाम दे रही है.

#स्टोर में स्टाक रजिस्टर पर फर्जी हस्ताक्षर मामले में गठित जांच समिति सवालों के घेरे में, भूल बता पल्ला झाड़ने की तैयारी में.

मिली जानकारी के मुताबिक़ स्टोर में स्टाक रजिस्टर पर फर्जी हस्ताक्षर मामले में महानिदेशक के पत्र के बाद गठित जांच समिति और उसके रिपोर्ट पर उठे सवाल के बाद कमेटी के सदस्यों में खलबली मची है और अब भूल बता पल्ला झाड़ने की तैयारी में हैं. और इसके लिए जोर दबाव का खेल खेला जा रहा है. बड़ा सवाल यह है कि जब चीफ फार्मासिस्ट अजय मिश्र के 2024 के स्टोर में किये गए फर्जी हस्ताक्षर के मामले में गठित तत्कालीन जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट दे दी है, और यदि यह निष्पक्ष जांच है तो इसको महानिदेशक को अविलम्ब उपलब्ध कराने में इतनी हीलाहवाली क्यों है? इसके अलावा रिंगमास्टर चीफ फार्मासिस्ट की मिलीभगत या फिर महानिदेशक कार्यालय की लापारवाही का आलम यह है कि 2024 की इस जांच रिपोर्ट पर 2026 में जागे महानिदेशक कार्यालय ने रिपोर्ट पर अपनी निष्पक्ष टिपण्णी के साथ 02 साल बाद 21 मई 2026 को पत्र भेज सम्पूर्ण आख्या मांगी है.

#CMO बस्ती की शह पर काम कर रहा पूरा काकश, CMO की कृपा से बाहरी व्यक्ति विवान दूबे का सिस्टम में रहता है पूरा दखल, और खेल सेंटर, स्टोर की जिम्मेदारी चहेते चीफ फार्मासिस्ट और RCH को, पहले से तैनात RCH डॉ एके गुप्ता को हटा डॉ शुक्ला की तैनाती में CMO ने किया शासनादेश का उलंघन.

बस्ती के CMO ने चार्ज संभालते ही RCH पद पर पहले से तैनात एके गुप्ता की जगह शासन के मानकों को दरकिनार कर डॉ बृजेश शुक्ल को तैनात कर दिया. डॉ शुक्ल की इस तैनाती के खिलाफ पहले से तैनात डॉ एके गुप्ता ने हाईकोर्ट में एक रिट दाखिल किया जोकि अभी तक न्यायालय मे विचाराधीन है. इस तरह बस्ती जिले के CMO कार्यालय में स्टोर जहाँ से दवाओं सहित अन्य उपकरणों और सामग्रियों की खरीद और वितरण संचालित होता है, में वर्षों से जमे रिंगमास्टर चीफ फार्मासिस्ट अजय मिश्र के साथ सजातीय और जिलेजवार के डॉ शुक्ला का साथ और CMO की कृपा मिली.

इसके आलावा प्राईवेट व्यक्ति सूरज उर्फ़ विवान दूबे आखिर किस क्षमता में CMO कार्यालय में पूरी हनक के साथ बैठकों और कामकाज में दखल रखता है, यह एक बड़ा सवाल है? स्टोर से होने वाले कामों के बंटवारे में जारी कमीशन के खुले खेल में एक प्राईवेट व्यक्ति की पूरी दखलंदाजी रहने और उसको CMO सहित काकश के सदस्यों द्वारा प्रश्रय देना “यह संयोग है या फिर प्रयोग” आमजन में चर्चा का विषय बना हुआ है. जानकार बताते हैं कि बस्ती CMO की तैनाती के साथ ही विवान दूबे की उत्पत्ति हुई है और यह CMO के साथ ही सम्बंधित जिले में सक्रिय हो जाता है.

#जोड़-जुगत का है मास्टर माईंड चीफ फार्मासिस्ट अजय मिश्र इसबार भी काम के बदले अपना तबादला रुकवाने में रहा कामयाब.

स्टोर का चार्ज संभाल रहे चीफ फार्मासिस्ट अजय मिश्र पिछले 08 वर्षों से तैनात हैं. बस्ती CMO की इतनी कृपा ने पूरे खेल की बुनियाद रख दिया और रिंगमास्टर का खेल आरम्भ हुआ. साथ ही इस तबादले के सीजन में स्वास्थ्य विभाग में ठेकेदारी का नया हाथ आजमाने जा रहे और पहले अपने धंधे में डूब चुके ठेकेदार ने तबादला रुकवाने के बदले बस्ती में काम करने का आश्वासन ले लिया. इसके अलावा बजट और उसको अपने चहेती फर्मों को काम देकर खपाने का काम शुरू हुआ. मिली जानकारी के मुताबिक़ कुछ चुनिन्दा फर्मों को काम देकर मोटा माल अन्दर करने का खेल किया गया. यही नहीं यह पूरा खेल मुख्य बजट के अलावा अनुपूरक बजट की मांग कर उसमें भी किया गया.

तत्कालीन FC शिवेंद्र मिश्र की कृपा से बजट निकलवाना और फिर उसको अपने चहेती फार्मों के माध्यम से खपाने का काम बखूबी किया गया. रिंगमास्टर की मास्टरी का आलम यह है कि वह कभी किसी गवर्नर को अपना साला और कभी किसी विधायक को अपना दोस्त बताता है. लोकायुक्त की जांच, हर्रेया तहसील में हुए अस्पताल के निर्माण में गड़बड़ियों के आरोपी, फर्जी हस्ताक्षर प्रकरण में शासन की सख्त टिप्पणी और जांच आख्या तलब करने के बाद और अपने बच्चों की शादी में राजधानी के सेंट्रम होटल में जमकर धन लुटाने वाले रिंगमास्टर चीफ फार्मासिस्ट अजय मिश्रा को सरकार का वद्रहस्त प्राप्त है. एक जिले में दो दसक से ज्यादा और एक ही कुर्सी पर 08 वर्षों से जमे चीफ फार्मासिस्ट ने इसबार अपने तबादले को रोकने के लिए एड़ी छोटी का जोर लगाया और कामयाब रहा है. सूत्रों के मुताबिक़ राजधानी के प्रतिष्ठित होटल में विगत वर्ष संपन्न हुए शादी समारोह का बिल रिंगमास्टर चीफ फार्मासिस्ट की चहेती फार्म द्वारा किया गया. रिंग मास्टर अपने इसी पैसे और प्रभाव के बल पर एक बार फिर अपना तबादला रुकवा फिर से खेल में उतरने को तैयार है.

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